अनार की उन्नत बागवानी की तकनीक (Pomegranate Gardening)

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अनार की खेती एक बार व्यवसायिक तरीक़े से सेटल होने पर 15 से 20 साल एक अच्छा आमदनी का रास्ता खुल जाता है । भारत में अनार की खेती महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात में बड़े पैमाने पर की जा रही है। अनार एक पौष्टिक व गुणों से भरपूर फल है । खून की कमी को पूरा करता है। इसलिए साल के पूरे 12 महीने इसकी डिमांड कम नही होती । चौराहों व अस्पतालों के पास सजी फल की दुकानों में अनार की विशेष डिमांड होती है । अनार में Vitamin A,Vitamin C, Vitamin E, Folic Acid, Anti-oxidant भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । आयुर्वेद में अनार के जड़, तना , फल, पत्ती, व फल का छिलका आदि सभी काम में आते हैं । अनार के फलों में कई स्वास्थ्य वर्धक एंज़ाइम व पोषक तत्व मौजूद जोते हैं । अनार खाने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है । बाज़ारों में अनार की माँग लगातार बढ़ रही है । खेती किसानी (www.khetikisani.org) अनार की खेती व्यवसायिक बागवानी लगाने की सिफ़ारिश करता है । आज हम इस आर्टिकल में अनार की खेती व अनार की बागवानी कैसे करें इस विषय पर आपको पूरी जानकारी देने जा रहे हैं ।

अनार की उन्नत बागवानी की तकनीक (Pomegranate Gardening)
अनार की उन्नत बागवानी की तकनीक (Pomegranate Gardening)

अतः पोस्ट को स्किप ना करके पूरा पढ़ें । ताकि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट न जाए –

अनार की खेती की पुरानी ढर्रे वाली परंपरागत प्रणाली को छोड़कर वौज्ञानिक विधि से करने पर न सिर्फ़ उत्पादन अधिक प्राप्त होता है । इसके साथ अच्छे गुणवत्ता वाले फल भी प्राप्त होते हैं । आज अनार की सघन बागवानी (High Density Orcharding ) का चलन है । इसे high density planting – HDP भी कहा जाता है ।

उपयुक्त मिट्टी का चयन-

Selection of suitable soil
अनार की खेती के लिए इसकी खेती के लिए 6.5 से 7.5 पी.एच. वाली, रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है । इसके अच्छी जल निकास व कार्बनिक गुणों से भरपूर भूमि में अनार की खेती से अच्छा उत्पादन मिलता है । अच्छी जल निकासी हल्की भूमि में अनार की खेती की जा सकती है । बस जल निकास अच्छा हो ।

जलवायु और तापमान –

Climate and temperature –
नार के पौधे के लिए सामान्य व ऊष्ण गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है । अनार की खेती के लिए ज्यादा गर्मी उपयुक्त होती है । सामान्य ताप पर अनार के पौधे का विकास अच्छा होता है । उच्च तापमान पर फलों के रंग आकर्षक होता है । व पकने के समय भी उच्च तापमान की ही ज़रूरत पड़ती है ।

