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बादाम की खेती की कैसे करें | बादाम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक

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भारत देश मे बादाम हालांकि एक मेवा होता है | ड्राई फ्रूट में बादाम का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान हैं। इसका उपयोग खाने के अलावा मिठाई बनाने में किया जाता है। सर्दियों में बादाम के लड्डू बनाए जाते हैं जो काफी स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। बादाम का सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी अच्छा माना गया है। इसी के साथ इसका तेल का उपयोग बालों और दिमाग के लिए लाभकारी बताया गया है। भारत में बादाम का प्रयोग शादियों, जन्मदिन और नव वर्ष पर गिफ्ट पैक के रूप में किया जाता है। प्रमुख त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर आज मिठाई की जगह लोग ड्राई फ्रूट का आदान-प्रदान करते हैं जिसमें बादाम को प्रमुख रूप से शामिल किया जाता है।

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किन्तु तकनीकी दृष्टि से यह बादाम के पेड़ के फल का बीज होता है। बादाम का पेड़ एक मध्यम आकार का पेड़ होता है और जिसमें गुलाबी और सफेद रंग के सुगंधित फूल लगते हैं।

Almond Commercial Cultivation Information | Grow More Profit in Almond Farming

ये पेड़ पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इसके तने मोटे होते हैं। इसके पत्ते लम्बे, चौड़े और मुलायम होते हैं। इसके फल के अन्दर की मिंगी को बादाम कहते हैं।बादाम के पेड़ बादाम एक गुलाब वर्गीय एक ऐसा पेड़ है जिसका फल दिखने में आडू की तरह का होता है बादाम के पेड़ में हल्के गुलाबी और सफेद रंग के सुगंधित फूल लगते हैं। बादाम के पेड़ का तना मोटा होते हैं। एवंम इसके पत्ते लम्बे, चौड़े और मुलायम होते हैं।

विश्व में कहां-कहां होती है बादाम की खेती | (Almond Farming in World )

बादाम की खेती प्राय: ठन्डे क्षेत्रो में की जाती है जिसे बीज के द्वारा भी लगाया जा सकता है दुनियाभर में अमेरिका बादाम का सबसे बड़ा निर्यातक देश है जहा का कैलोफोर्निया बादाम दुनियाभर में खाया जाता है जो की आकार में भारतीय बादाम से बड़ा होता है । इसके अलावा बादाम की खेती स्पेन, इटली, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, मोरक्को, पुर्तगाल, तुर्की, फ्रांस, अल्जीरिया, अफगानिस्तान और पर्सिया जैसे देशों में भी बादाम की खेती की जा सकती है ।

भारत में कहां-कहां होती है बादाम की खेती | (Almond Farming in India)

भारत में बादाम की खेती मुख्य रूप से कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंडे क्षेत्रों और चीन की सीमा से लगे तिब्बत, लाहौल एवं किन्नोर जिले आदि में की जाती है। लेकिन अब इसकी शौकिया तौर पर खेती बिहार, यूपी और एमपी में भी की जा रही है। बिहार-यूपी-एमपी जैसे राज्यों के किसानों ने बादाम के पौधे लगाए हैं जो अब बड़े होकर फल देने लगे हैं। हाल ही में ग्वालियर के डबरा कस्बे के एक किसान का न्यूज काफी वायरल हुआ था। दरअसल डबरा कस्बे के किसान प्रभुदयाल ने शौकिया तौर पर बादाम का पेड़ लगाया था जो अब फल देने लगा है। इससे यह सिद्ध होता है कि कुछ सावधानियों के साथ इसकी खेती गर्म जलवायु में भी की जा सकती है।

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Almond Farming Bussiness Idea | किसानों को मालामाल करेगी बादाम की खेती, बस एक बार लगाएं पौधा और 50 साल तक कमाते रहें मुनाफा!

