अदरक की खेती कैसे करें (adrak ki kheti)

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अदरक वाली चाय! के बिना आप जीवन की कल्पना भी नही कर सकते। आजकल तो टीवी में भी अदरक वाली चाय का प्रचार आता है। माँ कहती है इसमें अदरक होती है…। हमारे देश में अदरक का उपयोग प्राचीनकाल से ही होता आ रहा है।अदरक जिंजीबरेसी (zingiberaceae) कुल परिवार से है।

इसका अदरक का वैज्ञानिक नाम जिंजीवर ओफिसिनेल (zingiber officinale ) है।

अदरक का उपयोग साग-सब्ज़ी बनाने में, छौंका लगाने में, चटनी सलाद व अचार आदि के साथ तमाम प्रकार की खाद्य सामग्रियों को बनाने में किया जाता है। आज कल अदरक की खेती को लोग एक बिज़नेस के रूप में कर रहे हैं ।पूरे वर्ष की अदरक की माँग बाज़ार में बनी रहती है। सर्दी, ख़ासी, ज़ुकाम सहित तमाम बीमारियों में अदरक औषधि के रूप में काम आती है ।

अदरक में औषधीय तत्वों की बात करें । तो अदरक प्रोटीन,वसा, कार्बोहाईड्रेट, तथा थायमिन,रिबोफ्लेविन, निकोटीन अम्ल, विटामिन A, C, से भरपूर होता है।

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इसे सुखकर सोंठ बनायी जाती है। किसान भाइयों आपको यह जानकर बेहद हैरानी होगी। कि अदरक की खेती अन्य फ़सलों के मुक़ाबले अधिक की जाने लगी है। अगर हम विश्व स्तर पर अदरक की खेती की बात करें। तो यह भारत से पाकिस्तान, कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और मास्को सहित बहुत सारे देशों में भेजा जाता है। हम विश्व का 15 प्रतिशत अदरक अपने देश में पैदा करते हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है।

kheti kisani में आज हम अदरक की खेती (adrak ki kheti ) की जानकारी देने जा रहे हैं।

जलवायु व तापमान –

किसी भी फ़सल को उगाने के लिए सबसे पहले हमें पौधे के लिए उपयुक्त जलवायु की जानकारी होनी चाहिए। अदरक एक गरम व तर जलवायु का पौधा है। 50-60 वार्षिक सेमी0 वाले स्थानों में अदरक की खेती आसानी से की जाती है। अदरक की खेती (adrak ki kheti ) समुद्र तक 1500 मीटर की ऊँचाई तक की जा सकती है ।

भूमि का चयन –

adrak ki kheti के लिए bhumi ki jankari होना बहुत ज़रूरी है । उचित जल निकास वाली दोमट, रेतीली भूमि सर्वोत्तम होती है। इसके अलावा अदरक की खेती (adrak ki kheti ) रेतीली, चिकनी दोमट, लाल दोमट और लैटराइट दोमट मृदाओं में भी की जाती है।

अदरक की खेती के लिए भूमि की तैयारी –

सबसे पहले 4 से 5 जुताइयाँ देशी हल अथवा कल्टीवेटर के करनी चाहिए। फिर पाटा लगाकर खेत को समतल कर लें। ऐसा करने से ढेले टूट जाएँगे और खेत भुरभुरा हो जाएगा। बुवाई से पहले थीमेट 10 जी की 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से भूमि को उपचारित कर लेना चाहिए।

बुवाई का समय –

सिंचित क्षेत्रों में अदरक की बुवाई अप्रैल से मई तथा असींचित क्षेत्रों में मई से जून में की जाती है। किसान भाई याद रखे अदरक की खेती (adrak ki kheti ) हेतु बुवाई का फ़सल उत्पादन में बड़ा प्रभाव होता है।

अदरक की नवीन उन्नत क़िस्में-

कोल 117,एक्सेशन 35, सुप्रभा व सुरुचि अदरक की उन्नत क़िस्में है इन क़िस्मों से 18-25 टन प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त हो जाती है।

बीज की मात्रा व बीज उपचार –

एक हेक्टेयर अदरक की खेती (adrak ki kheti ) में बुवाई के लिए 20-25 कुन्तल प्रकंदो की आवश्यकता होती है।अदरक की खेती (adrak ki kheti ) के लिए दो आँखों वाले प्रकंड का भार औसतन 25-30 ग्राम होना चाहिए। बीज रोग रहित होना चाहिए इसके लिए डाईथेन एम-45 की 0.25%  अथवा बाविस्टीन 0.1% के घोल को 60 मिनट तक डुबा कर बीज उपचारित कर लेना चाहिए।

बीज अंतरण व दूरी –

अदरक की बुवाई के लिए लाइन से लाइन की दूरी 25-30 सेंटीमीटर व पौध से पौध की दूरी 15-20 सेंटीमीटर रखें।

बुवाई की विधि –

बीज उपचार के बाद घंटे भर अदरक के प्रकंदों को छाया में सुखा लेना चाहिए। अदरक की बुवाई शाम को करना अच्छा माना जाता है। अदरक की खेती (adrak ki kheti ) इसके बाद ‘कंदो को ऊपर बतायी दूरी के अनुसार लगभग 4 सेंमी0 की गहराई पर दबा देना चाहिए। तेज़ धूप से बचाव के लिए बुवाई के बाद खेत को गोबर, घास फूस अथवा पत्तियों से ढक देना चाहिए। ऐसा करने से अंकुरण अच्छा होता है।

खाद व उर्वरक –

अदरक की उन्नत खेती सफलतापूर्वक करने करने के लिए जैविक खेती बढ़िया होती है। इसके लिए गोबर की खाद 25-30 टन को जुताई के पहले खेत में बिखेर देना चाहिए। इसके अलावा रासायनिक उर्वरकों में N:P:K – 75 : 50 : 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें । नाइट्रोजन की आधी मात्रा व बाक़ी सभी उर्वकों की पूरी मात्रा खेत में जुताई के समय डाल देंना चाहिए ।

सिंचाई व जल प्रबंधन –

खरपतवार नियंत्रण –

कीट नियंत्रण –

रोग नियंत्रण –

खुदाई –

उपज –

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