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Sunday, November 29, 2020
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काली तुलसी की खेती कैसे करें

तुलसी का पौधा देवता तुल्य माना जाता है । काली तुलसी जिसे श्यामा तुलसी भी कहते हैं । काली तुलसी का पौधा हिंदू धर्म के अनुयानी अपने घरों के आँगन में लगाते हैं । सुबह शाम उसकी पूरी पूजा भी करते हैं । तुलसी के साथ हिंदू धर्म से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ भी जुड़ी हैं । काली तुलसी के बड़े चमत्कारिक फ़ायदे (kali tulsi ke fayde ) होते हैं । इसके तुलसी के पूरे पौधे का हर भाग औषधीय काम में आता है ।

काली तुलसी की खेती kali tulsi ki kheti
काली तुलसी की खेती kali tulsi ki kheti

kali tulsi ke ayurvedic fayde ke karan bazar me kali tulsi ki badi demand hai . tusli ka tel, tusli ka juice, tulsi ki mala banti hai. herbal farming ya medicine farming me kisan bhai kali tulsi ki kheti karke apni income double kar sakte hai.

तुलसी सर्दी, जुकाम , बुख़ार, खांसी, दस्त, चेहरे की चमक , व साँसों की दुर्गंध, चोट लग जाने पर,काम आती है ।कैंसर के इलाज में भी तुलसी बड़ी कारगर है । महिलाओं में अनियमित माहवारी की समस्या भी तुलसी से ठीक हो जाती है ।तुलसी की पत्तियों में एक चमकीला पीला वाष्पशील तेल पाया जाता है जो कीडे़ और वैक्टीरिया के खिलाफ उपयोगी होता है । काली तुलसी की खेती kali tulsi ki kheti भारत में यह जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमालय प्रदेश, उत्तरांचल और दिल्ली में पाई जाती है।

Botanical introduction of Tulsi plant

तुलसी के पौधे का वानस्पतिक परिचय

तुलसी एक सगंधीय श्रेणी का कृषि योग्य शाकीय पौधा है । काली तुलसी का वैज्ञानिक नाम (Basil Scientific name) ओसिमम केनम (Ocimum Canum) है । तुलसी का जन्मस्थान मूलरूप से अफ़्रीका है । काली तुलसी लेमीलेऐसी परिवार का औषधीय पौधा है । तुलसी की चार प्रजातियाँ पायी जाती हैं –

– American basil or hoary basil (
– Krishna Tulsi (Ocimum sanctum)
– Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum),
– Babi Tulsi
– Tukashmiya Tulsi
– Amrita Tulsi
– Vana Tulsi (Ocimum gratissimum)
– Kapoor Tulsi (Ocimum sanctum)
– Holy basil or tulsi (Ocimum tenuiflorum
– sweet basil ocimum basilicum
– Ocimum Compenchericum

काली तुलसी की खेती कैसे करें (Black Tulsi farming in hindi) इसके बारें में जांने से पहले हमें तुलसी के पौधे के विषय में जानना  चाहिए । यह मूलरूप से अफ्रीका महाद्वीप का पौधा है। इसके अलग स्वाद, रोयेंदार पत्तियों और सुंगधित फूलों के कारण इसे अफ्रीका तुलसी के नाम से भी जाना जाता है। भारत में हिन्दू अपने घरों, मंदिरो और खेतो में इसे एक धार्मिक पौधे के रूप में उगाते है। वे तुलसी की पत्तियों का पूजा में उपयोग करते है। ।यह जड़ी-बूटी उष्णकटिबंधीय अफ्रीका और दूसरे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में समान्यत: पाई जाती है। बाद में इसे अमेरिका में लाया गया।

Climate and temperature

जलवायु व तापमान –

तुलसी का पौधे के लिए 15 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान उपयुक्त होता है । शुरुआत में इसकी वृद्धि मंद होती है । लेकिन सूरज की रोशनी में यह बड़ी तेज़ी से विकास करता है । तुलसी की खेती समुद्र से दो हज़ार तक की ऊँचाई में की जा सकती है ।

Selection of land

भूमि  का चयन –

तुलसी की खेती के लिए दोमट व जीवांश युक्त सूखी मिट्टी अच्छी होती है । नम भूमि में तुलसी के पौधे का विकास अच्छा होता है ।

Showing time

बुवाई का समय –

हमारे देश में काली तुलसी की खेती जूनइसकी बुबाई वर्षा आधारित क्षेत्रों में बारिश के मौसम में और सिंचित क्षेत्रों अक्टूबर – नवंबर माह में की जाती है।

soin preparation

भूमि की तैयारी-

kali tusli ki kheti हेतु गर्मियों में खेत की जुताई करके उसे गोबर की खाद मिलाकर छोड़ दें । दो तीन हफ़्ते बाद हेरो से पुनः जुताई कर दें । हर जुताई के बाद पाटा चलाकर खेत को समतल कर लेना चाहिए । पाटा से खेत की नमी व गर्मी दोनो सुरक्षित हो जाती है । खेत को अच्छी तरह जोतकर और हेरो चलाकर क्यारियाँ बना ली जाती है।

Bed-Preparation and Method of sowing –

नर्सरी बिछौना तैयार करना व बुवाई

काली तुलसी की खेती से अच्छी उपज के लिए अच्छे किस्म की नर्सरी होना बहुत ज़रूरी है । तुलसी की नर्सरी हेतु जो seed bed तैयार की जाती है । उसमें गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग किया जाता है। एक हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 20-30 कि.ग्रा. तुलसी के बीजों की ज़रूरत होती है । बीज बहुत छोटे होते हैं इसलिए राख मिलाकर तुलसी की बुवाई की जाती है । बुवाई के बाद farm yard manures यानी कम्पोस्ट और मिट्टी के मिश्रण की पतली परत को बीजों के ऊपर फैला दें । समय समय Sprinkler Watering करें । बीज अंकुरण के लिए 8-12 दिन का समय लेते है और लगभग 6 सप्ताह के बाद पौधे रोपण के लिए तैयार हो जाते है।