बादाम के प्रकार-बाजार में कई प्रकार की बादाम मिलती है जिसमे मामरा , केलिफोर्निया या अमरीकन बादाम तथा छोटी गिरी मुख्य हैं। मीठी बादाम ही खाने में काम आती है। कड़वी बादाम का तेल निकाला जाता है।
मामरा बादाम मामरा बादाम और केलिफोर्निया बादाम में क्या फर्क होता है

मामरा बादाम और केलिफोर्निया बादाम में अंतर की बात करे तो जहा मामरा अफगानिस्तान में पैदा होता है एवंम इसका उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है। वही अमरीकन बादाम केलिफोर्निया में पैदा होता है और इसका उत्पादन अत्यधिक मात्रा में होता है। इसका कारण वैज्ञानिक तरीके से खेती करना है।

बादाम के प्रकार

वैसे तो ज्यादातर बादामों के नाम उनके देशों के हिसाब से भी है जैसे अमेरिकन बादाम, ईरानी बादाम, स्पेनिश बादाम लेकिर मुख्य रूप से दो ही प्रकार के बादाम होते है, कैलिफोर्निया (अमेरिकन) बादाम और मामरा बादाम।

Almond Advanced Improved Varieties | बादाम की उन्नत किस्में

बादाम की कुछ व्यावसायिक किस्मों में नॉन-पैरिल, कैलिफ़ोर्निया पेपर शेल, मर्सिड, आईएक्सएल, शालीमार, मखदूम, वारिस, प्रणयज, प्लस अल्ट्रा, प्रिमोर्स्कीज, पीयरलेस, कार्मेल, थॉम्पसन, प्राइस, बट्टे, मोंटेरे, रूबी, फ्रिट्ज, सोनोरा, पाद्रे, ड्रेक, थिनरोल्ड मुख्य रूप से बादाम की किस्मे है।

आप भी बादाम के प्लांट आसानी से उगा सकते हो |जुलाई के समय बादाम के प्लांट को आपने बगीचे में लगा सकते है।

बादाम की खेती के लिए खेत की तैयारी | Soil Preparation for Almomd Cultivation

बादाम के पौधे लगाने के लिए खेत को अच्छी प्रकार तैयार करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की जुताई करनी चाहिए। इसके बाद 3 से 4 बार कल्टीवेटर या देशी हल से जुताई करें। इसके बाद पाटा लगाकर खेत को समतल कर लेना चाहिए।

बादाम खेती के लिए आवश्यक जलवायु और तापमान

Almond Farming Suitable Climate and Temperature

बादाम की खेतीं के लिए जलवायु की बात की जाये तो इसके लिए , गर्मियों में तापमान में 30 से 35 डिग्री सेल्सियस पौधे की वृद्धि और गिरी भरने के लिए आवश्यक है एवमं सर्दियों में 2.2 डिग्री सेल्सियस तक का सामना करना पड़ेगा, लेकिन पत्ती के गिरने के अवस्था में फूल 0.50 डिग्री सेल्सियस से -11 डिग्री सेल्सियस में क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। फूल जब छोटे होते है तब वे 2.2 डिग्री सेल्सियस से 3.3 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान का सामना कर सकते हैं, लेकिन अगर कम तापमान निरंतर लंबे समय तक बने रहने पर ये फसल को आसानी से नुकसान पंहुचा सकता हैं

बादाम में पाए जाने वाले पोषक तत्व | Almond Nutrition Value

बादाम भारतीयों की सबसे पसंदीदा गिरी है और खास मेवा है । यह सभी गिरियों में ज्यादा पोषक एवं औषधीय गुणयुक्त है। इसकी गिरी से महत्तवपूर्ण तेल बादाम रोगन प्राप्त होता है। जब गिरी पक जाती है तब तुड़ाई की जाती है। बादाम गिरी ऊर्जा का बहुत अच्छा स्रोत है। 100 ग्राम ताजी गिरी में 598 कैलोरी ऊर्जा, 19 ग्राम प्रोटीन, 59 ग्राम वसा तथा 21 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है गुणों से भरपूर बादाम का बहुत आधिक मात्रा में सेवन करना हमारे शरीर के लिए नुकसान दायक होता है।

Almond Health Benefits in Hindi | बादाम खाने के फायदे

बादाम एक तरह का मेवा होता है। आयुर्वेद में इसको बुद्धि और नसों के लिए गुणकारी बताया गया है। एक आउंस (28 ग्राम) बादाम में 160 कैलोरी होती हैं, इसीलिए यह शरीर को उर्जा प्रदान करता है। लेकिन बहुत अधिक खाने पर मोटापा भी दे सकता है। इसमें निहित कुल कैलोरी का तीन बटा चार भाग वसा से मिलता है, शेष कार्बोहाईड्रेट और प्रोटीन से मिलता है। इसका ग्लाईसेमिक लोड शून्य होता है। इसमें कार्बोहाईड्रेट बहुत कम होता है। इस कारण से बादाम से बना केक या बिस्कुट, आदि मधुमेह के रोगी भी खा सकते हैं। बादाम में फाईबर या आहारीय रेशा पाया जाता है जो पाचन में सहायक होता है और हृदय रोगों से बचने में भी मदद करता है, तथा पेट को अधिक देर तक भर कर रखता है। इस कारण कब्ज के रोगियों के लिए लाभदायक रहता है। बादाम में सोडियम नहीं होने से उच्च रक्तचाप रोगियों के लिए भी लाभदायक रहता है। इनके अलावा पोटेशियम, विटामिन ई, लौह, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फास्फोरस भी होते हैं जो स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी लाभकारी हैं।

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बादाम की खेती में प्रवर्धन की विधियां

बादाम के पौधे का प्रवर्धन छल्ला चश्मा, टी चश्मा, कलम विधि द्वारा किया जाता है। चश्मा चढ़ाने का उचित समय अप्रैल-मई होता है। वहीं कलम बांधने का उचित समय जनवरी-फरवरी माना जाता है।

बादाम की खेती के लिए पौध रोपण (Planting for Almond Cultivation)

रोपाई के लिए बादाम का बीजू या एक साल पुराना ऐसा पौधा होना चाहिए जिसकी जड़े स्वस्थ्य और पत्ती रहित हो. खेत में तैयार गड्ढों में सबसे पहले गोबर खाद, केंचुए की खाद मिलाकर डाले. इसकी रोपाई का सही समय नवंबर से दिसंबर का महीना होता है. रोपाई से पहले 1×1×1 मीटर का गड्ढा तैयार करें. वहीं पौधे से पौधे की दूरी 6 मीटर तथा कतार से कतार की दूरी 7 मीटर रखना चाहिए. अच्छे परागण के लिए प्रति हेक्टेयर 5-7 डिब्बे मधुमक्खी के रखें।

बादाम की खेती के लिए सिंचाई (Irrigation for Almond Cultivation)

बादाम खेती में सर्दी के दिनों में 20 से 30 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करना चाहिए. जबकि गर्मियों में पेड़ों में 10 दिनों के अंतराल पर नियमित रूप से सिंचाई करना चाहिए. बता दें कि फल देने वालों पौधों में गर्मियों के दिनों में नियमित सिंचाई देना बेहद जरुरी होता है. इससे बिना पके फलों के गिरने की समस्या दूर हो जाती है. वहीं बादाम के वृक्षों के चारों तरफ मिट्टी के ऊपर भूसा, पत्तियों या फिर अन्य कार्बनिक पदार्थों का उपयोग करना चाहिए. इससे वृक्ष के आसपास खरपतवार कम निकलते हैं।

बादाम की खेती में खरपतवार नियंत्रण के उपाय | Weed Control in Almond farming

बादाम की खेती में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई का काम करना चाहिए और खरपतवार को हाथ से निकल कर खेत से कहीं दूर फेंक देना चाहिए। बादाम के पौधे की पहली निराई रोपण के 10 से 15 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद दूसरी निराई का काम 25 से 35 दिन के बाद करना चाहिए। वहीं तीसरी निराई 45 दिन बाद करनी चाहिए। यदि खेत में खरपतवार अधिक है तो 2 से 3 बार हाथ से निराई करनी चाहिए।

बादाम की तुड़ाई | Almong Harvesting

बादाम पौधे रोपने के तीसरे साल से यह फल देना शुरू कर देता है। फूल आने के 7-8 महीने बाद बादाम को तोड़ा जा सकता है। फल तोडऩे के बाद उससे छाया में सुखाना चाहिए फिर गिरी को फली से अलग कर देना चाहिए। बता दें कि हालांकि बादाम 3 से 4 साल में फल देना शुरू कर देता है लेकिन पूरी तरह से फल देने लायक 6 साल में होता है। एक बादाम के पेड़ से इस तरह 50 साल तक बादाम के फल प्राप्त किए जा सकते हैं।

बादाम के एक पेड़ से प्राप्त उपज | Yield from Almomd

बादाम की उपज क्षेत्र और किस्मों पर निर्भर करती है। फिर भी बादाम के एक पेड़ से 2 से 2.5 किलोग्राम सूखे बादाम प्रति पेड़ प्रति वर्ष प्राप्त हो जाते हैं।

