21 C
Lucknow
Thursday, November 26, 2020
Home HORTICULTURE FLOWERS गुलाब की खेती कैसे करें ? Gulab ki kheti in hindi

गुलाब की खेती कैसे करें ? Gulab ki kheti in hindi

gulab ka phool ki kheti karne ki vidhi, gulab ke phool ki kheti in rajasthan, maharani gulab ki kheti, phoolon ki kheti, gulab ki jankari, gulab ke podhe lagane ka tarika, gulab ka phool, phoolon ki kheti ki jankari,गुलाब के फूल की खेती कैसे करें

ईश्वर की आराधना से लेकर सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में गुलाब का उपयोग किया जाता है । गुलाब के जल के अनेकों फ़ायदे हैं । साथ ही फ़रवरी माह के आते ही बाज़ार में गुलाब के फूलों की माँग बढ़ जाती है । वेलेंटाइन डे पर बाज़ार में गुलाब के फूल बहुत ही मंह्गे दाम में बिकते हैं ।

Gulab ki kheti kaise kare in hindi

 गुलाब का औषधीय महत्व –

वहीं हम औषधीय गुणों की बात करें तो गुलाब बहुत सारे रोगों के इलाज में काम आता है । जड़े पेट के अल्सर, रिकेट्स और दस्त में उपयोगी होते है।पत्तियाँ घाव और बवासीर के इलाज में उपोयगी होती है। फूलों का उपयोग अस्थमा, उच्च रक्तचाप, दस्त, खासी, बुखार, अपच, अनिद्रा, घबराहट और तनाव के उपचार में किया जाता है।गुलाब का उपयोग क्रीम, लोशन और अन्य कास्मेटिक उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है।घर मे इसका उपयोग मक्खन, सायरप, जाम और शहद में किया जाता है ।गुलाब जल का उपयोग मिठाई, पेस्ट्री और केक बनाने में किया जाता है।गुलाब को सजावटी पौधे के रूप में जाना जाता है।

इसे भी पढ़ें – फ़्रेंच चमेली की खेती कैसे करें ?

रोजेसी कुल व रोसा सेन्टिफोलिया वैज्ञानिक नाम वाले इस गुलाब कई प्रजातियाँ हमारे देश में पायी जाती है जैसे – आर. सेन्टीफोलिया

उत्पति और वितरण  के बारे में जाने :

गुलाब मूल रूप से मध्य पूर्व का पौधा और कम से कम 3000 साल से इसकी gulab ki kheti की जा रही हैं। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाया जाता है। यह भारत, फ्रांस, मोरक्को, तुर्की और बुल्गारिया में पाया जाता है। भारत में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर में पाया जाता है। मध्यप्रदेश में भी इसकी खेती की जाती है।

गुलाब के फूल के बिज़नेस की बातें –

सुगंधित गुलाब, सुगंधित तेल देने वाली महत्वपूर्ण फसल है। ताजे चुने हुये फूलों का आसवन करके तेल निकाला जाता है। इसका उपयोग उद्योग में किया जाता है। सुगंधित गुलाब का कुल उत्पादन 15-20 टन है। प्रत्येक फूल में कई पंखुडिया होने के कारण इसे “कैवेज रोज” भी कहा जाता है। सर्वप्रथम इसकी Gulab ki kheti मध्य युग में की गई थी और यह अपनी तीक्ष्ण खुशबू के लिए प्रसिध्द है।

जलवायु :

गुलाब का पौधा एक उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पौधा है। इसके समुचित विकास के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है।

भूमि का चयन व  तैयारी –

वहीं हम गुलाब के फूल की खेती के लिए मिट्टी के चयन की बात करें तो इसकी Gulab ki kheti हल्की (रेतीली), मध्यम (चिकनी बुलई) और भारी चिकनी मिट्टी में आसानी से की जाती है। इसके साथ ही मिट्टी में अच्छी तरह जल निकसी होना चाहिए। मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 होना चाहिए। बुवाई के पहले 3 – 4 बार जोतकर भूमि को तैयार कर लेना चाहिए।मिट्टी में FYM मिलाना चाहिए।पौधे एक कतार में लगाना चाहिए। दो कतारों के बीच 1X1 मी. की दूरी रखना चाहिए।

गुलाब की क़लम लगाने के लिए गड्ढे तैयार करना –
खेत में लगभग 50 से.मी. व्यास और 50 से.मी. गहरें गड्ढें खोदे जाते हैं। गड्ढ़े पर्याप्त रुप से बड़े होना चाहिए ताकि जड़ों को फैलाकर लगाया जा सके।बुबाई के बाद गड्ढों को मिट्टी और FYM से भर देना चाहिए। रोपण के बाद सिंचाई की जानी चाहिए। दो पौधों के बीच 1 -1.5 मी. की दूरी रखना चाहिए।

नर्सरी बिछौना-तैयारी (Bed-Preparation) :

