Cluster fig – गूलर के चमत्कारिक गुण

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काफ़ी वक्त के बाद किसी अपने को देखकर मुँह से शिकायतवश निकल ही जाता है …..आप तो गूलर के फूल हो गये हैं..यानी Cluster fig यही तो है इसका अंग्रेज़ी नाम । जब बात चली है तो थोड़ी चर्चा आज गूलर की भी हो जाए ।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में रहने वाले कमल कृपाल Google India के डेलीगेट हैं । वह खेती किसानी के गेस्ट आर्टिकल राइटर भी हैं । गूलर से जुड़ी याद में वह बताते हैं कि गूलर का बड़ा सा पेड़ हमारे गाँव के स्कूल में था । बचपन में हम लोग स्कूल के मैदान में क्रिकेट खेलने जाते थे । फ़ील्डिंग के करते समय गूलर के पेड़ के पास खड़े होते । और मीठी गूलर का मज़ा लेते । वो बात अलग है कि गूलर के चक्कर में फ़ील्डिंग का कचरा हो जाता था ।

गूलर का पेड़ (Cluster fig) पूरे भारत में पाया जाता है । गूलर को संस्कृत में उडुम्बर, बांग्ला में डुमुर, मराठी में उदुम्बर, गुजराती में उम्बरा, अरबी में जमीझ, फारसी में अंजीरे-आदम ने कहा गया है ।

Cluster fig in botany –

वनस्पति जगत में गूलर का अपना अलग स्थान है

पढ़ी लिखी भाषा में बात करे तो गूलर फिकस (Ficus) परिवार का एक विशाल वृक्ष है। अंग्रेजी भाषा में (Cluster fig) भी कहते हैं। इसका पादप वैज्ञानिक नाम “फिकस रासेमोसा” (Ficus Rasemosa) है। गूलर फिग यानी अंजीर प्रजाति का पेड़ है । बहुत लोग गूलर और अंजीर दोनो को एक ही मानते हैं । लेकिन यह तुलना बिल्कुल वैसे ही है देशी केला और भुसावली केला में । पीपल और बरगद की तरह गूलर को एक दैवीय वृक्ष माना जाता है। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में वहाँ की लोकल भाषा में इसे डूमर कहा जाता है। यहाँ के विभिन्न समुदायों में गूलर के पेड़ को गवाह मानकर शादी करने की परंपरा है।पहले के जमाने में गूलर के पेड़ के नीचे ही शादियाँ होती थी । शोध कर्ताओं को ऐसे प्रमाण भी मिलते हैं।
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गूलर का पेड़ प्राय: सभी स्थानों पर पाया जाता है । बागों में अधिकतर पेड़ लगाए नही जाते ये ऐसे ही उग आते हैं । इसका पेड़ 20 से 40 फुट ऊँचा होता है। तना मोटा, लम्बा, अकसर टेढ़ापन लिए होता हैं। छाल लाल व मटमैली होती है। गूलर में पत्तियाँ 3 से 5 इंच लम्बे डेढ़ से तीन इंच चौड़ी चिकनी व और चमकीली होती है । गूलर में फल गर्मी में लगते हैं। गूलर में फल पेड़ की टहनियों से लगे हुए गुच्छों में होते हैं । फलों का आकार 1 से 2 इंच व्यास के गोलाकार, मांसल, अंजीर के सामान होते हैं । कच्चे फल हरे रंग के और पके फल लाल रंग के होते है। फल थोड़ा दबाते ही फुट जाता है।और इसमे सूक्ष्म कीटाणु भी पाए जाते हैं। कच्चे गूलर की सब्ज़ी बनती है । गुलर का पका फल खाने में मीठा होता हैं । जिससे पके फल को लोग बड़े चाव से खाते हैं ।

Nutrition Value in Cluster fig –

पोषक तत्वों का ख़ज़ाना है

गूलर का फल बहुत सारे पोषक तत्वों का ख़ज़ाना माना जाता है । वैज्ञानिको के अनुसार गूलर के फल में कार्बोहाइडेृड 49 प्रतिशत, अलब्युमिनायड 7.4 प्रतिशत, वसा 5.6 प्रतिशत, रंजक द्रव्य 8.5 प्रतिशत, भस्म 6.5 प्रतिशत, आद्रता 13.6 प्रतिशत तथा अल्प मात्रा में फास्फोरस व सिलिका होता है। इसकी छाल में 14 प्रतिशत टैनिन और दूध में 4 से 7.4 प्रतिशत तक रबड़ होता हैं।

