29 C
Lucknow
Sunday, June 13, 2021
Home Crops and vegetables सेम की खेती कैसे करें ( sem ki kheti kaise kare )

सेम की खेती कैसे करें ( sem ki kheti kaise kare )

सेम की खेती कैसे करें (sem ki kheti kaise kare?,

आए दिन गूगल पर आप सर्च करते रहते हैं। प्याज की खेती कैसे करें ? लहसुन की खेती कैसे करें ? ब्रोकली की खेती कैसे करें How to Cultivate broccoli करी पत्ता की उन्नत खेती कैसे करें ? आप सबकी गूगल सर्च के क्रम आज पेश है सेम की उन्नत खेती की जानकारी ।

भाइयों भारत में सब्ज़ियों की खेती में सेम उत्पादन का एक अलग स्थान है। इसकी खेती भारत के विभिन्न राज्यों जैसे – उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र व तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर की जाती है। इसकी इसकी हरी फलियाँ लोग सब्ज़ी बनाकर बड़े चाव से खाते हैं । साथ ही हरी फलियों से अचार भी बनाया जाता है। सेम की लताये पशु चारे के रूप में प्रयोग की जाती हैं। गाँवो व शहरों में इसे लोग अपनी गृह वाटिका में लगाते हैं। पश्चिमी देशों में इसे बोनाविशिष्ट के नाम से जाना जाता है ।

HOW TO FARMING INDIAN BEAN (sem ki kheti hindi me)

आइए जाने इसके वानस्पतिक विवरण के बारे में –

वानस्पतिक नाम – डॉलीकस लबलब(dolychus lablab)

कुल – फेबेसी (fabacease)

गुणसूत्रों की संख्या – 2n = 22 व २४

उद्भव स्थल – भारत

पोषक मूल्य – १०० ग्राम में –

पोषक तत्व –

प्रोटीन

मात्रा –

3.8

कार्बोहाइड्रेट 6.7
वसा 0.7
आयरन 1.70
गंधक 40.00
ताँबा 0.13
खनिज पदार्थ 0.9
पोटेशियम 74.00
कैलसियम 210.00
मैगनीशियम 34.00
कैलोरी 48.00
फ़ाइबर 1.8

 

उन्नत क़िस्में –

अगेती  क़िस्में – पूसा प्रौलिफ़िक, एच०डी० १,१८,डी०बी०१,१८,एच०ए० ३,रजनी,जे०डी०एल०५३,८५,कल्याणपुर टाइप १,२,पूसा सेम ३ (सेलेक्शन १५), पूसा सेम २ (सेलेक्शन १२) जवाहर सेम ३७,५३,७९,८५,अर्का जय व अर्का विजय,

मध्यमी व पिछेती उन्नत क़िस्में – जे०डी०एल० ३७,४३,७१,७९ जे०डी० ११४,११९,१३८, एल० ७७,७९,१३९

जलवायु व तापमान –

पाला अधिक पड़ने वाले स्थानों को छोड़कर लगभग सभी ठंडी जलवायु वाले स्थानों में सेम सफलतापूर्वक की जा सकती है। इसके पौधों का समुचित वृधि छोटे अवधि वाले दिनों में अधिक होता है। सेम की फ़सल को पाले से बहुत नुक़सान होता है क्योंकि इसकी फ़सल पाला बिलकुल भी नही सह पाती है ।

 

भूमि का चयन –

beans ki kheti kaise kare- सेम की फ़सल से अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु उचित भूमि का चयन करना बेहद आवश्यक है। भूमि उचित जल निकास वाली हो,भूमि क्षारीय  व अम्लीय ना हो,भूमि का पीएच मान 5.3 – 6.0 होना चाहिए । दोमट मृदा के अलावा सेम की खेती चिकनी व रेतीली भूमि में होती देखी गयी है ।

बुवाई का समय –

फ़रवरी – मार्च

जून – जुलाई

बीज की मात्रा –

सेम की खेती के लिए 5-7 kg प्रति हेक्टेयर बीज पर्याप्त होता है। वहीं मिश्रित या मिलवाँ फ़सलोत्पादन में बीज की मात्रा 2- 3 kg की आवश्यकता होती है।

बोने की विधि –

सेम की बुवाई हेतु खेत की तैयारी करने के बाद खेत में लगभग 1.5 मीटर की चौड़ी क्यारियाँ बना लें। क्यारियों के दोनों किनारों पर क़रीब 1.5 – 2.0 फ़ीट की दूरी व २ से ३ सेंटीमीटर की गहराई में २-३ बीजों की बुवाई करें । बीजों को रोग रक्षा हेतु किसी भी कवकनाशी से उपचारित अवश्य करें । एक सप्ताह के अंदर बीज अंकुरित हो जाएँगे। जब पौधों की बढ़वार लगभग 15-20 सेंटीमीटर हो जाए एक स्थान में सिर्फ़ एक स्वस्थ पौधा छोड़कर बाक़ी के पौधे उखाड़ दें। पौधे के बाँस की बल्लियों से सहारा देकर चढ़ाने से पौधों की अच्छी बढ़वार होती है। पौधों का विकास अच्छा होता है।

सिंचाई व जल निकास प्रबंधन –

सेम की फ़सल में सिंचाई मृदा के प्रकारों, व मृदा के जल धारण क्षमता पर निर्भर होती है । दोमट मृदा में कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। जबकि बलुई व चिकनी मृदा में अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है। यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि फ़रवरी मार्च के समय बोयी गयी फ़सल में सप्ताह में एक बार सिंचाई अवश्य करनी चाहिए। वर्षा क़ालीन फ़सल यानी जून-जुलाई की फ़सल में जब अधिक समय तक बारिश ना हो तभी सिंचाई करें।