Transplanting

रोपाई –

जहां पर पानी सुविधा है ऐसे क्षेत्रों में काली तुलसी की रोपाई जुलाई या अक्टूबर – नवंबर माह में की की जाती है । 6 से 10 से.मी. लंबे तुलसी की नर्सरी को पौधो को कतार में 40 से.मी. की दूरी पर लगाया जाता है। काली तुसली की रोपाई के तुंरत बाद खेत की सिंचाई ज़रूर कर दें ।

Manures and Fertilizers

खाद व उर्वरक –

काली तुलसी की खेती में अधिक खाद की ज़रूरत नही होती । फिर भी अधिक ज़रूरत होने पर जैविक उर्वरक (Organic fertilizer) या तरल उर्वरक (Liquid fertilizer) का प्रयोग करें । अधिक उर्वरक के प्रयोग से पौधा जल जाता है। उर्वरक डालते समय यह ध्यान दें कि जब मौसम बहुत गर्म या ठंडा हो तो उर्वरक न दें । रोपण के समय आधारीय खुराक के रूप में मिट्टी में 40 कि.ग्रा./हे. फ़ोस्फोरस की पर्याप्त होता है । पौधे के बढ़वार के दौरान 40 कि.ग्रा./हे. नाइट्रोजन की मात्रा पूरी मात्रा को दो भागों में बाँटकर दें ।

Irrigation management drainage management

सिंचाई प्रबंधन जल निकासी प्रबंधन –

काली तुलसी की खेती की रोपाई के बारिश के मौसम आस पास की जाती है । इसलिए सिंचाई की ज़रूरत फ़िलहाल नही होती हैं । तुलसी की खेती में पहली सिंचाई मानसून के अंत के बाद खेत की सिंचाई की जाती है। तथा दूसरी सिंचाई के बाद पौधे अच्छी तरह जम जाते है। गार्मियो में 3-4 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है जबकि शेष अवधि के दौरान आवश्यकता के अनुसार सिंचाई की जाती है। लगभग 20-25 बार सिंचाई देना पर्याप्त होता है।

Weed control management

घसपात नियंत्रण प्रबंधन –

अनावश्यक उगे हुए खरपतवारों को निराई – गुड़ाई कर निकाल दें । इसके लिए 4 या 5 बार निराई – गुड़ाई की आवश्यकता होती है। निराई का काम हाथ से या ट्रेक्टर चालित कल्टीवेटर Tractor driven cultivator द्दारा किया जा सकता है।

Basil crop, harvest time

तुलसी की तुडाई,फसल कटाई का समय –

रोपण के 90-95 दिन बाद फसल प्रथम तुडाई के लिए तैयार हो जाती है। तुडाई अच्छी धूप वाले दिन में की जानी चाहिए। पत्ती उत्पादन (Basil Leaf production) के लिए फूलों के प्रारंभिक स्तर पर पत्तियों की तुड़ाई की जाती है। फसल को जमीनी स्तर से 15-20 से.मी़. ऊपर काटा जाता है । तुलसी की कटाई इस प्रकार की जाती है कि शाखाओ को काटने के बाद बचे हुये तने की फिर से उत्पत्ति हो सके।अंतिम कटाई के दौरान संपूर्ण पौधे को उखाड़ा जाता है।

Drying

सुखाना –

इसे पतली परत बनाकर छायादार स्थान में 8-10 दिनों के लिए सुखाया जाता है।इसे अच्छे हवा एवं छायादार स्थान मे ही सुखाना चाहिए।

Distillation

आसवन

तुलसी तेल को आंशिक रूप से सूखी जड़ी-बूटी के भाप आसवन के द्दारा प्राप्त किया जाता है।आसवन सीधे अग्नि प्रज्जवलन भट्टी द्दारा किया जाता है जो भाप जनेरटर द्दारा संचालित होता है।

Packing

पैकिंग

वायुरोधी थैले इसके लिए आदर्श होते है।नमी के प्रवेश को रोकने के लिए पालीथीन या नायलाँन थैलो में पैक किया जाना चाहिए।

Storage

भडांरण

पत्तियों को शुष्क स्थानों में संग्रहित किया जाना चाहिए। गोदाम भंडारण के लिए आदर्श होते है।शीत भंडारण अच्छे नहीं होते हैं।

Tulsi Value Additions Product –

तुलसी के उत्पाद

– Basil Ginger
– Ayurvedic Tulsi Churna
– Tulsi tea
– Medicinal Tulsi Capsules
– Punch basil oil

Kheti Gurujihttps://khetikisani.org
खेती किसानी - Kheti किसानी - #1 Agriculture Website in Hindi

4 COMMENTS

  1. […] यह भारत के दक्षिण भारत व समुद्र तटीय इलाकों के उगाई जाने वाली उपयुक्त मशरूम है | भारत के उत्तरी मैदानी भागों में अक्टूबर –अप्रैल तक उगाया जा सकता है | स्वाद व सुगंध पोषक तत्वों से भरपूर धीगरी मशरूम 20-28० C तापमान व 80-85 प्रतिशत सापेक्षित humidity पर उगाया जा सकता है | यह मोटापे मधुमेह व हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए आदर्श आहार है | इसलिए बाजार में इस मशरूम की सबसे अधिक डिमांड रहती है | इसके अतिरिक्त आयेस्टर मशरूम,जायंट पकवाल,कैटरली,ट्रमोरल आदि किस्में हैं | काली तुलसी की खेती कैसे करें ? […]

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