हल्दी की खेती की जानकारी – Haldi ki kheti

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हल्दी जिंजिवरेंसी कुल का पौधा हैं। इसकी उत्पत्ति दक्षिण पूर्व एशिया में हुई हैं। इसका उपयोग औषधीय रूप में होने के साथ-साथ समाज में सभी शुभ कार्यों में इसका उपयोग बहुत प्राचीनकाल से हो रहा है।क्योंकि इसमें रंग महक एवं औषधीय गुण पाये जाते हैं। हल्दी में जैव संरक्षण एवं जैव विनाश दोनों ही गुण विद्यमान हैं, क्योंकि यह तंतुओं की सुरक्षा एवं जीवाणु (वैक्टीरिया) को मारता है। वर्तमान समय में प्रसाधन के सर्वोत्तम उत्पाद हल्दी से ही बनाये जा रहे हैं। हल्दी में कुर्कमिन पाया जाता हैं तथा इससे एलियोरोजिन भी निकाला जाता हैं। हल्दी में स्टार्च की मात्रा सर्वाधिक होती हैं। इसके अतिरिक्त इसमें 13.1 प्रतिशत पानी, 6.3 प्रतिशत प्रोटीन, 5.1 प्रतिशत वसा, 69.4 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 2.6 प्रतिशत रेशा एवं 3.5 प्रतिशत खनिज लवण पोषक तत्व पाये जाते हैं। इसमें वोनाटाइन ऑरेंज लाल तेल 1.3 से 5.5 प्रतिशत पाया जाता हैं।

हल्दी की आधुनिक व वैज्ञानिक खेती की जानकारी व हल्दी के औषधीय फायदे | Scientific cultivation of Turmeric | Turmeric agriculture

हल्दी की खेती की जानकारी व हल्दी के औषधीय फायदे | Scientific cultivation of Turmeric
हल्दी की खेती की जानकारी व हल्दी के औषधीय फायदे | Scientific cultivation of Turmeric

Whrere to turmeric farming in india –

India is a leading producer and exporter of turmeric in the world. Andhra Pradesh, Tamil Nadu, Orissa, Karnataka, West Bengal, Gujarat, Meghalaya, Maharashtra, Assam are some of the important states cultivating turmeric, of which, Andhra Pradesh alone occupies 38.0% of area and 58.5% of production.

हल्दी की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित चार प्रजातियों का प्रयोग चिकित्सा में किया जाता है।

Curcuma longa :

हल्दी की इस प्रजाति का उपयोग मुख्य रुप से मसालों और औषधियों के रूप में किया जाता है। इसके पौधे 60-90 सेमी तक ऊँचें होते हैं। इस हल्दी का रंग अंदर से लाल या पीला होता है। यही वह हल्दी है जिसका उपयोग हम अपने घरों में सब्जी बनाने में करते हैं।

Curcuma aromatica:

इसे जंगली हल्दी कहते हैं।

Curcuma amada:

इस हल्दी के कन्द और पत्तों में कपूर और आम जैसी महक होती है। इसी वजह से इसे आमाहल्दी (Mango ginger) कहा जाता है।

Curcuma caesia:

-इसे काली हल्दी कहते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस हल्दी में चमत्कारिक गुण होते हैं। इस हल्दी का उपयोग ज्योतिष और तंत्र विद्या में ज्यादा होता है।

अन्य भाषाओं में हल्दी के नाम (Name of Haldi in Different languages)

हल्दी का वानस्पतिक नाम Curcuma longa Linn. (कुरकुमा लौंगा) Syn-Curcuma domesticaValeton । कुल का नाम Zingiberaceae (जिन्जिबेरेसी) है। अन्य भाषाओं में इसे निम्न नामों से पुकारा जाता है।

Names of Turmeric in different languages –

Name of Haldi in English : Turmeric (टर्मेरिक्)
Name of Haldi in Sanskrit : हरिद्रा, काञ्चनी, पीता, निशाख्या, वरवर्णिनी, रजनी, रंजनी, कृमिघ्नी, योषित्प्रिया, हट्टविलासिनी, हलदी, गौरी, अनेष्टा, हरती
Name of Haldi in Hindi : हलदी, हर्दी, हल्दी;
Name of Haldi in Urdu : हलदी (Haladi)
Name of Haldi in Asam : हलादी (haladhi);
Name of Haldi in Konkani : हलद (Halad);
Name of Haldi in Kannada : अरसिन (Arsina), अरिसिन (Arisin)
Name of Haldi in Gujrati : हलदा (Halada);
Name of Haldi in Tamil : मंजल (Manjal)
Name of Haldi in Telgu : पसुपु (Pasupu), पाम्पी (Pampi)
Name of Haldi in Bengali : हलुद (Halud), पितरस (Pitras);
Name of Haldi in Punjabi : हलदी (Haldi), हलदर (Haldar);
Name of Haldi in Marathi : हलद (Halade), हलदर (Haldar);
Name of Haldi in Malyalam : मन्जल (Manjal), मन्नाल (Mannal), पच्चामन्नाल ( pacchamannal)
Name of Haldi in English : कॉमन टर्मेरिक (Commonturmeric), इण्डियन सैफरन (Indian saffron),
Name of Haldi in Arabi : उरुकेस्सुफ (Urukessuf), कुरकुम (Kurkum);
Name of Haldi in Persian : जर्द चोब (Zard chob), दारजरदी (Darjardi)