अच्छे गुणवत्ता वाली Gulab ki kheti के लिए अच्छी तरह से व्यवस्थित नर्सरी तैयार की करना चाहिए। 20-25 कि.ग्रा. मेलीथीआन नर्सरी की तैयारी के समय मिट्टी के साथ मिलाना चाहिए। पौधों को नर्सरी में 10 X 45 से.मी. की दूरी पर लगाना चाहिए। रोपण के समय सावधानी रखना चाहिए कि कलम का निचला हिस्सा नीचे रहे और ऊपरी हिस्सा ऊपर रहे।

खाद व उर्वरक –

गुलाब के फूलों की सफल उत्पादन के लिए जीवांश खाद का प्रयोग करना चाहिए। इससे फूल बड़े व आकर्षक होते है। इसके लिए 8-10 टन पकी हुई FYM की आवश्यकता होती है। साथ ही 100 : 80 : 60 / हेक्टेयर NPK पौधे के अच्छे विकास के लिए देना चाहिए। रोपाई के समय N यानी nitrogen की आधी खुराक और P और K की पूरी खुराक मिट्टी में मिलाकर देना चाहिए और शेष N की खुराक रोपाई के बाद देना चाहिए। यूरिया का घोल भी फसल के लिए अच्छा होता है।

सिंचाई व जल प्रबंधन :

सिंचाई रोपण के 20-30 दिनों के बाद करना चाहिए । बरसात के मौसम से पहले नियमित रूप से सिंचाई करना चाहिए।

घसपात नियंत्रण प्रबंधन :

रोपण के पहले चरण में निंदाई की आवश्यकता होती है। नवंबर से जनवरी तक 2-3 बार निंदाई करना चाहिए। पौधे के अच्छे विकास के लिए एक वर्ष में 3-4 बार निंदाई करना चाहिए।

रोग व कीट नियंत्रण –

रोग : आल्टरनेरिया आल्टरनेटा (पर्ण अंगमारी ) यह रोग वैक्टीरिया द्दारा होता है जो पौधे के ऊतकों को नष्ट कर देती है । पत्तियों पर धब्बे पड़ने से पत्तियाँ कमजोर पड़ जाती है।

तुडाई, फसल कटाई का समय :

तुड़ाई के लिए उचित समय प्रात: काल का होता है। दोपहर के बाद का समय तुड़ाई के लिए उपयुक्त नहीं होता है। तुड़ाई के तुरंत बाद फूल आसवन के लिए भेजना चाहिए।

आसवन (Distillation) :

फूलों का आसवन जल आसवन विधि के द्दारा किया जाता हैं।आसवन के लिए जल और फूल 6 : 1 के अनुपात में होना चाहिए।एक किलो ग्राम गुलाब तेल 3000-4000 किलोग्राम फूलों से प्राप्त होता है।

भडांरण व परिवहन  (Storage and transportation) :

सुगंधित गुलाबों को सीमित हवा के संचारण के साथ शुष्क वातावरण में संग्रहित करना चाहिए। लंबे समय तक संग्रहीत करने से तेल की मात्रा में कमी हो सकती है। सामान्यत: किसान अपने उत्पाद को बैलगाड़ी या टैक्टर से बाजार तक पहुँचता हैं। दूरी अधिक होने पर उत्पाद को ट्रक या लाँरियो के द्वारा बाजार तक पहुँचाया जाता हैं। परिवहन के दौरान चढ़ाते एवं उतारते समय पैकिंग अच्छी होने से फसल खराब नहीं होती हैं।

अन्य-मूल्य परिवर्धन (Other-Value-Additions) :

गुलाब जल , गुलाब जेल, गुलाब इत्र, hope you all like gulab ki kheti content.pls like and share

 

 

Kheti Gurujihttps://khetikisani.org
खेती किसानी - Kheti किसानी - #1 Agriculture Website in Hindi

3 COMMENTS

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

सरसों की खेती का मॉडर्न तरीका

सरसों की खेती ( sarso ki kheti ) का तिलहनी फसलों में बड़ा स्थान है । तेल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा सरसों वर्गीय...

भिंडी की जैविक खेती कैसे करें

भिंडी की खेती (bhindi ki kheti ) पूरे देश मे की जाती है। भिंडी की मांग पूरे साल रहती है । और ऑफ सीजन...

101 सब्जियों के हिंदी और अंग्रेजी में नाम 101 Vegetables Name

101 सब्जियों के हिंदी और अंग्रेजी में नाम 101 Vegetables Name in Hindi and english शायद ही आपने सुना होगा । आज खेती किसानी...

लाल भिंडी की उन्नत खेती (Lal Bhindi Ki Kheti)

Lal Bhindi Ki Kheti - Red Okra Lady Finger Farming - Okra Red Burgundy लाल भिंडी की खेती (Lal Bhindi Ki Kheti) की शुरुआत...

Recent Comments

%d bloggers like this: