ber ki kheti – बेर की खेती की मॉर्डन तकनीक की जानकारी

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हमारे पूरे देश में ber ki kheti की जाती है । बेर की बागवानी का बिजनेस काफी प्रचलित है । गरीबों का फल कहे जाने वाला बेर बहुत सारे पोषक तत्वों से भरपूर होता है । बेर में Vitamin A, Vitamin C व Calcium, Iron व खनिज लवण आदि पाए जाते हैं । लोग बेर को कच्चा पक्का खाते हैं । बेर को सुखाकर अचार बनाया जाता है । जिसे लोग बड़े चाव से कहते हैं ।

ber ki kheti ki jankari in hindi – jujube farming in hindi read full article

बेर का वैज्ञानिक नाम जिजिफस जुजुबा – Ziziphus jujuba है । बेर हर तरह की भूमि और जलवायु में उगता है । मरुस्थल में उगने के कारण बेर को बारानी का बादशाह भी कहा जाता है ।

ber ki kheti हमारे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्य प्रदेश, बिहार, राज्यस्थान, पंजाब, हरियाणा गुजरात, महाराष्ट्र, तामिलनाडू और आंध्र प्रदेश में व्यवसायिक तौर पर की जाती है। सीजन में बेर का बाजार भाव 25- 30 रुपये प्रति किलो रहता है। बेर की खेती से लाखों रुपये कमाया जा सकता है। आज बेर की खेती के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ।

Suitable climate for Plum cultivation –

ber ki kheti हर जलवायु व तापमान के लिए उपयुक्त
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बेर का पौधा ठंडी व गर्म सभी तरह की जलवायु में बड़े आराम से उगाया जा सकता है । यह सूखे के लिये भी सहनशील होता है । इसलये जहाँ ओर पानी की कमी होती है । व तापमान अधिक होता है । बेर की खेती आसानी से की जा सकती है।

Soil selection for ber ki kheti –

बेर की खेती के लिए भूमि की जानकारी

बेर सभी जगह उगने वाले पौधा है । इसके लिए सभी प्रकार को भूमि उपयुक्त होती है। बेर कि खेती आप ऊसर भूमि पर भी कर सकते हैं । ऊसर भूमि का मतलब पूरी तरह से ऊसर भूमि से नही है। यह डिस्क्लेमर इसलिए दिया जा रहा है ताकि आप गलत जानकारी का आरोप न लगाएं ।

Advanced Varieties –

अच्छी उपज के लिए उन्नत क़िस्मों का चयन करें

बेर की उन्नत क़िस्मों की विशेषताएँ

7जोगियाइस किस्म के फल अन्य किस्मों की अपेक्षा अधिक रसीले होते हैं । जिस कारण लमने समय तक स्टोरेज नही किये जा सकते हैं । बाकी फलों का गूदा मुलायम व फल खाने में स्वादिष्ट होते हैं ।

क्रम संख्या किस्म का नाम विवरण
1 वालाती इस किस्म के फक बड़े होते हैं । फल सुनहरे पीले रंग के होते हैं । इसकी उपज भी अच्छी होती है । इससे 115-120 किलोग्राम प्रति पेड़ उपज ली गयी है ।
2 ZG-2 बेर की यह किस्म फफूंद जनित रोगों के प्रति सहनशील होती है। बेर की इस किस्म से मार्च के आखिर व अप्रैल के पहले व दूसरे सप्ताह तक फल पककर तैयार हो जाते हैं । फल छोटे, व आकार में हरे होते हैं । कैथली के मुकाबले इसमें उपज दुगुनी मिलती है।
3 सनौर 2 जेडजी 2 की तरह सनौर 2 भी अच्छी उपज वाली बेर की किस्म है । यह किस्म फफूंदजनित रोग के प्रति सहनशील होती है । मार्च के दूसरे व तीसरे सप्ताह में इस किस्म के फल पक जाते हैं । फल बड़े आकार के व नर्म परत वाले होते हैं । फल मीठे व रंग में रंग सुनहरी पीला होते हैं । सनौरी 2 से 150 किलोग्राम तक उपज देती है ।
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बनारसी
बेर की बनारसी किस्म प्रयागराज व कानपुर, प्रतापगढ़ आदि जिलों के काफी पसंद की जाती है। इस किस्म के फल बड़े आकार के लगभग 2 से 4 सेंटीमीटर व्यास के होते हैं । फल अंडाकार व नुकीले होते हैं । इसे पेबन्दी बेर भी कहा जाता है ।
5 कैथली बेर की यह फंफूद जनित रोगों के प्रति कम सहनशील है । इसकी फसल मार्च में की जाती है। फल मीठा व आकार में अंडाकार, रंग में हरा-पीला होता है । एक पेड़ से 70-75 किलो बेर की उपज मिल जाती है।
6 apple ber इस क़िस्म का नाम सेब के नाम पर रखा गया है ।इसका इसका आकर लगभग सेब के जैसा ही होता है ।छिलका मोटा, हल्के क्रीम रंग का गूदा, स्वाद में बहुत मीठा होता है । बेर की यह संकर क़िस्म अन्य प्रजातियों के मुक़ाबले थोड़ी देर से तैयार होती है । यह सेब बेर मई के अप्रैल के आख़िरी व मई के प्रथम सप्ताह में तैयार हो जाती है । उपज 120-130 किलोग्राम एक पेड़ से प्राप्त हो जाती है ।
8 गोला नाम के अनुरूप बेर की इस किस्म के फल गोल व हरे पीले कलर के होते हैं । दूसरे किस्मो के मुकाबले यह जल्दी तैयार हो जाती है । यह कम सिंचाई वाले स्थानों के लिए उपयुक्त किस्म है । उपज 70-80 किलोग्राम प्रति पेड़ प्राप्त हो जाती है ।

plum nursery for gardening –

बाग़वानी के लिए बेर की नर्सरी लगाना –

बेर की खेती के लिए इसके स्वस्थ नन्हे पौध की ज़रूरत होती है । इसके लिए आप किसी नर्सरी से संपर्क कर सकते हैं । ये कंपनिया अच्छी क़िस्मों के पौधे उपलब्ध कराती हैं । जिसे आप खेत में लगाकर अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं । इसके अलावा आप बेर के रोपाई हेतु पौधे स्वयं नर्सरी लगाकर पा सकते हैं ।

