टमाटर की उन्नत खेती कैसे करें (how to tomato farming in hindi )

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टमाटर की उन्नत खेती कैसे करें

टमाटर की उन्नत खेती – टमाटर एक बहुउपयोगी सब्ज़ी है।विटामिन,ओर्गानिक एसिड व खनिज लवणों से भरपूर इस सब्ज़ी का उपयोग हम पूरे वर्ष करते हैं। आपके नन्हें लाड़ले जब टिफ़िन फ़िनिश नही करते, तब जिस केचप का लालच देकर लंच फ़िनिश कराया जाता है वह टमाटर से ही बनता है। नूडल्स आजकल हर वर्ग व आधुनिकता की पहचान बन गयी है। उसमें पड़ने वाली चटनी या सास भी टमाटर से ही तैयार की जाती है।

how to tomato farming in hindi

इस तरह टमाटर का उपयोग सब्ज़ी के अलावा अन्य तमाम रूपों में जैसे सलाद,केचप,सूप के रूप में भी किया जाता है। किसान भाईं टमाटर की खेती को नगदी फ़सल के रूप में उगाकर लाखों रुपए कमा सकते हैं । साथ ही टमाटर की उन्नत खेती से  बिग बास्केट जैसी ऑनलाइन शोपिंग मॉल के अफ़िलिएट बनकर लाखों-करोड़ों कमा सकते हैं । आप सभी के मेल्स हमें नियमित प्राप्त होते रहते हैं जिसमें टमाटर की खेती कैसे करें ? टमाटर की उन्नत खेती से कैसे कमाई करें ? टमाटर की खेती वैज्ञानिक तकनीक से कैसे करें ? या फिर टमाटर की उत्पादक तकनीक के बारे में जानकारी माँगी जाती है। तो आइए आज जानते टमाटर की उन्नतशील खेती के बारे में पूरी जानकारी –

 

टमाटर का परिचय –

वानस्पतिक नाम – Lycopersicon Esculentum
          कुल – Solaneceae
गुणसूत्रों की संख्या – 2n = 24
उत्पत्ति स्थल – पेरू व मैक्सीकन (अमेरिका) भारत में टमाटर पुर्तगालियों द्वारा लाया था ।

टमाटर में पोषक मूल्य – १०० ग्राम टमाटर में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा के लिए तालिका देखें –

 

पोषक तत्व का नाम
पोषक तत्व की मात्रा (ग्राम में)
प्रोटीन 1.9 g
कार्बोहाइड्रेट 3.6 g
लोहा 1.8 mg
थियामीन 0.07 mg
राइबोफ़्लेविन 0.01 mg
क्लोरीन 38.00 mg
विटामिन सी 31.00 mg
विटामिन ए 320 IU
ताँबा 0.19 mg
पोटेशियम 11400 mg
कैलोरी 23

 

जलवायु व तापमान –

वानस्पतिक दृष्टिकोण से टमाटर एक जलवायु का पौधा है। किंतु आजकलटमाटर की उन्नत खेती ठंडे स्थानों में भी सफलतापूर्वक की जाती है। व्यवसायिक रूप से टमाटर की खेती के लिए 18 – 27 सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त होता है। सामान्य से कम तापमान में टमाटर के उत्पादन व फलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

 

उन्नत क़िस्में –

अगेती क़िस्में – बीएसएस 90,एचएम 102,हिसार अरुण,हिसार लालिमा,हिसार ललित,कृष्णा,के०एस० 2, नवीन,पूसा अर्ली डवार्फ,पूसा संकर २,पूसा रूबी,पूसा उपहार,रजनी,रूपाली,

मध्यमी व पिछेती क़िस्में – अर्का सौरभ,अर्का विकास,एआरटीएच 3,अविनाश 2,को०3, एचएस 110,सेलेक्शन 12,हिसार अनमोल,मतरी,पूसा 120,पंजाब छुहारा,पंत बहार,पूसा दिव्या,रश्मि,रत्ना

 

