उर्वरको में मिलावट की जाँच कैसे करें । Recognize Adulterated Fertilizers

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प्राचीन युग से ही “खाद” का पौधों, फसल उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। खाद” का पौधों फसल उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान है। खाद शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के खाद्य शब्द से हुई है।

खाद की परिभाषा –

जल के अतिरिक्त वे सब पदार्थ जो मिट्टी में मिलाए जाने पर उसकी उर्वरता में सुधार करते हैं खाद कहलाते हैं।

खाद देने के उद्देश्य –

संतुलित पोषक तत्व उपलब्ध करना-पौधों को अधिक से अधिक एवं संतुलित मात्रा में सभी आवश्यक तत्वों की उपलब्धि कराना।
फसलों से अधिक लाभ प्राप्त करना- भूमि में बार-बार फसलोत्पादन से मिट्टी व गमलों में उपस्थिति मिट्टी के पोषक तत्व, पौधों व फसलों के रूप में काट दिये जाते हैं।अतः धीरे-धीरे गमलों व भूमि में अधिक उपज देने वाली फसलों की जातियाँ उगाने से मुख्य तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश गमलों व मिट्टी में मिलाएं जाते हैं। भौतिक दशा में सुधार- खाद मिट्टी की भौतिक दशा में सुधार करके भूमि में पोषक तत्वों की उपलब्धि बढ़ाकर उसकी शक्ति में वृद्धि करती है।

उर्वरको में मिलावट की जाँच कैसे करें । Recognize Adulterated Fertilizers
उर्वरको में मिलावट की जाँच कैसे करें । Recognize Adulterated Fertilizers

खेती-किसानी मे प्रयोग किए जाने वाले कृषि निवेशो में उर्वरक सबसे महँगा कृषि आदान है, जिसका फसल उत्पादन बढाने में 15-50 प्रतिशत का योगदान रहता है। अनेक क्षेत्रों में उर्वरकों की सीमित उपलब्धता और काला बाजारी से स्तरहीन उर्वरकों की बिक्री आदि के कारण कुछ उर्वरक विनिर्माता फैक्ट्रियों तथा विक्रेताओं द्वारा नकली एवं मिलावटी उर्वरक बनाकर बाजार मे बेचने लगते हैं। बहुधा किसान भाई को शिकायत रहती है की भरपूर खाद-उर्वरक उपयोग करने के बावजूद भी उपज में वांछित बढोत्तरी अर्थात मुनाफा नही हो रहा है। इसकी प्रमुख वजह घटिया-स्तरहीन उर्वरको का प्रयोग ही है। यह सच है की घटिया या मिलावटी उर्वरको के उपयोग से फसलों के उत्पादन मे गिरावट आती है। उर्वरक उपयोग से वांछित लाभ तभी मिल सकता है जब उनमे पोषक तत्वों की सही मात्रा उपलब्ध हो। अतः किसान भाईओं को बाजार में उपलब्ध उर्वरकों का परीक्षण कर उर्वरक क्रय करना चाहिए, जिससे मिलावट की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है ।

गुणवत्ताहीन और मिलावटी रसायनिक उर्वरक खेतों की उर्वरा शक्ति को लील रहा है। जैविक उर्वरक की किल्लत के कारण किसान उर्वरकों की सही पहचान नहीं कर पाते और स्तरहीन उर्वरक का उपयोग करते हैं। इसके कारण मिहनत व खर्च के बाद भी उन्हें बेहतर उत्पादन नहीं मिल पाता है। और मिट्टी की उर्वरता का ह्रास होने के कारण उत्पादन क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है। मिलावटी उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी के बंजर होने का खतरा भी बढ़ रहा है। मिट्टी में मौजूद कार्बनिक अम्ल और पोषक तत्व का ह्रास होने के कारण उर्वरता प्रभावित हो रही है।
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पश्चिम बंगाल व झारखंड की सीमा से कटिहार जिले में नकली व मिलावटी खाद-बीज का कारोबार फलता फूलता रहा है। इसके साथ ही उर्वरकों में मिलावट कर इसकी रिपैकिग कर बाजार तक पहुंचाया जाता है। इसमें एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। इस बात का खुलासा कई बार छापेमारी और जांच के दौरान हो चुका है। पूर्व में शहर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र सहित मनसाही, फलका आदि स्थानों पर मिलावटी उर्वरक तैयार करने का भंडाफोड़ हो चुका है।

पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में चलता है धंधा

खेती के मौसम में बिना अनुज्ञप्ति के खाद बीज की दुकानों का संचालन होता है। इन दुकानों में स्तरहीन बीज व उर्वरक की बिक्री अधिक मुनाफा के लिए की जाती है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण नेटवर्क के सहारे इसे बाजारों में खपाया जाता है। जबकि किसान असली व नकली में फर्क नहीं कर पाते और ठगी के शिकार हो रहे हैं। बता दें कि मिलावटी और नकली उर्वरकों की पहचान के लिए सेंट्रल फर्टिलाइजर क्वालिटी कंट्रोल एंड टेस्टिग इंस्टीच्यूट द्वारा टेस्ट कीट विकसित किया गया है। इसके माध्यम से मिलावटी उर्वरकों की पहचान की जा सकती है। लेकिन ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में आज भी यह कीट किसानों की पहुंच से दूर है।

मिलावटी उर्वरको को कैसे पहचाने । How to recognize adulterated fertilizers

प्रमुख उर्वरकों मे सामान्य पदार्थो र्की मिलावट । Adulteration of common substances in major fertilizers

– उर्वरक मिलावटी पदार्थ
– यूरिया साधारण नमक, म्यूरेट, आफ पोटाश
– डी.ए.पी. सुपर फास्फेट, राक फास्फेट, एन.पी.के.मिश्रण, चिकनी मिट्टी
– सुपर फास्फेट क्ले मिट्टी, जिप्सम की गोलियाँ
– एम.ओ.पी. बालू, साधारण नमक
– जिंक सल्फेट मैग्नीशियम सल्फेट

मिलावटी उर्वरकों के पहचान की विधियाँ । Methods of detection of adulterated fertilizers

1.यूरिया-46 % नत्रजन –

यह प्रमुख पोषक तत्व नत्रजन प्रदान करने वाला उर्वरक है जिसमे 45-46 प्रतिशत नत्रजन तत्व पाया जाता है। कृषि क्षेत्र में सबसे अधिक मात्रा में इस उर्वरक का उपयोग किया जाता है। प्रतिवर्ष फसल बोआई के समय यूरिया की बाजार में कमी देखी जाती है जिसके कारण कई विक्रेता घटिया अथवा मिलावटी यूरिया किसानो को बेच देते हे जिससे किसान को बांछित लाभ नही हो पाता है। अतः यूरिया खाद खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच करना उचित होता है। यूरिया के सुधिकरण की जाँच निम्न प्रकार से की जा सकती है।

1. शुद्ध यूरिया चमकदार, लगभग समान आकार के दाने वाला, पानी में पूर्णतया घुल जाना, घोल को छूने पर शीतल की अनुभूति, गर्म तवे पर रखने से पिघल जाना, आँच (लौ) तेज करने पर कोई अवशेष न बचना, आदि सामान्य बातें हैं।

2. एक ग्राम यूरिया (उर्वरक) परखनली में लें तथा 5 मिली. आसुत जल मिलायें और पदार्थ को घोलें एवं 5-6 बूँद सिल्वर नाइट्रेट घोल मिलायें, दही जैसा सफेद अवशेष का बनना यह प्रदर्शित करता है कि पदार्थ मिलावटी है। किसी भी अवशेष का न बनना शुद्ध यूरिया को बताएगा।

3. एक चम्मच यूरिया परखनली में लें तथा पिघलने तक गर्म करें, ठंडा होने पर 1 मि.ली.पदार्थ पानी में घोलें तथा बूँद-बूँद कर 1 मि.ली. बाई यूरेट घोल मिलाये,गुलाबी रंग आता है, तो यूरिया शुद्ध है और यदि गुलाबी रंग नहीं आता है तो समझें मिलावट है।

4. हथेली पर थोड़ा पानी लें, 2 मिनट बाद जब हथेली और पानी का ताप अनुरूप (एकसा) हो जाये तब 10-15 दानें यूरिया के डालें, शुद्ध यूरिया का घोल स्वच्छ होगा, यदि सफेद अवशेष आता है तो यूरिया मिलावटी है।

2. डाय अमोनियम फॉस्फेट (डी.ए.पी .) -18 % नत्रजन व 46% फॉस्फोरस –

यह यूरिया के बाद सर्वाधिक मात्रा में उपयोग में लाया जाने वाला महत्वपूर्ण उर्वरक है जिसमे 18 % नत्रजन और 46 % फॉस्फोरस पाया जाता है। इसके सुधिकरण की जांच निम्नानुसार की जा सकती है।

1. सामान्यतः शुद्ध डी.ए.पी. के दानो का आकार एकदम गोल नहीं होता, डी.ए.पी. के दानो को गर्म करने या जलाने पर दाने साबूदाने की भांति फूलकर लगभग दोगुने आकार के हो जायें तो वह शुद्ध होगा। डी.ए.पी. के दानों को लेकर फर्श पर रखें, फिर जूते के तले से रगड़ें, शुद्ध डी.ए.पी. के दाने आसानी से नहीं टूटेते, यदि आसानी से टूट-फुट जायें तो डी.ए.पी. में मिलावट है।

2. डी.ए.पी.में नाइट्रोजन की जाँच के लिए 1 ग्राम पीसे डी.ए.पी. में चूना मिलायें, सूँघने पर यदि अमोनिया की गंध आती है तो डी.ए.पी. में नाइट्रोजन उपस्थित है यदि नही तो डी.ए.पी. मे मिलावट हो सकती है।

3. एक ग्राम पिसा नमूना परखनली में लें, 5 मि.ली. आसुत जल (डिस्टिल्ड वाटर ) मिलायें और हिलायें, फिर 1 मिली. नाइट्रिक अम्ल मिलायें,फिर हिलायें, यदि यह घुल जायें एवं घोल अर्ध-पारदर्शी हो जायें तो डी.ए.पी. शुद्ध है यदि कोई पदार्थ अघुलनशील बचता है, तो मिलावट है।

4. एक ग्राम पिसा हुआ नमूना लें तथा 5 मि.ली. आसुत जल में घोलें, हिलाये, फिल्टर पेपर से छाने, उस फिल्ट्रेट में 1 मिलीलीटर सिल्वर नाइट्रेट घोल मिलायें, पीले अवक्षेप का बनना । जो 5-6 बूँद नाइट्रिक एसिड को मिलाने पर घुल जाये तो पदार्थ मे फास्फेट उपस्थित है और डी.ए.पी. शुद्ध है। यदि अवक्षेप सफेद है तो मिलावट है।

3.म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (एम.ओ.पी.)- 60 % पौटाश –

अधिकाँश भारतीय मिट्टियो में पोटाश तत्व की कमी नही रहती है फिर भी संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए नत्रजन और फॉस्फोरस के साथ पोटेशियम युक्त उर्वरक मसलन म्यूरेट ऑफ़ पोटाश देने की अनुसंशा की जाती है। इसकी सुधता की परख निम्नानुसार की जा सकती है।

1. एक ग्राम उर्वरक परखनली में लें, 5 मिली आसुत जल मिलायें व अच्छी तरह हिलायें अधिकांश उर्वरक धुल जाये तथा कुछ अघुलनशील कण पानी की सतह पर तैरें तो शुद्ध पोटाश (एम.ओ.पी.) होगी, यदि अधिकांश अघुलनशील पदार्थ परखनली के तले पर बैठ जाये तो समझे उर्वरक मे मिलावट है।

2. शुद्ध पोटाश (एम.ओ.पी.) पानी में पूर्णतया घुलनशील, रंगीन पोटाश (एम.ओ.पी.) का लाल भाग पानी पर तैरता है यदि ऐसा है तो पोटाश (एम.ओ.पी.) शुद्ध है अन्यथा नहीं, शुद्ध पोटाश (एम.ओ.पी.) के कण नम करने पर आपस में चिपकते नहीं।

3. एक चम्मच उर्वरक को 10 मिली,जल में घोंले, निथरे भाग से 2 मि .ली.घोल में 2 मि.ली. तनु

हाइड्रो क्लोरिक एसिड का घोल मिलायें, इसमे 1 मि.ली. बेरियम क्लोराइड मिलाने पर यदि स्वच्छ घोल बनता है तो उर्वरक शुद्ध है और यदि सफेद अवक्षेप है तो समझे मिलावट है।