हल्दी का उपयोग और औषधीय फायदे – Haldi benefits in Hindi

भोजन में सुगन्ध एवं रंग लाने में, बटर, चीज, अचार आदि भोज्य पदार्थों में इसका उपयोग करते हैं। यह भूख बढ़ाने तथा उत्तम पाचक में सहायक होता हैं।

हल्दी के फायदे और सेवन का तरीका (Haldi benefits in Hindi and uses)

हल्दी हमारे शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाती है जिस वजह से तमाम तरह की संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। हल्दी में वात कफ दोषों को कम करने वाले गुण होते हैं और यह शरीर में खून बढ़ाने में मदद करती है। डायबिटीज में हल्दी का सेवन बहुत ही उपयोगी माना जाता है।
आइये जानते हैं कि हल्दी के सेवन से किन रोगों में आराम मिलता है और इसका सेवन किस तरह करना चाहिए।

जुकाम में हल्दी के फायदे ( Haldi benefits in Hindi for cold) –

हल्दी की तासीर गर्म होने की वजह से जुकाम में इसका सेवन करना फायदेमंद रहता है। हल्दी के धुंए को रात के समय सूंघने से जुकाम जल्दी ठीक होता है। हल्दी सूंघने के कुछ देर बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए।

सिर की फुंसियों से आराम दिलाती है हल्दी (Haldi Benefits in Hindi for Seborrheic Dermatitis) | Turmeric Juice benefits

गर्मी के मौसम में सिर में फुंसियां निकलना एक आम समस्या है। फुंसियों के कारण सिर में तेज खुजली और जलन होती है। इस समस्या से आराम पाने के लिए हल्दी और दारूहरिद्रा, भूनिम्ब, त्रिफला, नीम और चन्दन को पीसकर रोजाना सिर पर मालिश करें।

हल्दी के फायदे – आंखों के दर्द से आराम दिलाती है हल्दी ( Haldi helps to reduce Eye pain in Hindi)-

आंखों में दर्द होने पर या किसी तरह का संक्रमण होने पर हल्दी (turmeric in Hindi) का प्रयोग करना फायदेमंद रहता है। 1 ग्राम हल्दी को 25 मिली पानी में उबालकर छान लें। छानने के बाद इसे आंखों में बार बार डालने से आंखों के दर्द से आराम मिलता है। कंजक्टीवाइटिस होने पर भी आप इसी घरेलू उपाय की मदद से आराम (haldi ke fayde)पा सकते हैं। हल्दी का गुण आँखों के लिए बहुत ही उपयोगी (haldi uses in hindi) होता है।

हल्दी के फायदे – कान बहने की समस्या से आराम (Benefits of Haldi in ear discharge in Hindi)

कान से गाढ़ा तरल निकलना एक समस्या है जिसे आम भाषा में लोग कान बहना कहते हैं। इससे आराम पाने के लिए हल्दी को पानी में उबालकर, छान लें और उसे कान में डालें।

पायरिया में हल्दी के फायदे (Haldi Beneficial in Pyorrhea in Hindi)-

सरसों का तेल, हल्दी मिलाकर सुबह-शाम मसूड़ों पर लगाकर अच्छी प्रकार मालिश करने तथा बाद में गर्म पानी से कुल्ले करने पर मसूड़ों के सब प्रकार के रोग दूर (haldi ke fayde) हो जाते हैं। हल्दी का गुण पायरिया के लिए फायदेमंद होता है।

हल्दी के फायदे –

गले की खराश से आराम (Haldi benefits for throat irritation in Hindi) :

Haldi Dhoodh benefits

गले की खराश होने पर अजमोदा, हल्दी, यवक्षार और चित्रक इन सबके 2-5 ग्राम चूर्ण को एक चम्मच शहद के साथ सेवन करने से गले की खराश दूर होती है।

हल्दी के फायदे – खांसी से आराम (Haldi Helps in reducing cough)

हल्दी (haldi in hindi) को भूनकर चूर्ण बना लें। 1-2 ग्राम हल्दी चूर्ण (Turmeric powder in Hindi) के शहद या घी के साथ मिलाकर खाने से खांसी में आराम मिलता है।

हल्दी के फायदे – पेट दर्द से आराम (Haldi beneficial in Stomach pain in Hindi) :

पेट दर्द होने पर भी हल्दी का सेवन करने से दर्द से जल्दी आराम मिलता है। 10 ग्राम हल्दी (haldi in hindi)को 250 ml पानी में उबाल लें। पेट दर्द होने पर इसमें गुड़ मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पियें।

बवासीर में हल्दी के फायदे (Turmeric benefits for Piles in Hindi) –

खराब जीवनशैली और खराब खानपान की वजह से अधिकांश लोग कब्ज़ के मरीज हो जाते हैं। कब्ज़ के कारण ही आगे चलकर बवासीर की समस्या होने लगती है। बवासीर से आराम पाने के लिए सेहुंड के दूध में 10 ग्राम हल्दी मिलाकर मस्सों में लगाएं। । इसके अलावा सरसों के तेल में हल्दी चूर्ण (Turmeric powder in Hindi) को मिलाकर मस्सों पर लगाने से बवासीर में आराम मिलता है।

पीलिया से आराम दिलाती है हल्दी (Turmeric benefits for Jaundice in Hindi) :

