एन्थ्रेक्नोज रोग से बचाव, आम के फलों की गंभीर बीमारी का प्रबंधन

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aam ki kheti में  फ्रूट फ्लाई एवं एन्थ्रेक्नोज नामक बीमारी से आम उत्पादक किसानों का भारी नुकसान होता है। ताऊ ते एवं यास नामक साइक्लोन एवं बिहार में समय से 5 दिन पहले मानसून आने की वजह से उपरोक्त दोनों समस्याये गंभीर रूप ले ली। जिस समय यह दोनो समस्याये दिखाई दी उस समय बहुत कुछ भी किया जा सकता था क्योंकि उस समय आम की तुड़ाई भी हो रही थी।तुड़ाई के 15दिन पहले यह सलाह दी जाती है की किसी भी कीटनाशक का प्रयोग नही करना चाहिए खासकर कीटनाशक रसायनों का। इस साल मौसम में अत्यधिक नमी होने की वजह से आम की फसल को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा एवं आम उत्पादक किसानो को भारी नुकसान उठाना पड़ा । आम उत्पादक किसानों को मेरी सलाह है कि इस साल के अनुभव के आधार पर अगले साल प्रबंधन का उपाय करें। इस साल एन्थ्रेक्नोज रोग (एक कवकजनित बीमारी) आम की सबसे प्रमुख बीमारी के तौर पर उभरी है । जिसका प्रबंधन करना आम उत्पादकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। खेत में, एन्थ्रेक्नोज फल के सीधे नुकसान का कारण बन सकता है और, अगर कटे हुए फलों में अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो इससे पैदा होने वाले दोष आम को बाजार में लाना मुश्किल बना सकते हैं।

एन्थ्रेक्नोज रोग : आम के फलों की गंभीर बीमारी का प्रबंधन – Anthracnose disease: serious disease of mango fruit

एन्थ्रेक्नोज रोग : आम के फलों की गंभीर बीमारी का प्रबंधन - Anthracnose disease: serious disease of mango fruit
एन्थ्रेक्नोज रोग : आम के फलों की गंभीर बीमारी का प्रबंधन – Anthracnose disease: serious disease of mango fruit

इस रोग का रोगकार्क कोलेटोट्रिचम ग्लियोस्पोरियोइड्स नामक एक कवक है। एन्थ्रेक्नोज के लक्षण पत्तियों, टहनियों, डंठल, फूलों के गुच्छों और फलों पर देखने को मिलते हैं। पत्तियों पर, घाव छोटे, कोणीय, भूरे से काले धब्बों के रूप में शुरू होते हैं जो व्यापक मृत क्षेत्रों का निर्माण कर सकते हैं।एन्थ्रेक्नोज से प्रभावित पके फल तोड़ने से पहले या बाद में धँसा, उभरे हुए, गहरे भूरे से काले रंग के धब्बे बन जाते हैं और समय से पहले पेड़ों से गिर सकते हैं एवं जिसका बाजार भाव बहुत कम या कभी कभी कुछ भी नही मिलता है।इस रोग का लक्षण अधिकांश हरे फलों पर नही दिखाई देते हैं और पकने तक काफी हद तक अदृश्य रहते हैं। इस प्रकार जो फल कटाई के समय स्वस्थ दिखाई देते हैं ।

इसे भी पढ़ें – आम की खेती वैज्ञानिक विधि से कैसे करें ? हिंदी में जाने उनमें पकने पर महत्वपूर्ण एन्थ्रेक्नोज लक्षण तेजी से विकसित हो सकते हैं। इस साल आम के कच्चे फलों पर एक दूसरे प्रकार के लक्षण दिखाई दे रहे जो आम के फल पर “आंसू दाग” लक्षण बहुत दिखाई दे रहे है, जो एक “मगरमच्छ त्वचा” प्रभाव देता है और यहां तक ​​​​कि फलों को एपिडर्मिस में व्यापक, गहरी दरारें विकसित करने का कारण बनता है । तनों और फलों पर घाव नम परिस्थितियों में विशिष्ट, गुलाबी-नारंगी बीजाणुओं का उत्पादन कर सकते हैं। गीला, आर्द्र, गर्म मौसम की स्थिति खेत में एन्थ्रेक्नोज संक्रमण को बढ़ाने में सहायक होती है। रोगज़नक़ के बीजाणु (कोनिडिया) बारिश या सिंचाई के पानी के द्वारा बहुत तेजी से फैल जाते हैं।

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एन्थ्रेक्नोज रोग का प्रबंधन कैसे करें? How to Manage Anthracnose Disease

हर साल पेड़ों की छंटाई करें और जमीन से गिरे हुए पौधों के मलबे को हटा दें। कटाई छंटाई करने से पौधों के मध्य की दूरी बढ़ जाने से ,रोग की गंभीरता में कमी आती है। अन्य प्रकार के पेड़ों के साथ इंटरक्रॉपिंग जो आम एन्थ्रेक्नोज रोग के मेजबान नहीं हैं, इस रोग को रोकने में मदद मिलता है ।निश्चित अंतराल पर संस्तुति कवकनाशी का छिड़काव करने से रोग की उग्रता में कमी आती है। पर्याप्त रोग नियंत्रण के लिए सही समय पर किया गया छिड़काव बहुत महत्वपूर्ण है। छिड़काव तब शुरू होना चाहिए जब पुष्पगुच्छ पहली बार दिखाई दें और अनुशंसित अंतराल पर तब तक जारी रखें जब तक कि फल लगभग 1से दो 2 इंच लंबे न हो जाएं।मौसम के आधार पर हर 15 दिनों में 0.2 प्रतिशत का कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या 0.1 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम (50डब्ल्यूपी) या 0.1 प्रतिशत मिथाइल थायोफेनेट (70 प्रतिशत) के साथ छिड़काव करने से पर्ण एन्थ्रेक्नोज को नियंत्रित किया जा सकेगा।

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