बादाम का बाजार भाव

बाजार में बादाम का भाव 600 रुपए से 1000 रुपए प्रति किलोग्राम है। बाजार में बादाम की कीमत मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है जो इसके हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

कैसे करें बादाम के पौधे / बादाम के पेड़ की देखभाल

बादाम के पौधे अथवा पेड़ की आवश्यकतानुसार नियमित सिंचाई करनी चाहिए। इसके लिए टपक विधि को अपनाया जा सकता है।

युवा पौधों में हर 2 सप्ताह में सिंचाई की जा सकती है। जबकि वयस्कों पेड़ को 20-25 दिनों में एक बार सिंचाई की आवश्यकता होती है।

वसंत के मौसम में बादाम के पौधे/पेड़ में फर्टिलाइजर का प्रयोग जरूर करें। लेकिन फर्टिलाइजर देने केे बाद पौधे/पेड़ को पानी देना नहीं भूलें।

यदि फर्टिलाइजर बिना पानी एड किए दिया जाए या बिना पानी के दिया जाए तो पौधे के जलने की संभावना रहती है।

प्राथमिकता सर्कल को ढीला करने से पेड़ के विकास पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। पहली बार यह काम मार्च के अंत में 10-12 सेंटीमीटर की गहराई तक किया जाता है।

बादाम के पौधे से समय-समय पर खरपतवार को हटाना आवश्यक है। इसके लिए आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई कर खरपतवार निकालें और इसे खेत से दूर फेंक दें ताकि अन्य स्वस्थ पौधे इसके संपर्क में आ पाएं।

बादाम की खेती के साथ खेत में बची हुई जगह पर अन्य प्रकार की सब्जियां उगाई जा सकती हैं।

बादाम की खेती की सफलता के मूलमंत्र |

अगर आप बहुत अच्छी पैदावार चाहते हैं तो इसके साथ ही मधुमक्खी पालन भी करें, जो आपके पौधों में परागण को बढ़ाएंगी, जिससे उत्पादन बढ़ेगा।

बादाम की खेती करने से पहले कृषि विशेषज्ञ से अपनी अपनी मिट्टी की जांच करवा लें और साथ ही जलवायु के हिसाब से ये भी पता कर लें कि किस किस्म के बादामउगाने चाहिए। अलग-अलग जलवायु के हिसाब से अलग-अलग किस्म होती है। गलत किस्म लगाने से उत्पादन पर असर पड़ता है।

गर्मियों में हर 10 दिन में सिंचाई करनी चाहिए, जबकि ठंड में 20-25 दिन में सिंचाई करनी चाहिए। बादाम के पौधों को हवा से बचाने के लिए उसे बांस से सहारा देना चाहिए। बादाम की खेती के साथ-साथ अन्य तरह की सब्जियां भी उगाई जा सकती हैं।

बादाम की खेती से कितना मुनाफा?

वैसे तो बादाम का पेड़ 3-4 साल में फल देने लगता है, लेकिन पूरी क्षमता से फल देने में बादाम के पेड़ को करीब 6 साल लग जाते हैं। अच्छी बात ये है कि बादाम के पेड़ एक बार लगाने के बाद 50 साल तक फल देते रह सकते हैं। अलग-अलग किस्म के हिसाब से अलग-अलग उत्पादन मिलता है, इसलिए मुनाफा भी कम-ज्यादा हो सकता है। बाजार में बादाम का भाव 600 रुपए से 1000 रुपए प्रति किलोग्राम है। एक पेड़ से 2-2.5 किलो सूखे बादाम हर साल मिलते हैं। यानी आपको पहली बार खेती में खर्च करना होगा और फिर उसके बाद बस रख-रखाव करते रहें और फायदा कमाते रहें। वहीं बादाम के खेत में अन्य सब्जियों की खेती भी करें, जिससे आपका मुनाफा और बढ़ेगा।

बादाम की खेती अधिक जानकारी के यहां संपर्क करें :

1-केरल हॉर्टिकल्चर विभाग
पता : सनी डेल. मेड्स लेन. पलायम, तिरुवंतपुरम, केरल
फ़ोन : (0471) – 2330856

2- कश्मीर हार्टिकल्चर विभाग
पता : राज बाग़, श्रीनगर, जम्मू -कश्मीर-190008.
फोन : (0194) -2311456

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