धान की नर्सरी कैसे तैयार करें ( dhan ki nursery for paddy crop)

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भारत एक कृषि प्रधान देश है । भारत दुनिया का सब से ज्यादा क्षेत्रफल में धान उगाने वाला देश है । साथियों देश में इस समय जून माह मौसम चल रहा है। dhan ki kheti के लिए यह मौसम बेहद ख़ास होता है। देश के लाखों करोड़ों किसानों की उम्मीदें apni kheti से जुड़ी होती हैं। इसीलिए धान की नर्सरी (dhan ki nursery for paddy crop) तैयार करने की अहमियत काफी बढ़ जाती है । ऐसे में आवश्यक है कि धान की नर्सरी आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीक से की जाए। kheti kisani में पेश हैं धान की नर्सरी से जुड़ी खास बातें-

dhan ki nursery for paddy crop –

dhan ki nursery for paddy crop
dhan ki nursery for paddy crop

भूमि व bhumi jankari –

धान की नर्सरी (paddy plant) के लिए bhumi jankari होना बेहद आवश्यक है। दोमट व जीवांश युक्त भूमि पर नर्सरी डालनी चाहिए। धान की नर्सरी (paddy plant) बेड पर पानी का जल भराव ना हो यह भी ध्यान में रखना चाहिए इसके लिए अच्छी जल निकास वाली भूमि का चुनाव करना चाहिए।

 

धान की नर्सरी हेतु भूमि –

एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती (dhan ki kheti) के लिए 800-1000 वर्ग मीo  स्थान धान की नर्सरी (paddy plant) के लिए पर्याप्त होता है।

भूमि की तैयारी –

मई माह में जिस खेत में धान की नर्सरी (dhan ki nursery for paddy crop) डालनी हो उस खेत पर गोबर की खाद बिछा दें । खेत की 2 से 3 बार जुताई कर के मिट्टी को भुरभुरी करें और अंतिम जुताई से पहले 10 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद मिलाएं ।

खेत को समतल कर के करीब 1 से डेढ़ मीटर चौड़ी, 10 से 15 सेंटीमीटर ऊंची व जरूरत के मुताबिक लंबी क्यारियां बनाएं । 1 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 1000 वर्गमीटर की नर्सरी पर्याप्त होती है ।

हर जुताई के बाद पाटा लगा दें। ताकि ढेले टूट जाएँ और मिट्टी भुरभुरी व समतल हो जाए। जुताई के पहले नाइट्रोजन की आधी मात्रा व फ़ोस्फोरस तथा पोटाश की पूरी मात्रा भूमि के अवश्य डाल दें।

Dhan ki nursery हेतु बीज शैय्या (seed bed) तैयार करना –

नर्सरी के लिए 1.0 से 1.5 मीटर चौड़ी व 4 से 5 मीटर लंबी क्यारियां बनाना सही रहता है. क्यारियों के चारों तरफ पानी निकलने के लिए नालियां जरूर बनाएं ।

नर्सरी डालने का समय –

Paddy crop नर्सरी हेतु मध्यम व देर से पकने वाली किस्मों की बोआई मई के अंतिम सप्ताह से जून के दूसरे सप्ताह तक करें ।

बीज की मात्रा –

धान की नर्सरी (dhan ki nursery for paddy crop) हेतु महीन धान 30-35 किलोग्राम व मोटे धान की 40 किलोग्राम बीज की मात्रा पर्याप्त होता है। तैयार नर्सरी से कम से कम 15 हेक्टेयर क्षेत्रफल की रोपाई की जा सकती है।

बुवाई के पहले खोखले व थोथे बीजों को निकालने के लिए, बीजों को 2 फीसदी नमक के घोल में डाल कर अच्छी तरह से हिलाएं जिससे खोखले व थोथे बीज ऊपर तैरने लगेंगे । बीजों को छानकर अलग कर दें।