पादप पोषण प्रबन्धन – खाद व उर्वरक –

सेम की फ़सल में मृदा परीक्षण के पश्चात प्राप्त मृदा रिपोर्ट कार्ड के आधार कर खाद व उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए। वैसे देखा जाय तो वानस्पतिक दृष्टि से सेम की फ़सल दलहनी होने के कारण इसकी जड़ ग्रंथियाँ नत्रजन का स्थिरीकरण कर लेती हैं। इसलिए इसे नत्रजन की कोई ज़रूरत नही पड़ती है। किन्ही कारणवश मृदा परीक्षण ना हुआ तो तो बुवाई से पूर्व खेत की तैयारी के समय 150 – 200 कुन्तल प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद अथवा कंपोस्ट मिट्टी में मिला दें। इसके पश्चात N : P : K 20 : 40 : 40 (नाइट्रोजन : फ़ोस्फोरस : पोटाश ) खेत की अंतिम जुताई के दौरान खेत में मिला दें।

पादप सुरक्षा प्रबंधन – फ़सल सुरक्षा 

हमारी फ़सल को मुख्य रूप से तीन घटक ही नुक़सान पहुँचाते हैं –

खरपतवार,कीट व रोग । इसके नियंत्रण के उपाय नीचे दिए जा रहे हैं इसके अनुसार ही सेम की फ़सल पर लगे ब्याधियों से बचाव करें।

खरपतवार नियंत्रण –

मुख्य फ़सल के अतिरिक्त उग आए सभी पौधों को उखाड़ कर बाहर कर दें। इन खरपतवारो के कारण पौधे को भोजन,पानी,व पोषण के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है अतः निराई कर इनके अवश्य निकाल दें । साथ ही निराई – गुड़ाई के दौरान निकली मिट्टी को पौधों की जड़ों पर चढ़ा दें।

कीट नियंत्रण – सेम की फ़सल पर कीट प्रबंधन के उपाय निम्नलिखित हैं –

बीन का बीटल –

लक्षण – यह कीट सेम के पौधें के कोमल भागों को खाता है। इसके कारण सेम के पौधे विकास विकास नही कर पाते सूख जाते हैं। इस कीट का रंग ताँबे जैसा होता है। शरीर के कठोर आवरण पर 16 निशान होते हैं ।

रोकथाम – इस कीट की रोकथाम के लिए 625 मिलीलीटर मैलथियान 50 E.C. को 625 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से सेम की खड़ी फ़सल पर छिड़काव करें ।

चैपा या माहू –

लक्षण – वायुमंडल में बादल के आने अथवा धुँध होने पर इस कीट का प्रकोप बढ़ जाता है। पौधें के पूरे भाग में इस माहू फैल जाती है। व पौधों का रस चूसते हैं। नमी की कमी के चलते पौधा अंत में सूख जाता है ।

रोकथाम – इस कीट की रोकथाम के लिए 625 मिलीलीटर मैलथियान 50 E.C. को 625 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से सेम की खड़ी फ़सल पर छिड़काव करें ।

फली छेदक –

लक्षण – फली छेदक का कीट सेम की फली में छिद्र कर घुस जाता है। और पौधें के कोमल भागों को खाता है। जिससे फलियाँ खोखली हो जाती हैं।

रोकथाम – इस कीट से बचाव हेतु 0.2 % सेवन 50% पाउडर का फ़सल पर प्रति हेक्टेयर की दर से 10-15 दिन के अंतर पर छिड़काव करें ।

पादप रोग प्रबंधन (फ़सल रोग प्रबंधन) –

 

फ़सल की तुड़ाई –

सेम की तुड़ाई का समय उसकी क़िस्म व उसकी बुवाई के समय के अनुसार निर्भर होती है। वैसे सेम की फलियों के पूर्ण विकसित व कोमल अवस्था में तुड़ाई कर लें। तुड़ाई देर से करने पर फलियाँ कठोर हो जाती है व रेशे आ जाते हैं। जिसके कारण बाज़ार मूल्य उचित नही मिल पाता है। इसलिए समय से सेम की तुड़ाई करना ना भूलें।

उपज –

किसी भी फ़सल की उत्पादकता मिट्टी,जलवायु,फ़सल की क़िस्म व सिंचाई की उपलब्धता, पादप सुरक्षा प्रबंधन आदि पर निर्भर करती है। वैसे सेम की फ़सल से प्रति कुन्तल 100 – 150 प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

Kheti Gurujihttps://khetikisani.org
खेती किसानी - Kheti किसानी - #1 Agriculture Website in Hindi

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

सरसों की खेती का मॉडर्न तरीका

लेखक - कमल कृपाल सरसों की खेती ( sarso ki kheti ) का तिलहनी फसलों में बड़ा स्थान है । तेल उत्पादन का एक बड़ा...

भिंडी की जैविक खेती कैसे करें

लेखक - कमल कृपाल भिंडी की खेती (bhindi ki kheti ) पूरे देश मे की जाती है। भिंडी की मांग पूरे साल रहती है ।...

101 सब्जियों के हिंदी और अंग्रेजी में नाम 101 Vegetables Name

लेखक - कमल कृपाल 101 सब्जियों के हिंदी और अंग्रेजी में नाम 101 Vegetables Name in Hindi and english शायद ही आपने सुना होगा ।...

लाल भिंडी की उन्नत खेती (Lal Bhindi Ki Kheti)

लेखक - कमल कृपाल Lal Bhindi Ki Kheti - Red Okra Lady Finger Farming - Okra Red Burgundy लाल भिंडी की खेती (Lal Bhindi Ki...

Recent Comments

%d bloggers like this: