36 C
Lucknow
Wednesday, April 14, 2021
Home ANIMAL HUSBANDRY पशुधन बीमा योजना पशुपालन की सरकारी योजना जाने

पशुधन बीमा योजना पशुपालन की सरकारी योजना जाने

पशुपालन की सरकारी योजनायें : पशुधन बीमा योजना,मैत्री योजना,ग्रामीण बैकयार्ड कुक्कुट विकास योजना की जानकारी हिंदी में पढ़ें Animal husbandy govt schemes

पशुपालन की सरकारी योजनायें-

पशुधन बीमा योजना-

पशुपालन की सरकारी योजनायें : पशुधन बीमा योजना,मैत्री योजना,ग्रामीण बैकयार्ड कुक्कुट विकास योजना की जानकारी हिंदी में पढ़ें Animal husbandy govt schemes
पशुपालन की सरकारी योजनायें : पशुधन बीमा योजना,मैत्री योजना,ग्रामीण बैकयार्ड कुक्कुट विकास योजना की जानकारी हिंदी में पढ़ें Animal husbandy govt schemes

योजना का उदेश्य पशुपालकों को उनके पशुओं हेतु बीमे की सुविधा प्रदान कर, दुधारु/गैर दुधारु/अन्य पशुओं की मृत्यु से होने वाली हानि की पप्रतिपूर्ति करना एवं होने वाली आर्थिक हानि को रोकना हैं। योजना की क्रियान्वयन इकाई म0प्र0 पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014-15 से पूर्व संचालित पशुधन बीमा योजना प्रारुप में संशोधन कर, पशुधन बीमा को रिस्क मैनेजमेंट के रुप में राष्ट्रीय पशुधन मिशन में शामिल किया गया है, जिसमें प्रदेश के समस्त जिले शामिल किए गए हैं। योजनान्तर्गत सभी प्रकार के पशुओं का बीमा ( दुधारु देशी/संकर गाय व भैंस, अन्य जानवर जैसे-घोडा/गधा/उंट/नर-गौंवंश भैंस वंश/बकरी/भेड/सूकर/ खरगोश इत्यादि) से लाभान्वित किया जाएगा। अब यह योजना गरीबी रेखा से उपर वाले हितग्राहियों हेतु केन्द्रांश 25 प्रतिशत, राज्यांश 25 प्रतिशत एवं 50 प्रतिशत हितग्राही अंशदान से तथा अनुसूचित जाति/जनजाति/गरीबी रेखा से नीचे वाले हितग्राहियों हेतु केन्द्रांश 40 प्रतिशत, राज्यांश 30 प्रतिशत एवं हितग्राही अंशदान 30 प्रतिशत पर संचालित की जा रही।

मैत्री योजना-

पशुपालन की सरकारी योजनायें : पशुधन बीमा योजना,मैत्री योजना,ग्रामीण बैकयार्ड कुक्कुट विकास योजना की जानकारी हिंदी में पढ़ें Animal husbandy govt schemes
पशुपालन की सरकारी योजनायें : पशुधन बीमा योजना,मैत्री योजना,ग्रामीण बैकयार्ड कुक्कुट विकास योजना की जानकारी हिंदी में पढ़ें Animal husbandy govt schemes

 

 
यह योजना भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एनपीबीबी योजना अंतर्गत वर्ष 2014-15 से संचालित है। इस योजना के तहत गौसेवकों को चार माह का कृत्रिम गर्भाधान का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसमें 1 माह का सैद्वांतिक प्रशिक्षण कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थानों में एवं 3 माह का प्रायोगिक प्रशिक्षण जिलों के कृत्रिम गर्भाधान केन्द्रों/पशु चिकित्सालयों में दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रति प्रशिक्षणार्थी राशि रू. 4000/- प्रतिमाह के हिसाब से कुल 4 माह की प्रशिक्षण अवधि हेतु कुल राशि रू.16000/- स्टाईफंड के रूप में दी जाती है। प्रशिक्षण उपरांत उन्हें कृत्रिम गर्भाधान किट प्रदाय की जाती है ताकि वह क्षेत्र में जाकर कृत्रिम गर्भाधान कार्य एवं अन्य कार्य प्रारंभ कर सकें। मैत्री द्वारा कार्य प्रांरभ करने के उपरंात उन्हें 3 वर्षों के लिए टेपरिंग ग्रांट दिए जाने का प्रावधान है। जिसमें प्रथम वर्ष में राशि रू.1500 प्रतिमाह, द्वितीय वर्ष मंे राशि रू. 1200 प्रतिमाहएवं तृतीय वर्ष में रू.800 प्रतिमाह टेपरिंग ग्रांट के रूप में दी जाती है।
Kheti Gurujihttps://khetikisani.org
खेती किसानी - Kheti किसानी - #1 Agriculture Website in Hindi

4 COMMENTS

  1. […] कुक्कुट पालन के माध्यम से हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति मे सुधार एवं कडकनाथ नस्ल के संरक्षण एंव संवर्धन हेतु। […]

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

सरसों की खेती का मॉडर्न तरीका

लेखक - कमल कृपाल सरसों की खेती ( sarso ki kheti ) का तिलहनी फसलों में बड़ा स्थान है । तेल उत्पादन का एक बड़ा...

भिंडी की जैविक खेती कैसे करें

लेखक - कमल कृपाल भिंडी की खेती (bhindi ki kheti ) पूरे देश मे की जाती है। भिंडी की मांग पूरे साल रहती है ।...

101 सब्जियों के हिंदी और अंग्रेजी में नाम 101 Vegetables Name

लेखक - कमल कृपाल 101 सब्जियों के हिंदी और अंग्रेजी में नाम 101 Vegetables Name in Hindi and english शायद ही आपने सुना होगा ।...

लाल भिंडी की उन्नत खेती (Lal Bhindi Ki Kheti)

लेखक - कमल कृपाल Lal Bhindi Ki Kheti - Red Okra Lady Finger Farming - Okra Red Burgundy लाल भिंडी की खेती (Lal Bhindi Ki...

Recent Comments

%d bloggers like this: