काली तुलसी की खेती कैसे करें ?

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काली तुलसी की खेती कैसे करें (Black Tulsi farming in hindi)

काली तुलसी की खेती कैसे करें (Black Tulsi farming in hindi)

  • श्रेणी (Category) : सगंधीय
  • समूह (Group) : कृषि योग्य
  • वनस्पति का प्रकार : शाकीय
  • वैज्ञानिक नाम : ओसिमम केनम
  • सामान्य नाम : काली तुलसी
  • कुल : लेमीलेऐसी
  • आर्डर : लेंमीअलेस
  • प्रजातियां :
     ओ. अमेटीकनेम
     ओ. बेसीलीकम
     ओ. कम्पेमेन्चेरिकम
     ओ. टेनुइफ्लोरम

उत्पति-

यह मूलरूप से अफ्रीका महाद्वीप का पौधा है। 

वितरण  व उपयोग –

काली तुलसी की खेती कैसे करें (Black Tulsi farming in hindi) इसके बारें में जांने से पहले हमें तुलसी के पौधे के विषय में जानना  चाहिए । यह मूलरूप से अफ्रीका महाद्वीप का पौधा है। इसके अलग स्वाद, रोयेंदार पत्तियों और सुंगधित फूलों के कारण इसे अफ्रीका तुलसी के नाम से भी जाना जाता है। भारत में हिन्दू अपने घरों, मंदिरो और खेतो में इसे एक धार्मिक पौधे के रूप में उगाते है। वे तुलसी की पत्तियों का पूजा में उपयोग करते है। तुलसी की पत्तियों में एक चमकीला पीला वाष्पशील तेल पाया जाता है जो कीडे़ और वैक्टीरिया के खिलाफ उपयोगी होता है।यह जड़ी-बूटी उष्णकटिबंधीय अफ्रीका और दूसरे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में समान्यत: पाई जाती है। बाद में इसे अमेरिका में लाया गया।काली तुलसी की खेती (Black Tulsi farming in hindi) भारत में यह जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमालय प्रदेश, उत्तरांचल और दिल्ली में पाई जाती है।


स्वरूप :

 पौधा आधारीय शाखाओ, कोणीय तने और अण्डाकार रोमिल पत्तियों के साथ होता है।
 यह पौधा अनियमित और झुंड में चक्राकार रूप से बढ़ता है।
 इसके दलपुंज छोटे होते है।

पत्तिंया :

 पत्तियाँ एक दूसरे के सम्मुख और दांतेदार होती है।
 पत्तियाँ छोटी और अस्पष्ट होती है।

फूल :

 फूल बैंगनी और सफेद रंग के होते है।
 फूलों से लौंग से मिलती – जुलती एक मीठी खुशबू आती है।
 फूल अधिक सुस्पष्ट होते है।
 फूल अगस्त माह से आना प्रारंभ होते है।

बीज :

 बीज काले और दीर्धवृत्ताभ में होते है।
 बीज गीले होने पर चिपचिपे हो जाते है।

परिपक्व ऊँचाई :
 यह पौधा 2 फीट की ऊचाँई तक बढ़ता है।

जलवायु :

काली तुलसी की खेती (Black Tulsi farming in hindi) हेतु यह सूरज की रोशनी में बहुत अधिक पनपता है। तुलसी स्वाभाविक रूप से समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊचाँई तक पाई जाती है।यह प्रारंभिक स्थिति में अच्छी तरह नहीं बढ़ती है और इसे धूप की आवश्यकता होती है।

भूमि  का चयन –

इसे अच्छी तरह से सूखी मिट्टी की आवश्यकता होती है।पौधे को विशेष रूप से घर के अंदर गर्म मिट्टी में रखने पर तेजी से बढ़ता है।यह पौधा नम मिट्टी में स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।

बुवाई का समय –

इसकी बुबाई वर्षा आधारित क्षेत्रों में बारिश के मौसम में और सिंचित क्षेत्रों अक्टूबर – नवंबर माह में की जाती है।

भूमि की तैयारी :

काली तुलसी की खेती (Black Tulsi farming in hindi) हेतु खेत को अच्छी तरह जोतकर और हेरो चलाकर क्यारियाँ बना ली जाती है।अच्छी तरह से मिश्रित FYM मिट्टी में मिलाना चाहिए।

फसल पद्धति विवरण :

 तुलसी बीज आसानी से अंकुरित हो जाते है।
 चूंकि बीज छोटे होते है इसलिए इन्हे रेत और लकड़ी की राख के मिश्रण के साथ मिलाया जाता है।
 बीज अप्रैल – मई माह के महीनों के दौरान बोये जाते है।
 उन्हे समय – समय पर पानी दिया जाता है और अंकुरण एक से दो सप्ताह बाद होता है।

रोपाई (Transplanting) :
सिंचित क्षेत्रों में 6 से 10 से.मी. लंबे अंकुरित पौधो को जुलाई या अक्टूबर – नवंबर माह में खेतों में लगाया जाता है।अंकुरित पौधो को कतार में 40 से.मी. की दूरी पर लगाया जाता है।रोपण के तुंरत बाद खेत की सिंचाई की जाती है।

नर्सरी बिछौना-तैयारी (Bed-Preparation) :
काली तुलसी की खेती (Black Tulsi farming in hindi) हेतु क्यारियों को अच्छी तरह से तैयार किया जाता है। गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग किया जाता है।बीज नर्सरी में बोये जाते है।एक हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 20-30 कि.ग्रा. बीजों की आवश्यकता होती है।बुवाई के बाद FYM और मिट्टी के मिश्रण की पतली परत को बीजों के ऊपर फैलाया जाता है। स्पिंक्लर द्दारा सिंचाई की जाती है।बीज अंकुरण के लिए 8-12 दिन का समय लेते है और लगभग 6 सप्ताह के बाद पौधे रोपण के लिए तैयार हो जाते है।