उन्नत किस्में

Advanced varieties –

क्रम संख्या उन्नत किस्म का नाम किस्म का गुण व विवरण
1- ज्योति अनार की ये भी एक संकर किस्म है. जिसको बेसिन और ढ़ोलका के संकरण से तैयार किया गया है. इसके फलों का आकर सामान्य से थोड़ा बड़ा होता है. जिनका रंग पीलापन लिए हुए लाल चमकीला होते है. और इसके बीजों का रंग गुलाबी होता है. इसके एक पौधे से 8 से 10 किलो फल आसानी से प्राप्त हो जाता हैं.
2- बेदान अनार की इस किस्म को अधिक शुष्क जगहों के लिए तैयार किया गया है. इसके फलों का आकार सामान्य होता है और फलों का रंग लाल होता है. इसके बीज भी हल्के लाल रंग के पाए जाते हैं. जो अपने मिठास और अधिक रसदार होने के लिए जाने जाते हैं. इसके एक पौधे की पैदावार 10 किलो के आसपास पाई जाती है।
3- फूले अरक्ता अनार की इस किस्म को महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी, महाराष्ट्र के द्वारा तैयार किया गया है. इसके प्रति पौधे से 25 से 30 किलो तक फल प्राप्त हो जाते हैं. इसके फलों का आकार बड़ा होता है. जिनका रंग लाल और आकर्षक होता है. इसके बीज मुलायम और लाल रंग के होते हैं. इस किस्म को अधिक पैदावार देने के लिए तैयार किया गया है.
4- मृदुला मृदुला अनार की ये एक संकर किस्म है. जिसको गणेश और गुल-ए-शाह के संकरण से महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी, महाराष्ट्र ने तैयार किया है. इसके फलों का छिलका चिकना और गहरे लाल रंग का होता है. इसका फल सामान्य आकार का होता है. इसके बीज मुलायम रसदार और गहरे लाल रंग के होते हैं. इसके एक पौधे की उपज 15 से 20 किलो तक पाई जाती है.
5- गणेश गणेश अनार की ये किस्म ज्यादा तापमान लम्बे समय तक सहन नही कर पाती. अधिक तापमान के कारण इसके फलों में गुणवत्ता की कमी हो जाती है. इसके छिलके का रंग गुलाबी पीला होता है. जबकि इसके बीजों का रंग गुलाबी होता है. इसके बीज चबाने में बिलकुल नर्म और रसीले होते हैं. इसके फल लगभग 160 दिन में तैयार हो जाते हैं. इसके एक पौधे से 10 से 15 किलो फल प्राप्त किये जा सकते हैं. इस किस्म को महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा उगाया जाता है ।
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अनार की बागवानी हेतु पौध तैयार करना
आम तौर पर अनार के पौधे बीज द्वारा नर्सरी में तैयार किये जाते हैं । यह अनार की बागवानी की पुराना तरीका है । आजकल इसे कलम के माध्यम से लगाना अच्छा होता है । क्योंकि बीज से पौधे को उगाने पर पौधा फल देने में ज्यादा समय भी अधिक लगता है । इसके अलावा कलम से तैयार पौधा तीन साल बाद फल देना शुरू कर देता है ।
नर्सरी में अनार की कलमें कई विधि से तैयार की जाती है । जिनमें –
– गूटी बांधना
– कास्ठ कलम विधि
– ग्राफ्टिंग और कलम विधि प्रमुख हैं । लेकिन इनमें से गूटी बांधना और ग्राफ्टिंग सबसे उपयुक्त विधि हैं।

खेत की जुताई

खेत की जुताई व पाटा लगाकर समतल कर लेते हैं । समतल करने के बाद उसमें 4 से 5 मीटर की दूरी पर पंक्तियों में गड्डे तैयार कर लें । हर गड्डों के बीच में 3-4 मीटर की दूरी रखें । ये कार्य किसान भाई मई के महीने में कम्प्लीट के लें । अनार की खेती के लिए आप गड्डों का shape गोल या वर्गाकार रूप में 60 सेमी० चौड़ाई और 60 सेमी० गहराई में तैयार करें ।

जब सभी गड्डे तैयार हो जाएं । उनमें जैविक और रासायनिक खाद (Organic and chemical fertilizers) की उचित मात्रा को मिट्टी में मिलाकर भर दें । अनार की बागवानी के लिए तैयार गड्ढो में खाद भरने के बाद सिंचाई कर दें । गड्डों की सिंचाई करने के बाद उसे ढक दें । जिससे मिट्टी जल्द डीकम्पोज हो जाती है । मिट्टी में नमी संचित हो जाती है । व मिट्टी खाद व उर्वरक के तत्वों को अवशोषित कर लेती है । इसके अलावा गड्डों में पनपने वाले खरपतवार भी नष्ट हो जातें हैं ।

उर्वरक की मात्रा

अनार की खेती से गुणवत्तापूर्ण फल व अधिक पैदावार में लिए जैविक खाद का प्रयोग किसान भाई करें । बिना किसी रासायनिक खाद के इस्तेमाल के भी की जा सकती है । बस पौधों को समय समय नियमित रूप से जैविक खाद के माध्यम से पोषक तत्व देते रहें । बाजार में आर्गेनिक फलों की कीमत भी अधिक मिलती है ।
किसान भाई रासायनिक खादों से थोड़ी दूरी बनाने की कोशिश करें । जैविक खाद को बढ़ावा दें । जिससे मृदा संरचना में सुधार होता है । साथ ही पैदावार भी अच्छी मिलती है ।

अनार की खेती के लिए गड्डों की भराई के वक्त प्रत्येक गड्डों में 10 से 15 किलो गोबर की खाद को मिट्टी में मिलाकर गड्डों में डाल दें । गोबर की खाद की जगह कम्पोस्ट खाद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं ।
जैविक खाद के अलावा अगर रासायनिक खाद डालनी हो तो NPK – Nitrogen Phosphorous Potash की 250 ग्राम मात्रा को गोबर की खाद के साथ मिलाकर उसे गड्डों में भर दें । स्मरण रहे कि यह प्रक्रिया पौधे के गड्डों में लगाने से एक महीने पहले की जाती है।

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