Interesting facts about Cluster fig fruit –

गूलर के फल के बारे में में रोचक तथ्य

आप तो गूलर के फूल हो गये हैं….. यह कहावत शायद गूलर में फूल नही होने की तरफ़ संकेत दे करती है । लेकिन गावों में गूलर के फूल को लेकर लोगों की अपनी रोचक कहानियाँ और रहस्यमयी मान्यताएं हैं। कुछ लोग मानते हैं कि गूलर के फूल भगवान कुबेर की सम्पदा है । इसलिए इसके फूल धरती पर नही गिरते । गूलर के फूल रात में जब खिलते हैं । बड़ी तेज रोशनी चारों तरफ़ फैल जाती है । फूल खिलते ही स्वर्गलोक में चले जाते हैं। जो भी गूलर के फूल देख लेता है । वह बहुत अमीर हो जाता है । वो बात अलग है कि अभी तक किसी अमीर आदमी के द्वारा गूलर के फूल देखने की बात नही सुनी गयी । और बहुतेरे गूलर का फूल देखने का दावा भी करते हैं । लेकिन दुर्भाग्य से वो अभी तक अमीर नही हो पाए ।
हाँ विज्ञान से जुड़े जानकारों ने गूलर का फूल क्यों नही दिखता हैं ? रहस्योद्घाटन कर दिया है – गूलर के फल टहनियों पर गांठ की तरह लगते हैं इसलिए इसमें फूल नही दिखते ।

Cluster fig health Benefits –

गूलर के स्वास्थ्य वर्धक चमत्कारिक फ़ायदे

Cluster fig का आयुर्वेद में बड़ा महत्व है । गूलर में एंटी-डायबिटिक, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-अस्थमैटिक, एंटी-अल्सर, एंटी-डायरियल और एंटी-पायरेरिक गुण होते हैं। इसलिए आयुर्वेद दवाओं में गूलर का इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर होता है । आयुर्वेद के अनुसार गूलर मधुर, कषाय, गुरु, शीतल, पित्त, कफ, रक्त विकार नाशक, विपाक में कटु होता है । यह शरीर के वर्ण मे निखार लाता है । गूलर यौन रोगों में बड़ा लाभकारी है इससे शुक्र स्तम्भक, शुलहर, गर्भ रक्षक, रक्तप्रदर रोग ठीक होते है । इसके अलावा गूलर मधुमेह, रंग रोग, नेत्र रोग नाशक, बलवर्धक अस्थि जोड़ने वाला, अतिसार, सुखा रोग, प्रमेह, मूत्र रोग को ठीक करता है ।

Cluster fig – गूलर के चमत्कारिक गुण जाने

गूलर – Cluster fig के फल, पत्तियाँ , जड़, छाल व दूध सभी के अपने लाभ है । गूलर में फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को मज़बूत करते हैं । जिससे शरीर में रोगों से लडऩे की शक्ति बढ़ती है । गूलर की छाल से सूजन दूर होती है । गूलर की पत्तियों से बात व ज़हर दूर होता है । गूलर के फलों के सेवन से क़ब्ज़ रोग का इलाज होता है । इसके अलावा इसका फल शरीर पर पौष्टिक आहार की तरह प्रभाव डालता है। गूलर के एक-दो फल नियमित रूप से दो सफ्ताह तक खाया जाए । तो पुरे वर्ष नेत्र संबंधी रोग नहीं होते हैं । गूलर वृक्ष के सभी भागों में दूध भरा होता है । यह दूध औषधि के रूप में काफी गुणकारी होता है। पेड़ पर किसी धारदार चीज़ से कट करने पर, कटे स्थान पर सफ़ेद रंग का दूध निकलने लगता है। जो हवा के संपर्क में आने पर थोड़ी देर पीला हो जाता है ।
यूनानी चिकित्सा पद्धति में गूलर की अपनी वैल्यू है । इसके अनुसार गूलर आँखों के रोग, सीने के दर्द, सूखी खांसी, गुर्दे और तिल्ली के दर्द, सुजन, बवासीर मे खून जाना, खून की खराबी, अतिसार, कमर दर्द एवं मांसपेशीय दर्द, मुंह के स्वास्थ्य व घाव भरने व फोड़े – फ़ुँसियो आदि ठीक होते हैं ।

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