खाद  व उर्वरक –

जैविक उर्वरक या तरल उर्वरक का प्रयोग किया जाता है।इसे कम उर्वरक की आवश्यकता होती है। बहुत ज्यादा उर्वरक से पौधा जल जाता है।कभी भी बहुत गर्म या ठंडे मौसम में उर्वरक नहीं डालना चाहिए।रोपण के समय आधारीय खुराक के रूप में मिट्टी में 40 कि.ग्रा./हे. P की मात्रा दी जाती है।काली तुलसी की खेती कैसे करें (Black Tulsi farming in hindi) हेतु पौधे के विकास के दौरान 40 कि.ग्रा./हे. N की मात्रा दो भागों में विभाजित करके दी जाती है।

सिंचाई प्रबंधन जल निकासी प्रबंधन –

काली तुलसी की खेती (Black Tulsi farming in hindi) हेतु रोपण के बाद विशेष रूप से मानसून के अंत के बाद खेत की सिंचाई की जाती है।दूसरी सिंचाई के बाद पौधे अच्छी तरह जम जाते है।अंतराल को भरने और कमजोर पौधो को अलग करने का यह सही समय होता है ताकि खेत में एक समान पौधे रहें।गार्मियो में 3-4 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है जबकि शेष अवधि के दौरान आवश्यकता के अनुसार सिंचाई की जाती है। लगभग 20-25 बार सिंचाई देना पर्याप्त होता है।

घसपात नियंत्रण प्रबंधन :
रोपण के पहले गहरी निंदाई की जाती है।खरपतवार की सभी जड़े हाथों से एकत्रित करके हटा दी जाती है।अच्छे प्रंबधन के अंतर्गत खेत को खरपतवार मुक्त रखने के लिए 4 या 5 बार निंदाई की आवश्यकता होती है।निंदाई को हाथ से या ट्रेक्टर चालित कल्टीवेटर द्दारा किया जा सकता है।

तुडाई, फसल कटाई का समय :
तुडाई अच्छी धूप वाले दिन में की जानी चाहिए।रोपण के 90-95 दिन बाद फसल प्रथम तुडाई के लिए तैयार हो जाती है।पत्ती उत्पादन के लिए फूलों के प्रारंभिक स्तर पर पत्तियों की तुड़ाई की जाती है।फसल को जमीनी स्तर से 15-20 से.मी़. ऊपर काटा जाता है ।कटाई इस प्रकार की जाती है कि शाखाओ को काटने के बाद बचे हुये तने की फिर से उत्पत्ति हो सके।अंतिम कटाई के दौरान संपूर्ण पौधे को उखाड़ा जाता है।

सुखाना :

इसे पतली परत बनाकर छायादार स्थान में 8-10 दिनों के लिए सुखाया जाता है।इसे अच्छे हवा एवं छायादार स्थान मे ही सुखाना चाहिए।

आसवन (Distillation) :

तुलसी तेल को आंशिक रूप से सूखी जड़ी-बूटी के भाप आसवन के द्दारा प्राप्त किया जाता है।आसवन सीधे अग्नि प्रज्जवलन भट्टी द्दारा किया जाता है जो भाप जनेरटर द्दारा संचालित होता है।

पैकिंग (Packing) :

वायुरोधी थैले इसके लिए आदर्श होते है।नमी के प्रवेश को रोकने के लिए पालीथीन या नायलाँन थैलो में पैक किया जाना चाहिए।

भडांरण (Storage) :

पत्तियों को शुष्क स्थानों में संग्रहित किया जाना चाहिए।गोदाम भंडारण के लिए आदर्श होते है।शीत भंडारण अच्छे नहीं होते हैं।

परिवहन :

सामान्यत: किसान अपने उत्पाद को बैलगाड़ी या टैक्टर से बाजार तक पहुँचता हैं।दूरी अधिक होने पर उत्पाद को ट्रक या लाँरियो के द्बारा बाजार तक पहुँचाया जाता हैं।परिवहन के दौरान चढ़ाते एवं उतारते समय पैकिंग अच्छी होने से फसल खराब नहीं होती हैं।

अन्य-मूल्य परिवर्धन उत्पाद (Other-Value-Additions) :
  • तुलसी अदरक
  • आयुर्वेदिक तुलसी चूर्ण
  • तुलसी चाय
  • औषधीय तुलसी कैप्सूल
  • पंच तुलसी तेल

3 COMMENTS

  1. […] यह भारत के दक्षिण भारत व समुद्र तटीय इलाकों के उगाई जाने वाली उपयुक्त मशरूम है | भारत के उत्तरी मैदानी भागों में अक्टूबर –अप्रैल तक उगाया जा सकता है | स्वाद व सुगंध पोषक तत्वों से भरपूर धीगरी मशरूम 20-28० C तापमान व 80-85 प्रतिशत सापेक्षित humidity पर उगाया जा सकता है | यह मोटापे मधुमेह व हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए आदर्श आहार है | इसलिए बाजार में इस मशरूम की सबसे अधिक डिमांड रहती है | इसके अतिरिक्त आयेस्टर मशरूम,जायंट पकवाल,कैटरली,ट्रमोरल आदि किस्में हैं | काली तुलसी की खेती कैसे करें ? […]

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