दोस्तों नर्सरी में अधिक बीज डालने से पौधे कमजोर रहते हैं । और उनके सड़ने का भी डर रहता है । अतः अत्यधिक बीज सघनता (seed density) न होने पाए ऐसा ध्यान रखना चाहिए।

बीज उपचार –

बीज जनित रोगों से बचाव के बीजों का उपचार करना बेहद ज़रूरी होता है। बीज उपचार के लिए किसी भी फफूँदीनाशक जैसे केप्टान, थाइरम, मेंकोजेब, कार्बंडाजिम व टाइनोक्लोजोल में से किसी एक दवा को 20 से 30 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित कर लें।

पौधों को शाकाणु अंगमारी रोग से बचाव के लिए 1.5 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन को 45 लीटर पानी के घोल में बीजों को 12 घंटे भिगो दें इसके बाद सुखा कर बोआई करें ।

 

बीज की अंकुरण क्षमता को बढ़ाने और पौधों की बढ़वार तेज करने के लिए 400 मिलीलीटर सोडियम हाइपोक्लोराइड व 40 लीटर पानी के घोल में 30 से 35 किलोग्राम बीजों को भिगो कर व सुखा कर बुवाई करें।

 

धान की नर्सरी (dhan ki nursery for paddy crop) डालना –

बीज को 24 घण्टे पानी में भिगोकर 36-48 घण्टे तक ढेर बनाकर रखना चाहिए जिससे बीज में अंकुरण प्रारम्भ हो जाय। इस अंकुरित बीज को खेत में लेव लगाकर दो सेमी० खड़े पानी में छिड़कवां बोया जाना चाहिए।

धान की नर्सरी (dhan ki nursery for paddy crop) में 100 किग्रा० नत्रजन तथा 50 किग्रा० फास्फोरस प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करें। ट्राइकोडर्मा का एक छिड़काव नर्सरी लगने के 10 दिन के अन्दर कर देना चाहिए।

बुवाई के 10-14 दिन बाद एक सुरक्षात्मक छिड़काव रोगों तथा कीटों के बचाव हेतु करें खैरा रोग के लिए एक सुरक्षात्मक छिड़काव 5 किग्रा० जिंक सल्फेट का 20 किलो यूरिया या 2.5 किग्रा० बुझे हुए चूने के साथ 1000 लीटर पानी के साथ प्रति हेक्टर कीदर से पहला छिड़काव बुवाई के 10 दिन बाद एवं दूसरा 20 दिन बाद करना चाहिए।

सफेदा रोग के नियंत्रण हेतु 4 किलो फेरस सल्फेट का 20 किलो यूरिया के घोल के साथ मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। झोंका रोग की रोकथाम के लिए 500  ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू०पी० का प्रति हे० छिड़काव करें तथा भूरे धब्बे के रोग से बचने के लिए 2 किलोग्राम मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें नर्सरी में लगने वाले कीटों से बचाव हेतु 1.25 लीटर क्लोरोपाइरोफास 20 ई०सी० प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें।

नर्सरी में पानी का तापक्रम बढ़ने पर उसे निकाल कर पुनः पानी देना सुनिश्चित करें। नर्सरी में खरपतवार दिखाई दें तो उन्हें निकाल कर नष्ट कर दें. इस के बाद नाइट्रोजन का इस्तेमाल करें ।

बुवाई के 15 से 20 दिन में नर्सरी रोपाई के लिए तैयार हो जाती है। जिसे खुरपी की सहायता से खुदाई कर खेत में रोप दें ।रोपाई के समय पौध निकाल कर पौधों की जड़ों को पानी में डुबो कर रखें । पौध को क्यारियों से निकालने के दिन ही रोपाई करना सही होता है ।

आशा है धान की खेती (paddy farming) हेतु धान की नर्सरी (dhan ki nursery for paddy crop) तैयार करने की विधि अवश्य उपयोगी सिद्ध होगी।

धान की खेती कैसे करें (dhan ki kheti ) जानने के लिए क्लिक करें

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