पीलिया एक ऐसी समस्या है जिसका सही इलाज ना करवाने पर आगे चलकर यह बहुत गंभीर समस्या में बदल जाती है। छोटे बच्चों में यह समस्या ज्यादा होती है। पीलिया होने पर 6 ग्राम हल्दी चूर्ण को मठ्ठे में मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने पर 4-5 दिन में ही पीलिया से आराम मिल जाता है। इसके अलावा 5-10 ग्राम हल्दी चूर्ण में 50 ग्राम दही मिलाकर खाने से भी पीलिया में फायदा (haldi ke fayde) होता है।

लौह भस्म, हरड़ और हल्दी इन तीनों को एक बराबर मात्रा में मिलाकर इसकी 375mg मात्रा में घी और शहद मिलाकर सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है।

डायबिटीज में हल्दी के फायदे (Benefits of Turmeric in Diabetets in Hindi) –

2 से 5 ग्राम हल्दी चूर्ण में आंवला रस और शहद मिलाकर सुबह और शाम को खाना, डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा हल्दी, दारुहल्दी, तगर और वायविडंग का क्वाथ बनाकर उसकी 20-40 ml की मात्रा में 5-10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह- शाम सेवन करने से डायबिटीज में फायदा (haldi ke fayde) होता है।

स्तन संबंधी रोगों से आराम

हल्दी के फायदे (Haldi beneficial in Breast diseases in Hindi) –

स्तन से जुड़ी समस्याओं में भी हल्दी का उपयोग करना फायदेमंद रहता है। हल्दी और लोध्र को पानी में घिसकर स्तनों पर लेप करने से स्तन से जुड़े रोगों में लाभ (haldi ke fayde) होता है।

प्रदर या ल्यूकोरिया में हल्दी के फायदे (Benefits of Haldi for Leukorrhea in Hindi) – Raw Turmeric Health Benefits

हल्दी चूर्ण (Turmeric powder in Hindi) और गुग्गुल चूर्ण को एक बराबर मात्रा में मिलाकर इसकी 2-5 ग्राम मात्रा का सुबह-शाम सेवन करने ल्यूकोरिया में फायदा मिलता है। इसके अलावा 1-2 ग्राम हल्दी चूर्ण को 100 ml दूध में उबालकर उसमें गुड़ मिलाकर खाने से भी ल्यूकोरिया में फायदा पहुँचता है।

कुष्ठ रोग में हल्दी के फायदे (Benefits of Turmeric in Leprosy in hindi)

हल्दी के प्रयोग से कुष्ठ रोग के प्रभाव को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए 1-2 ग्राम हल्दी चूर्ण में गोमूत्र मिलाकर पिएं। इसके अलावा हरिद्राचूर्ण में बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर गोमूत्र के साथ सेवन करने से दाद और कुष्ठ रोग में फायदा होता है।

दाद खुजली में हल्दी के फायदे (Haldi helps to reduce Itching in Hindi)

अगर आपकी त्वचा पर कहीं दाद खुजली हो गयी है तो हल्दी के इस्तेमाल से आप इन समस्याओं को जल्दी ठीक कर सकते हैं। इसके लिए खुजली (seborrheic dermatitis in hindi) वाली जगह पर हल्दी का लेप या हल्दी के साथ नीम की पत्तियों का लेप लगाएं।

चर्म रोग में हल्दी के फायदे (Turmeric benefits for skin diseases in Hindi) –

खुजली, दाद के अलावा चर्म रोग में भी हल्दी का प्रयोग करने से फायदा होता है। इसके लिए 2-5 ग्राम हल्दी चूर्ण (Turmeric powder in Hindi) को गोमूत्र में मिलाकर दिन में दो तीन बार सेवन करें। इसके अलावा हल्दी के चूर्ण में मक्खन मिलाकर चर्म रोग (seborrheic dermatitis in hindi) वाली जगह पर लगाने से भी फायदा होता है।

सूजन से आराम दिलाती है हल्दी (Haldi helps to reduce swelling in Hindi) –

शरीर के किसी हिस्से में अगर सूजन हो रही है तो हल्दी के उपयोग से आप सूजन कम कर सकते हैं। इसके लिए हल्दी, पिप्पली, पाठा, छोटी कटेरी, चित्रकमूल, सोंठ, पिप्पली, जीरा और मोथा को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। इसे कपड़े से छान कर अलग रख लें। इस चूर्ण का 2-2 ग्राम की मात्रा गुनगुने जल के साथ मिलाकर खाने से सूजन में कमी आती है।

बालों का झड़ना करे कम हल्दी के फायदे (Haldi Beneficial in Hair Loss in Hindi)

बालों का झड़ने रोकने में हल्दी बहुत उपयोगी माना गया है। बालों के झड़ने का कारण पाचन का ख़राब होना होता है, क्योंकि पाचन खराब होने से बालों की जड़ों तक उचित मात्रा में पोषण नहीं पहुँच पाता जिसकी वजह से बाल झड़ने लगते हैं। इसके अलावा कफ दोष की वृद्धि के कारण भी बालों का झड़ना देखा गया है। ऐसे में हल्दी में उष्ण और कफ का शमन करने का गुण होने के कारण यह आपके पाचन को स्वस्थ कर बालों के झड़ने से रोकती है।

मुहांसों से राहत दिलाने में हल्दी फायदेमंद (Benefits of Turmeric to Get Rid from Pimples in Hindi)

मुँहासों से छुटकारा पाने में भी हल्दी के फायदे देखे गए है। त्वचा में अधिक तेल की उत्पत्ति होने के कारण मुँहासे निकलने लगते हैं। ऐसे में हल्दी के रूक्ष गुण के कारण यह इस तेल को सोक कर मुँहासों को छुटकारा दिलाने में लाभ पहुंचाती है साथ ही त्वगदोषहर गुण होने के कारण त्वचा के रोगों को दूर रखने में भी उपयोगी होती है।

घाव को ठीक करने में हल्दी के फायदे (Haldi Beneficial to Treat Wounds in Hindi)

हल्दी में रोपण एवं शोथहर गुण होने के कारण यह हर प्रकार के घाव को भरने एवं उसकी सूजन आदि को भी ठीक करने में सहयोगी होती है।
मुँह के छालों को ठीक करने में लाभकारी हल्दी (Benefits of Haldi to Get Relief from Mouth Ulcer in Hindi)
मुँह के छालों का होना पाचन क्रिया के खराब होने के कारण होता है। हल्दी में उष्ण गुण होने के कारण यह पाचकाग्नि को ठीक कर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करती है, जिससे मुँह के छालों में आराम मिलता है साथ हि इसमें रोपण (हीलिंग) का भी गुण पाया जाता है जो की मुँह के छालों को जल्द भरने में सहायक होती है।

सूखी खांसी में फायदेमंद हल्दी (Benefits of Turmeric to Get Relief from Dry Cough in Hindi)

खांसी चाहे सूखी हो या बलगम वाली दोनों ही कफ दोष प्रकुपित होने के कारण होती है। हल्दी में कफ को संतुलित करने का गुण होता है जिसके कारण यह हर प्रकार की खांसी में लाभदायक होती है।

जोड़ों के दर्द से दिलाये राहत हल्दी (Benefit of Turmeric to Get Relief from Joint Pain Gout or arthritis in Hindi)

जोड़ो में होने वाले दर्द एवं सूजन में भी हल्दी बहुत फायदेमंद हो सकती है क्योंकि इसमें उष्ण एवं शोथहर गुण होते है। इसके सेवन से ये अपनी गर्माहट के कारण दर्द से जल्दी आराम दिलाने में मदद करती है।

पेट के कीड़े से राहत दिलाने में फायदेमंद हल्दी (Benefit of Haldi to Get Rid from Worm in Hindi)

पेट के कीड़े भी पाचन तंत्र के खराब होने के कारण होती है। हल्दी पाचक एवं कृमिघ्न गुण होने के कारण यह पेट के कीड़ों से भी राहत दिलाती है।

पेट में गैस के लिए हल्दी के फायदे ( Haldi Beneficial in Acidity in Hindi)

पेट में गैस आदि परेशानियाँ भी पाचकाग्नि के मंद पड़ जाने के कारण होती है जो पाचन तंत्र को भी बिगाड़ देती है। हल्दी में उष्ण गुण होने के कारण यह पाचकाग्नि को बढ़ा कर पाचन तंत्र को स्वस्थ करने में मदद करती है, जिससे गैस की समस्या से छुटकारा मिलता है।

खून की कमी के लिए हल्दी के फायदे (Turmeric Beneficial in Anemia in Hindi)

खून की कमी ये एनीमिया की स्थिति में भी हल्दी के फायदे देखे गए है। एक रिसर्च के अनुसार हल्दी एंटी ऑक्सीडेंट और हिपेटो प्रोटेक्टिव होने के कारण यह एनीमिया में लाभदायक होती है साथ ही आयुर्वेद के अनुसार हल्दी में पाण्डुहर गुण होने के कारण यह पाण्डु यानि एनीमिया की स्थिति में लाभदायक होती है एवं खून बढ़ाने में मदद करती है।

पेट के अल्सर के लिए हल्दी के फायदे (Benefit of Haldi to Get Relief from Peptic Ulcer in Hindi)

पेट में अल्सर जैसी समस्या भी कहीं न कहीं पाचन का खराब होना ही माना गया है। हल्दी में पाचक और शोथहर होने के साथ इसमें रोपण (हीलिंग) का भी गुण होने के कारण ये पेट के अल्सर से छुटकारा दिलाती है।

कैंसर के लिए हल्दी के फायदे (Turmeric Beneficial in Cancer in Hindi)

एक रिसर्च के अनुसार हल्दी में एंटीकैंसर गुण पाए जाने कारण यह कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं में भी लाभदायक साबित हो सकती है।
खून में शुगर की मात्रा करे कम (Turmeric Beneficial in Diabetes in Hindi)
खून में शुगर की मात्रा का बढ़ना यानी डायबिटीज का होना। इस अवस्था में भी हल्दी लाभदायक होती है क्योंकि डायबिटीज होने का एक कारण पाचन का खराब होना माना गया है, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है साथ ही इस स्थिति में कफ दोष भी बढ़ जाता है। हल्दी में पाचक गुण होने के कारण यह पाचन को स्वस्थ बनाती है और मेटाबोलिज्म ठीक करती है। साथ ही कफ शामक होने के कारण यह डायबिटीज के लक्षणों को कम करने में मदद करती है।

Summary of Haldi ke fayde by http://www.kheti kisani.org

हल्दी की सामान्य ख़ुराक (Dosages of Haldi in Hindi) –

आमतौर पर 1-2 ग्राम हल्दी का रोजाना सेवन करना सेहत के लिए उपयुक्त है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के लिए हल्दी का उपयोग करना चाहते हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार करें।

1- क्या हल्दी के सेवन से इम्यूनिटी बढ़ती है?

हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार हल्दी का सेवन इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। सर्दियों के मौसम में या फिर मौसम में बदलाव के दौरान अक्सर हम लोग जल्दी -जल्दी बीमार पड़ जाते है और हमें ठीक होने में भी समय लगता है। वास्तव में इम्यूनिटी का कमजोर होना ही इसका मुख्य कारण है। इसलिए सर्दियों के मौसम में या मौसम में बदलाव के दौरान अपने खानपान में हल्दी ज़रूर शामिल करें।

2- क्या हल्दी दूध पीना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है?

हल्दी अपने आप में कई गुणों से भरपूर है और जब आप इसका सेवन दूध में मिलाकर करते हैं तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं. हल्दी वाला दूध बनाना भी बहुत आसान है. एक गिलास दूध में एक चुटकी हल्दी डालकर अच्छे से उबाल लें और फिर गुनगुना होने पर इसका सेवन करें. इसे ही हल्दी दूध या गोल्डन मिल्क (Golden Milk) कहा जाता है. सर्दी-जुकाम से आराम पाने का यह अचूक उपाय है इसके अलावा शरीर में दर्द होने पर या ठंड लगने पर इसका सेवन करना बहुत उपयोगी होता है.

3- सर्दी-जुकाम से जल्दी आराम पाने के लिए हल्दी का इस्तेमाल कैसे करें?

जुकाम होना एक आम समस्या है और अधिकांश लोग जुकाम से राहत पाने के लिए घरेलु उपायों का ही प्रयोग करते हैं. हल्दी का सेवन जुकाम से राहत दिलाने में बहुत उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मानना है कि जुकाम से जल्दी राहत पाने के लिए रात में सोते समय हल्दी दूध का सेवन करना चाहिए .

4- क्या सर्दियों के मौसम में हल्दी का सेवन करना चाहिए?सर्दी का मौसम आते है कई प्रकार के रोग होना शुरू हो जाते है चाहे वो सर्दी-जुकाम हो या फिर जोड़ों का दर्द। ये सभी समस्यायें सर्दी के मौसम को कई लोगों के लिए दुखदायी बना देती हैं. आयुर्वेद के अनुसार हल्दी के सेवन से आप इन रोगों को कुछ हद तक घर पर ही ठीक कर सकते है। इसलिए सर्दियों के मौसम में आयुर्वेदिक चिकित्सक भी हल्दी के सेवन की सलाह देते हैं. इस बात का ध्यान रखें कि जरूरत से ज्यादा मात्रा में हल्दी का सेवन करना नुकसानदायक भी हो सकता है इसलिए सर्दी या गर्मी कोई भी मौसम हो हल्दी का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करें।
5- क्या अस्थमा के मरीजों के लिए हल्दी का सेवन फायदेमंद होता है?

फेफड़ों के रोगों में हल्दी का सेवन फायदेमंद होता है जैसे अस्थमा की समस्या। हल्दी, अस्थमा में जमे हुए कफ को दूर करने में मदद करती है जिससे अस्थमा के लक्षणों में कमी होने लगती है। इसीलिए अस्थमा के मरीजों को हल्दी के सेवन की सलाह दी जाती है. अगर आप अस्थमा के मरीज हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार हल्दी का नियमित सेवन करें।

हल्दी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु का चुनाव करना –

हल्दी एक मसाला फसल है, जिस क्षेत्र में 1200 से 1400 मि.मी. वर्षा, 100 से 120 वर्षा दिनों में प्राप्त होती
है, वहां पर इसकी अति उत्तम खेती होती है। समुद्र सतह से 1200 मीटर ऊंचाई तक के क्षेत्रों में यह पैदा की जाती है, परंतु हल्दी की खेती के लिए 450 से 900 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्र उत्तम होते हैं। हल्दी एक उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र की फसल हैं। हल्दी के लिए 30 से 35 डिग्री से.मी. अंकुरण के समय, 25 से 30 डिग्री से.मी. कल्ले निकलने 20 से 30 डिग्री से.मी. प्रकंद बनने तथा 18 से 20 डिग्री से.मी. हल्दी की मोटाई हेतु उत्तम है।

हल्दी की खेती के लिए मिट्टी का चुनाव –

हल्दी के रोपण का उचित समय अप्रैल एवं मई का होता है। हल्दी का उत्पादन सभी प्रकार की मिट्टी में किया जा सकता हैं, परंतु जल निकास उत्तम होना चाहिए। इसका पीएच 5 से 7.5 होना चाहिए। हल्दी की खेती करने के लिए दोमट, जलोढ़, लैटेराइट मिट्टी, जिसमें जीवांश की मात्रा अधिक हो, वह इसके लिए अति उत्तम है। पानी भरी मिट्टी इसके लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त होती है।