4. सिंगल सुपर फास्फेट (एस .एस . पी .)-16 % फॉस्फोरस –

नत्रजन के बाद दूसरा आवश्यक पोषक तत्व है तथा फसलो की उपज बढाने में कारगर सिद्ध हो चूका है। इसकी सुधता की जांच निम्नानुसार की जा सकती है।

1. दानेदार पाउडर, काला भूरा आदि रंगों में से एक दाना हथेली पर रगड़ने से आसानी से टूट जाये तो शुद्ध है।

2. 1 ग्राम उर्वरक परखनली में लें, 5 मिली. आसुत जल मिलायें तथा अच्छी तरह हिलाये और छानें तथा 5-6 बूँद सिल्वर नाइट्रेट घोल मिलायें यदि पीला यदि पीला अवक्षेप है एवं घुल जाये तो फास्फेट की उपस्थिति है, यदि नहीं तो पदार्थ संदिग्ध है।

3. आधे चम्मच उर्वरक को 5 मिली. आसुत जल में घोलें, ऊपरके निथरे भाग को दूसरी परखनली में लेकर 15-20 बूँदें सिल्वर नाइट्रेट के घोल को मिलायें, हल्का दूधिया अवक्षेप प्राप्त होता है, इसमें 2-3 बूँद तनु कास्टिक सोडा मिलाने पर पीला अवक्षेप आता है तो उर्वरक शुद्ध है यदि ऐसा नहीं होता तो शुद्ध समझें।

5. जिंक सल्फेट –

सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक प्रदान करने वाला यह उर्वरक है। धान-गेंहू फसल चक्र वाले क्षेत्रो में इस तत्त्व की कमी देखी जा रही है। इसकी सुधता की जांच निम्नानुसार की जा सकती है।
1. एक ग्राम उर्वरक परखनली में लें, 5 मि .ली . आसुत जल मिलायें, अच्छी तरह हिलायें, फिल्टर पेपर में छाने 8-10 बूँद तनु सोडियम हाइड्राक्साइड का घोल मिलायें, सफेद पदार्थ बनता है, तब 10-12 बूंदें सांद्र सोडियम हाइड्राक्साइड घोल मिलायें अगर अवक्षेप घुल जायें तो पदार्थ शुद्ध है अन्यथा नहीं।

2. पानी में घुलनशील लेकिन इसका घोल यूरिया या एम.ओ.पी. की तरह ठंडा नही होता तो शुद्ध पदार्थ है।

3. डी.ए.पी. के घोल मे जिंक सल्फेट के घोल को मिलाने पर थक्केदार घना अवक्षेप बन जाता है, जबकि मैग्नीशियम सल्फेट के साथ ऐसा नहीं होता।

घरेलू नुस्खे से भी कर सकते हैं नकली खादों की पहचान –

यूरिया :

किसान खेती के लिए यूरिया का सर्वाधिक प्रयोग करते हैं। यह सामान्यत : चमकदार और समान आकार वाला होता है। पानी में डालने पर यह पूरी तरह घुल जाता है। गर्म तवा पर डालने पर यह पूरी तरह पिछलता है। इसके साथ ही किसान हथेली पर पानी रखकर इसमें यूरिया के दाने डालकर इसकी पहचान कर सकते हैं। इसे रगड़ने पर असली यूरिया से ठंडक महसूस होती है, जबकि मिलावटी यूरिया में ठंडक नहीं होती।

डीएपी :

डीएपी के दाने पूरी तरह गोल नहीं होते हैं। साथ ही इसे गर्म करने पर यह साबूदाने की तरह फूलकर दोगुने आकार का हो जाता है। साथ ही असली डीएपी का दाना आसानी से नहीं फूटता। जबकि मिलावटी डीएपी का दाना आसानी से फूट जाता है।

एमओपी :

किसान एमओपी का भी भरपूर प्रयोग करते हैं। इसकी पहचान के लिए एक ग्राम उर्वरक को परखनली में रखकर पांच एमएल आसुत जल मिलाने पर अधिकांश उर्वरक घूल जाते हैं। जबकि मिलावटी उर्वरक पानी की सतह पर बैठ जाता है। शुद्ध एमओपी के कण नमी के बाद भी आपस में नहीं चिपकता है।

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