Scientific method of planting plum nursery –

वैज्ञानिक विधि से बेर की नर्सरी तैयार करें

बेर की नर्सरी हेतु बीजों को बोने का काम मार्च के आख़िरी सप्ताह से अप्रैल के आख़िर तक ज़रूर कर देनी चाहिए । ताकि रोपाई हेतु बेर के पौधे अगस्त तक मिल जाएँ । इसके लिए बीजों को अपने नज़दीक कृषि विभाग से अथवा निजी कम्पनियों से ले आए । बीज को 24 घंटों के लिए 17-18 फ़ीसदी नमक के घोल में भिगो दें । इसके बाद नरसि के लिए तैयार किए sheed-bed में लाइन से लाइन 15-20 सेंटीमीटर व पौध से पौध की दूरी 30 सेंटीमीटर रख कर बुवाई कर दें । 25-30 दिनों में बीज अंकुरित हो जाते हैं ।

Amplification method –

बेर के प्रवर्धन के लिए वैज्ञानिक विधि का उपयोग करें

बेर में प्रवर्धन बडिंग विधि से करें । बडिंग अथवा कलिकायन के लिए वलय (रिंग) तथा शील्ड विधि प्रवर्धन सर्वोत्तम है । इसी विधि का इस्तेमाल करें ।

Preparation of field

खेत की तैयारी-

जिस खेत में बेर की बागवानी लगानी हो उसमें मई – जून में 1 x 1 x 1 मीटर के गड्ढे खोद लें । बेर की कौन से क़िस्म लगानी है इस हिसाब से गढ्ढों की दूरी रखें । को कुछ दिनो के लिए धूप खाने के लिए खुले छोड़ दें| रोपाई के 20 से 25 दिन पहले गढ्ढों में 25-30 किलोग्राम गोबर की खाद कम्पोस्ट भर कर सिंचाई कर दे ।

Plum planatation time

बेर की रोपाई का समय –

फरवरी से मार्च और अगस्त से सितंबर

Method of transplanting

रोपाई की विधि –

ber ki kheti या बागवानी के लिए रोपाई का कार्य बड़ा महत्वपूर्ण होता है । पौध रोपण के तैयार किए गढ्ढों को एक फुट लम्बा एक फुट चौड़ा व एक फुट गहराई में खोद दें । इसके बाद गढ्ढे के बिलकुल बीज में पौधा लगा दें । पौधे की अच्छी वृद्धि व वानस्पतिक विकास के लिए पौधे से पौधे की 7 से 9 मीटर तक रख सकते हैं ।

Manures and Fertilizers

खाद और उर्वरक-

सामान्य रूप से बेर की बागवानी से अधिक पैदावर लेने के किए जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए । इसके अलावा आवश्यक होने पर कुछ रासायनिक उर्वरकों का ज़रूरत के हिसाब से देना चाहिए –

एक साल के पौधे के लिए खाद व उर्वरक –
– गोबर की खाद- 10 kg
– नाइट्रोजन – 60 से 70 ग्राम
– फ़ॉस्फ़रस – 30 से 40

दो साल के पौधे के लिए खाद व उर्वरक –

– गोबर की खाद – 15 से 20 किलोग्राम
– नाइट्रोजन – 120 ग्राम
– फ़ॉस्फ़रस – 70 ग्राम और
– पोटाश- 200 ग्राम

pruning –

कटाई छटाई कर बेर की बागवानी से उत्पादन लें –

बेर की बागवानी में बारिश के मौसम में अनावश्यक डालियों को काट-छाँट देना चाहिए । पौधें में बहुत सारी डालियाँ जो रोग आदि लग जाने पर सूख जाती हैं । उन्हें भी काट दें । नई डालियाँ निकलेंगी जिनसे उपज बढ़ेगी ।

Plant Protection Disease control –

बेर की बागवानी पर रोग व कीट से सुरक्षा

बेर के पौधे को सबसे अधिक चुर्णित आसिता रोग नुक़सान पहुँचाता है । इस इस रोग के प्रकोप से पौधे की पत्तियाँ गिर जाती हैं । फलन बंद हो जाती है । अगर फलन होती भी है तो उनका तो उनका आकर छोटा हो जाता है ।
इसकी रोकथाम के लिए कैराथेन 5 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करे । यह कार्य जुलाई, सितम्बर, नवम्बर या दिसम्बर माह में करें । अगर प्रकोप बहुत अधिक हो तो और इसे फिर रिपीट करें ।
बेर पर दीमक का भी प्रकोप हो जाता है । जो जड़ों के पास बाँबी बनाकर रहते हैं । जड़ों की नमी को चूसते हैं । जिससे पौधे में पानी की कमी हो जाती है । और वह सूख जाता है । दीमक की रोकथाम के लिए 50 मिलीलीटर क्लोरोफायरिफोस 50 लीटर पानी में घोल कर प्रति पौधा दे|

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