हल्दी की खेती के लिए उन्नत प्रजातियाँ –

सी.एल. 326 माइडुकुर

लीफ स्पाॅट बीमारी की अवरोधक प्रजाति है, लम्बे पंजे वाली, चिकनी, नौ माह में तैयार होती है। उत्पादन क्षमता 200-300 क्विं./हेक्टेयर तथा सूखने पर 19.3 प्रतिशत हल्दी मिलती हैं।

सी.एल. 327 ठेकुरपेन्ट

इसके पंजे लम्बे, चिकने एवं चपटे होते हैं। परिपक्वता अवधि 5 माह तथा उत्पादन क्षमता 200-250 क्विं./हेक्टर सूखने पर 21.8 प्रतिशत हल्दी प्राप्त होती हैं।

कस्तूरी

यह शीघ्र (7 माह) में तैयार होती हैं। इसके पंजे पतले एवं सुगन्धित होते हैं। उत्पादन 150-200 क्विं./हेक्टेयर 25 प्रतिशत सूखी हल्दी मिलती हैं।गांठां के रंग और आकार के अनुसार हल्दी की कई किस्में पाई जाती है। मालाबार की हल्दी औषधीय महत्व की होती है तथा यह जुकाम और कफ के उपचार के लिए उपयुक्त है। पूना एवं बंगलौर की हल्दी रंग के लिए अच्छी है। जंगली हल्दी अपनी सुगंधित गांठों के कारण भिन्न है तथा इसे ‘कुरकुमा एरोमेटिका’ (सुगंधित हल्दी) कहते हैं। हिमाचल प्रदेश में आमतौर पर स्थानीय किस्में ही प्रचलन में है। हल्दी की कुछ उत्कृष्ट किस्मों का विवरण निम्नानुसार है –

पालम पिताम्बर haldi Palam Pitamber turmeric –

यह किस्म हरे पत्तों के साथ मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। यह अधिक आय देती है और औसतन वार्षिक उपज 332 क्विंटल प्रति हैक्टेयर (25-26 क्विंटल प्रति बीघा) तक प्राप्त हो सकती है। इस किस्म में स्थानीय किस्मों से अधिक उपज देने की क्षमता है और इसकी गठ्ठियां उंगलियों की तरह लम्बी वरंग गहरा पीला होता है।

पालम लालिमा हल्दी Palam Lalima turmeric –

इसकी गठ्ठियों का रंग नारंगी होती है और स्थानीय किस्मों की अपेक्षा इसकी औसत वार्षिक उपज अधिक होती है। इस किस्म की औसतन वार्षिक उपज 250-300 क्विंटल प्रति हैक्टेयर (20-24 किवंटल प्रति बीघा) तक ली जा सकती है।

कोयम्बटूर हल्दी Coimbatore turmeric

यह बारानी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है। इसके कंद बड़े, चमकीले एवं नारंगी रंग के होते हैं। यह 285 दिन में खुदाई के लिए तैयार हो जाती है।

कृष्णा haldi Krishna turmeric-

यह लम्बे प्रकंदों तथा अधिक उपज देने वाली किस्म है। यह कंद गलन के प्रति रोगरोधी है और 255 दिन में पककर तैयार हो जाती है।

बी.एस.आर.-1 हल्दी (BRS-1)-

जिन क्षेत्रों में पानी खड़ा रहता हो वहाँ के लिए अधिक उपज देने वाली उपयुक्त किस्म है। इसके कंद लम्बे तथा चमकीले पीले रंग के होते हैं। यह किस्म 285 दिनों में तैयार हो जाती है।

सवर्णा हल्दी Swarana turmeric-

यह अधिक उपज देने वाली, गहरे नारंगी रंग कंद युक्त अधिक उपज देने वाली किस्म है।

सुगुना haldi Suguna turmeric –

छोटे कंद और 190 दिनों में तैयार होने वाली यह किस्म कंद गलन रोग के लिए प्रतिरोधी है।

सुदर्शन haldi Sudarshan turmeric –

इसके कन्द घने, छोटे आकार के तथा देखने में काफी खूबसूरत होते हैं। यह किस्म 190 दिन में खुदाई के लिए तैयार हो जाती है।
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हल्‍दी में बीज की मात्रा –

बीज की मात्रा प्रकन्दों के आकार व बोने की विधि पर निर्भर करता है। शुद्ध फसल बोये जाने के लिये 20-25 क्विंटल जबकि मिश्रित फसल हेतु 12-15 क्विंटल प्रकन्द की प्रति हेक्टेयर आवश्यकता होती है। प्रकन्द 7-8 सेमी लम्बे तथा कम से कम दो आंखों वाले होने चाहिये। यदि कन्द बड़े हो तो उन्हे काटकर बुवाई की जा सकती है।

हल्‍दी में बीजोपचार

बुवाई के पूर्व प्रकन्दों को थिरम या मैंकोजेब नामक किसी एक दवा की 2.5 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर बीज को 30-50 मिनट तक उपचारित करके छाया में सुखाकर बुवाई करनी चाहिये। भूमि में यदि दीमक लगने की सम्भावना हो तो उपरोक्त रसायनों में क्लोरोपाईरीफॉस की 2 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से मिलाकर उपचारित करना चाहिये।

