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Wednesday, January 20, 2021
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फसल बुवाई की विधियाँ व बुवाई के आधुनिक यंत्र

फसल बुवाई की विधियाँ व बुवाई के आधुनिक यंत्र (crops sowing methods and modern implements )

फसल बुवाई की विधियाँ व बुवाई के आधुनिक यंत्र – किसान भाइयों कृषि में अधिकतम लाभ हेतु फ़सलों की बुवाई का कार्य सबसे महत्वपूर्ण व सावधानी भरा होता है । बीजों की बुवाई अगर ठीक तरीक़े से नही हुई तो इसका सीधा असर फ़सलोत्पादन पर पड़ता है और किसान भाइयों बड़े पैमाने पर हानि का सामना कर पड़ता है । इसलिए बीज शैय्या की तैयारी के लिए कुछ विशेष बिंदुओ पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जैसे –

  • बीज की मात्रा (seed rate )
  • बीज की उचित गहराई (depth of seed)
  • बीज का अंतरण या उचित दूरी (spacing )

किसान भाइयों कृषि में उत्पादन बीज अंकुरण के बजाय इस बात पर भी निर्भर करता है कि बीज की मात्रा कितनी है ? बीज बोए गये बीजों की गहराई कितनी है ? बीज को कितनी दूरी पर बोया गया है ? बीज की मात्रा कम या अधिक होने से पौधों की अनियमित अल्पता/बढ़वार से उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है । वहीं बीज अधिक उथला अथवा गहराई पर बोने से बीजों के बीज अंकुरण प्रभावित होता है । बीज बुवाई में उचित दूरी अथवा अंतरण का ध्यान रखना चाहिए । निर्धारित दूरी पर बुवाई से अति सघनता के कारण पौध की बढ़वार नही रूकती । सभी पौधों में पोषक तत्वों का समान वितरण होता है ।

फ़सल बुवाई की विधियाँ –

१ – छिटकवाँ विधि (broadcasting method )

२ – डिबलर द्वारा बुवाई (dibbling sowing methods of seeds )

३ – पक्तियों में बुवाई करना –

  • देशी हल के पीछे बुवाई करने करने की विधि
  • नाई के प्रयोग से बुवाई करने की विधि
  • कल्टीवेटर द्वारा बुवाई की विधि
  • बैलों से चलने वाली सीड ड्रिल से बुवाई करना
  • ट्रैक्टर से चलने वाली सीड ड्रिल से बुवाई करना

४ – प्लांटिंग –

  • रो क्रोप रोपण
  • चैक रो रोपण
  • हिल ड्रॉप रोपण
१ – छिटकवाँ विधि (broadcasting method ) –

१ – छिटकवाँ विधि बुवाई की सबसे प्राचीन व परंपरागत विधि है खेत की तैयारी के पश्चात उचित नमी को को संरक्षित करने के बाद किसान भाई शाम के समय में छिटकवाँ विधि (broadcasting method ) से खेत की बुवाई करें । बुवाई के बाद हल अथवा कल्टीवेटर से बीज को मिट्टी से से ढक देते हैं । इस बुवाई की विधि में फ़ायदा यह है इसमें किसी मशीन की ज़रूरत  नही होती,साथ ही प्रति इकाई के हिसाब से समय भी कम लगता है और काम अधिक होता है । घास व पौध घरों में बीज इसी विधि से अधिकतर बोए जाते हैं । छिटकवाँ विधि से बुवाई के कुछ नुक़सान भी हैं जैसे – इसके बीज की मात्रा अधिक लगती है । साथ ही बीज निश्चित गहराई पर होते । अंतरण निश्चित ना होने से निराई गुड़ाई के लिए आप किसी मशीन उपयोग नही कर सकते हैं

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