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Saturday, December 5, 2020
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धान की खेती से अधिक पैदावार कैसे पाएँ

आज हम dhan ki kheti से अधिक से अधिक लाभ कैसे पाएँ इस पर जानकारी देंगे । आप में से कई साथियों ने हमसे मेल कर धान की फसल में अधिक पैदावार पाने की टिप्स जानना चाहा है । साथियों अधिक उत्पादन के लिए हमें अपने खेतों में समय पर व नियमित रूप से कार्य करना होगा । पुरानी खेती के तरीक़े को छोड़कर वैज्ञानिक खेती के तरीक़े अपनाना होगा ।

How to get the most production from dhan ki kheti in hindi

dhan ki kheti में अधिक पैदावार के लिए समय पर ध्यान दें ।  खेती में माहवार किए जाने वाले कामों के बारे ने विस्तार से बताया जा रहा है ।

धान की फसल में किए जाने वाले माहवार महत्वपूर्ण कार्य-

मई महीने के कार्य

– पंत-4, सरजू-52, आईआर-36, नरेन्द्र 359 आदि की नर्सरी डालें।
– धान के बीज शोधन हेतु 4 ग्राम स्ट्रेप्टो साइक्लीन रसायन को 45 ली० पानी में घोलकर 25 किग्रा० बीज को 12 घन्टे पानी में भिगोकर तथा सुखाकर नर्सरी में बोना।

जून महीने के कार्य –

धान की नर्सरी कैसे तैयार करें ( dhan ki nursery for paddy crop)
– dhan ki kheti के लिए धान की नर्सरी डालना। सुगन्धित प्रजातियां शीघ्र पकने वाली।
– नर्सरी में खैरा रोग लगने पर जिंक सल्फेट तथा यूरिया का छिड़काव सफेदा रोग हेतु फेरस सल्फेट तथा यूरिया का छिड़काव।
– धान की रोपाई।
– रोपाई के समय संस्तुत उर्वरक का प्रयोग एवं रोपाई के एक सप्ताह के अंदर ब्यूटाक्लोर से खरपतवार नियंत्रण।

जुलाई महीने के कार्य –

– धान की रोपाई प्रत्येक वर्गमीटर में 50 हिल तथा प्रत्येक हिल पर 2-3 पौधे लगाना एवं ब्यूटाक्लोर से खरपतवार नियंत्रण।
– ऊसर क्षेत्र हेतु ऊसर धान-1, ऊसर धान-2, जया एवं साकेत-4 की रोपाई 35-40 दिन की पौध लगाना।
– पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सेमी० व पौध से पौध की दूरी 10 सेमी० एवं एक स्थान पर 4-5 पौध लगाना।

अगस्त महीने के कार्य-

"dhan

– धान में खैरा रोग नियंत्रण हेतु 5 किग्रा०जिंक सल्फेट तथा 20 किग्रा० यूरिया अथवा 2.5 किग्रा० बुझा चूना को 800 लीटर पानी।
– धान में फुदका की रोकथाम हेतु मोनोक्रोटोफास 30 ई०सी० (750 मी०ली०) 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे० छिड़काव।
dhan ki khet

सितम्बर महीने के कार्य-

– इस में फूल खिलने पर सिंचाई।
– समय धान की खेती में दुग्धावस्था में सिंचाई।
धान में भूरा धब्बा एवं झौका रोग की रोकथाम हेतु जिंक मैंगनीज कार्बामेट अथवा जीरम 80 के 2 कि०ग्रा अथवा जीरम 27 प्रतिशत के 3 ली० अथवा कार्बेडान्जिम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोलकर तैयार कर छिड़काव करना चाहिए।
– पत्तियों एवं पौधों के फुदकों के नियंत्रण हेतु मोनोक्रोटोफास 1 लीटर का 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे० छिड़काव।
– धान में फ्लेग लीफ अवस्था पर नत्रजन की टाप ड्रेसिंग।
– गन्धी कीट नियंत्रण हेतु 5 प्रतिशत मैलाथियान चूर्ण के 25 से 30किग्रा० प्रति हे० का बुरकाव करें।

अक्टूबर महीने के कार्य –

– सैनिक कीट नियंत्रण हेतु मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत चूर्ण अथवा फेन्थोएट का 2 प्रतिशत चूर्ण 25-30 किग्रा० प्रति हे० बुरकाव करें।

धान की फसल पर लगने वाले रोग एवं नियंत्रण के उपाय जाने (Diseases and control of paddy crop)

– धान में भूरा धब्बा एवं झौका रोग की रोकथाम हेतु जिंक मैंगनीज कार्बामेट अथवा जीरम 80 के 2 कि०ग्रा अथवा जीरम 27 प्रतिशत के 3 ली० अथवा कार्बेडान्जिम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोलकर तैयार कर छिड़काव करना चाहिए।
– पत्तियों एवं पौधों के फुदकों के नियंत्रण हेतु मोनोक्रोटोफास 1 लीटर का 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे० छिड़काव।
– धान में फ्लेग लीफ अवस्था पर नत्रजन की टाप ड्रेसिंग।
– गन्धी कीट नियंत्रण हेतु 5 प्रतिशत मैलाथियान चूर्ण के 25 से 30किग्रा० प्रति हे० का बुरकाव करें।

जब आप उपरोक्त क्रम से माहवार dhan ki kheti पर ध्यान देंगे तो धान की खेती से अधिक पैदावार अवश्य मिलेगी ।

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2 COMMENTS

  1. […] धान की कटाई के बाद गेहूँ के लिए खेत की तैयारी तत्काल कर लें। देख लें कि मिट्टी भुरभुरी हो जाये और ढेले न रहने पायें। […]

  2. […] धान की फसल में एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन – गर्मी की मिट्टी पलट हल से गहरी जुताई करने से भूमि में कीटों की विभिन्न अवस्थायें जैसे- अण्डा, सूड़ी, शंखी एवं प्रौढ़ अवस्थायें नष्ट हो जाती हैं तथा चिडिया भी कीटों को चुगकर खा जाती हैं। इसके अतिरिक्त भूमि जनित रोगों यथा-उकठा, जड़ सड़न, डैम्पिंग आफ, कालर राट, आदि भी सूर्य के प्रकाश में नष्ट हो जाते हैं। इसी प्रकार खरपतवारों के बीज भी मिट्टी में नीचे दब जाते हैं, जिससे खरपतवारों को जमाव बहुत ही कम हो जाता है। […]

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