खेत की तैयारी एवं बोने की विधि

खेत की बुआई करने से पहले उसकी 4-5 जुताई कर, उसे पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा एवं समतल कर लिया जाना चाहिए। पूर्व फसल के अवशेषों को अलग कर दिया जाना चाहिए। हल्दी रोपण हेतु 15 से.मी. ऊंची, एक मीटर चैड़ी तथा सुविधानुसार लम्बी (3-4 मीटर) क्यारियां, 30 से.मी. की दूरी पर क्यारी से क्यारी रख कर बना लेना चाहिए। यदि खेत में नेमोटोड की समस्या हो तो प्लास्टिक सोलेराइजेशन अप्रैल के महीने में ही कर लें, तभी क्यारियां बनाएं। हल्दी का रोपण प्रकन्द (राइजोम) से होता है, जिसमें 20 से 25 क्विंटल प्रकन्द प्रति हेक्टर लगता है। प्रत्येक प्रकन्द में कम से कम 2-3 आॅंखे होना चाहिए। प्रकन्दों को 0.25 प्रतिशत इण्डोफिल, एम-45 घोल में कम से कम 30 मिनिट तक डुबोकर उपचारित करें, कटे-सड़े एवं सूखे तथा अन्य रोग से ग्रसित प्रकन्दों को छांटकर पृथक कर लेना चाहिए। ध्यान रखें कि एक वजन, आकार के कंद एक कतार में लगाएं अन्यथा छोटा-बड़ा प्रकन्द लगाने पर पौधे की बढ़वार समान नहीं हो पाती है। 5 से.मी. गहरी नाली में 30 से.मी. कतार से कतार तथा 20 से.मी. प्रकंद की दूरी रखकर रोपण करें। मदर राइजोम को ही बीज के रूप में उपयोग करना चाहिए। रोपण के बाद मिट्टी से नाली को ढक दें।
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सिंचाई एवं जल माँग प्रबंधन –

हल्दी की फसल में 20-25 हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ती हैं। गर्मी में 7 दिन के अन्तर पर तथा शीतकाल में 15 दिन के अन्तर पर सिंचाई करनी चाहिए।

खाद, उर्वरक मल्चिंग एवं अन्तः कर्षण क्रियाएं

हल्दी की फसल को जीवांश खाद की काफी आवश्यकता रहती है। 25 टन कम्पोस्ट या गोबर की खूब सड़ी हुई खाद प्रति हेक्टर की दर से जमीन में मिला देना चाहिए। रासायनिक उर्वरक नत्रजन-60 किग्रा., स्फुर 30 किग्रा. एवं पोटाश 90 किग्रा. प्रति हेक्टर आवश्यक हैं। स्फुर की पूरी मात्रा एवं पोटाश आधी मात्रा रोपण के समय जमीन में मिला लें। नत्रजन की आधी मात्रा 45 दिन रोपण के बाद और शेष आधी नत्रजन एवं पोटाश की मात्रा 90 दिन बाद मिट्टी चढ़ाते समय डालें। हल्दी रोपण के बाद 12.5 टन/हेक्टर की दर से हरी पत्ती, सूखी घास या अन्य जैविक अवरोध परत क्यारियों के ऊपर फैला देना चाहिए। दूसरी एवं तीसरी अन्य 5 टन प्रति हेक्टर की दर से छिड़काव कर देने के बाद किसी भी अवरोध परत पदार्थ को बिछा दें। तीन-चार बार निंदाई करें, क्योंकि इसको ग्रीष्मकाल में लगाते हैं, जिससे पानी काफी देना पड़ता हैं, जिससे खरपतवार काफी उग आते हैं । अक्टूबर के बाद भी सिंचाई करते हैं, जिससे उत्पादन अच्छा होता हैं।

हल्दी की मिश्रित खेती या अन्तरवर्ती फसल

मैदानी क्षेत्र में मिर्च एवं अन्य फसलों के साथ मुख्यतया सब्जी वाली फसलों में इसे मिश्रित फसल के रूप में लगाया जाता हैं। इसे अरहर, सोयाबीन, मूंग, उड़द की फसल के साथ भी लगाया जा सकता है। अन्तरवर्ती फसल के रूप में बगीचों में जैसे आम, कटहल, अमरूद, चीकू, केला फसल के लाभ का अतिरिक्त आय प्राप्त की जाती है।

हल्दी फसल के प्रमुख कीट एवं रोग/व्याधियां–

शूटबोरर

– यह कीट हल्दी के स्युडोस्टेम (तना) एवं प्रकंद में छेद कर देता हैं। इससे पौधों में भोज्य सामग्री आदि तंतुओं के नष्ट होने से सुचारू रूप से प्रवाह नहीं कर पाती है तथा कमजोर होकर झुक जाता है। इसका नियंत्रण 0.05 प्रतिशत डाइमिथोएट या फास्फोमिडान का छिड़काव करने से किया जावे।

साॅफ्टराट

हल्दी की यह काफी क्षति पहंुचाने वाली बीमारी है। यह बीमारी पीथियमस्पेसीन के प्रकोप से होती है। इसके
प्रकोप से प्रकन्द सड़ जाता है। नियंत्रण के लिए 0.25 प्रतिशत इण्डोफिल एम-45 से मिट्टी की ड्रेंचिंग करें। रोपण के पहले प्रकन्द का उपचार करके ही लगायें।

लीफ स्पाट

यह बीमारी कोलिटोट्राइकम स्पेसीज फफूंद के कारण होती हैं। इसमें छोटे अण्डाकार अनियमित या नियमित भूरे रंग के धब्बे पत्तियों पर दोनों तरफ पड़ जाते हैं, जो बाद में धूमिल पीली या गहरे भूरे रंग के हो तो सावधानी बतौर बीमारी के प्रकोप के पूर्व ही 1 प्रतिशत बोर्डाे मिश्रण का छिड़काव 15 दिन के अन्तराल पर सितंबर के प्रथम सप्ताह में करें।

हल्दी की खेती की जानकारी व हल्दी के औषधीय फायदे | Scientific cultivation of Turmeric
हल्दी की खेती की जानकारी व हल्दी के औषधीय फायदे | Scientific cultivation of Turmeric
फसल की खुदाई

हल्दी फसल की खुदाई 7 से 10 माह में की जाती है। यह बोई गयी प्रजाति पर निर्भर करता है। प्रायः जनवरी से मार्च के मध्य खुदाई की जाती है। जब पत्तियां पीली पड़ जाये तथा ऊपर से सूखना प्रारंभ कर दे। खुदाई के पूर्व खेत में घूमकर परीक्षण कर ले कि कौन-कौन से पौधे बीमारी युक्त है, उन्हें चिंहित कर अलग से खुदाई कर अलग कर दें तथा शेष को अलग वर्ष के बीज हेतु रखें।

हल्दी की उपज Yield of turmeric

अच्छी फसल होने पर 18-20 क्विंटल ताजी हल्दी प्रति बीघा प्राप्त होती है, जो प्रोसैसिंग (सुखाने) के बाद 4.5 – 5.0 क्विंटल प्रति बीघा रह जाती है।

बीज सामग्री का भंडारण

खुदाई कर उसे छाया में सुखा कर मिट्टी आदि साफ करें। प्रकंदों को 0.25 प्रतिशत इण्डोफिल एम-45 या 0.15 प्रतिशत बाविस्टीन एवं 0.05 प्रतिशत मैलाथियान के घोल में 30 मिनिट तक उपचारित करें। इसे छाया में सुखाकर रखें। हल्दी भंडारण के लिए छायादार जगह पर एक मीटर चैड़ा, 2 मीटर लम्बा तथा 30 से.मी. गहरा गड्ढा खोदें। जमीन की सतह पर धान का पुआल या रेत 5 से.मी. नीचे डाल दें। फिर उस पर हल्दी के प्रकन्द रखें इसी प्रकार रेत की दूसरी सतह बिछा कर हल्दी की तह मोड़ाई करें। गड्ढा भर जाने पर मिट्टी से ढॅंककर गोबर से लीप दें।

हल्दी की क्योरिंग

हल्दी के प्रकन्दों को सूखा लेना चाहिए तथा उसके ऊपर की गंदगी साफ करके कड़ाहे में उबलने के लिए डालंे। फिर उसे कड़ाहे में चूने के पानी या सोडियम बाई कार्बनेट के पानी में घोल लें। पानी की मात्रा उतनी ही डालें जिससे पानी ढॅंक जावे। उसे 45 से 60 मिनट तक उबाले जब सफेद झाग आने लगे तथा उसमें से जब विचित्र महक आने लगती है, तब उसे अलग से पृथक करें। आजकल सोलर ड्रायर भी हल्दी के लिए बनाये गये हैं। उसे पानी से निकाल कर अलग करें। हल्दी जो कि उबल कर मुलायम हो गयी है या नहीं। खुदाई के 2 दिन बाद ही उबालना चाहिए। फिर उसे 10-15 दिन सुखाएं।

हल्दी का सुखाना

उबली हुई हल्दी को बांस की चटाई पर रोशनी में 5-7 से.मी. मोटी तह पर सुखायें। शाम को ढॅंककर रख दें। 10-15 दिन पूर्णतया सूख जाने से ड्रायर के 60 डिग्री से. पर सुखाते हैं। सूखने के बाद तक उत्पाद प्राप्त होता हैं।

पालिशिंग –

हल्दी का बाहरी भाग खुरदरा तथा छिलके वाला दिखाई देता है। इसीलिए उसे चिकना तथा एक समान
बनाने के लिए हाथ से आदमियों द्वारा पालिश करते है। बोरियों में भरकर उसे रगड़ा जाता है। आजकल पालिशिंग
ड्रम बनाये गये हैं, उसमें भी पालिश करते हैं। हल्दी को रंगने के लिए 1 किलोग्राम हल्दी को पीस कर उससे एक क्विंटल हल्दी को रंगा जा सकता है, जिससे यह ऊपर से एक समान पीले रंग की दिखाई देती है।

हल्दी से बनने वाले उत्पाद

1.हल्दी का पाउडर जो मसाले के काम आता हैं।
2. हल्दी का आयल -हल्दी में 3 से 5 प्रतिशत बोलाटाइल आयल (तेल) निकलता हैं जो स्टीम डिस्टीलेशन द्वारा निकाला जाता हैं। यह हल्दी पाउडर से निकाला जाता हैं। तेल 8 से 10 घंटे में धीरे-धीेरे निकलता हैं।
3. टर्मकेरिक ओलियोरोजिन:- यह साल्वेन्टर एक्सट्रेक्शन विधि से निकाला जाता है। इसकी कीमत कर्कुमिन की मात्रा के ऊपर निर्भर करती हैं।

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