भूमि का चयन –

टमाटर की उन्नत खेती से अधिकतम लाभ लेने के लिए टोमट उचित जल निकास वाली व जीवांश पदार्थों से भरपूर मृदा का चुनाव करना चाहिए। इसके अलावा टमाटर की खेती,रेतीली दोमट व लाल व काली मिट्टी, में भी सफलतापूर्वक की जाती है। टमाटर की खेती 7- 8.5 पीएच मान वाली मृदाओं में भी जा सकती है।

 

भूमि की तैयारी –

टमाटर की उन्नत खेती से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद कल्टीवेटर से 2 से 3 जुटाइयाँ करें । अगर कल्टीवेटर की उपलब्धता ना होने पर आप हैरो का भी प्रयोग कर सकते हैं। हर जुताई के बाद पाटा चला दें ताकि जुताई के दौरान निकले ढेले टूट जाएँ । और भूमि समतल हो जाए।

 

बीज की मात्रा –

300-400 ग्राम बीज/प्रति हेक्टेयर

टमाटर की खेती हेतु पौधशाला का निर्माण व नर्सरी तैयार करना –

टमाटर की नर्सरी हेतु 250 वर्ग मीटर स्थान पर्याप्त होता है। जिस स्थान पर पौधशाला का निर्माण करना हो। उसमें जुताई कर 7.5 मीटर *1.2 मीटर*0.1 मीटर की क्यारियाँ बना लें। इसके बाद क्यारियों को धूप खाने के लिए एक सप्ताह के लिए छोड़ दें। ऐसा करने से रोगनाशक जीवों का नाश हो जाता है । इस प्रक्रिया को सौरीकरण या SOLARIZATION कहा जाता है। फिर

अब 4 kg/वर्ग मीटर की दर  से गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डालकर मिट्टी में मिला दें। बीज को बुवाई से पूर्व 2g/kg की दर से बाविस्टीन या थीरम से उपचारित करें। साथ ही फ़ार्मएलडीहाइड के 10%  घोल से मृदा को भी उपचारित कर लें ताकि आर्द्रपतन यानी दैंपिंग ओफ का ख़तरा ना हो। शाम के समय बीजों की बुवाई कर क्यारियों को धान के पुआल या गन्ने की पत्तियों से धक दें। बीजों के अंकुरण के बाद क्यारियों से पुआल हटा दें। फ़व्वारे से सुबह के समय क्यारियों में सिंचाई करें । बुवाई के एक से डेढ़ माह बाद पौध रोपाई हेतु तैयार हो जाती है।

रोपाई का समय –

टमाटर की रोपाई का समय जलवायु व तापमान पर निर्भर करता है।

उत्तर भारत में –

शरद ऋतु – अक्टूबर – नवम्बर

बसंत ऋतु – जनवरी – फ़रवरी

 

दक्षिण भारत में –

वर्षा ऋतु – जून – जुलाई

शरद ऋतु – अक्टूबर – नवम्बर

बसंत ऋतु – जनवरी – फ़रवरी

 

अंतरण व दूरी –

पौध से पौध की दूरी 60 सेंटीमीटर

कतार से क़तार की दूरी – 45 सेंटीमीटर

किसान भाई ध्यान रखें निराई –

गुड़ाई व अन्य कृषि क्रियाएँ जिसमें यंत्रों का प्रयोग होना है । संकर क़िस्मों में अंतरण निम्न रखें-

पौध से पौध की दूरी – 90 सेंटीमीटर

कतार से क़तार की दूरी – 30 सेंटीमीटर

पौध उपचारित करना –

टमाटर के पौधों को रोपाई से पूर्व ड़ाईथेन एम 45 की 2% मात्रा से उपचारित कर लेना चाहिए।

टमाटर की रोपाई करना –

टमाटर के पौधों की रोपाई किसान शाम के समय अथवा ठंडे मैसम में करें ताकि पौधे धूप से न मरें। रोपाई के बाद खेती में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। सिंचाई के दौरान जो पौधे उखाड़ गये हों उन्हें पुनः रोपित कर दें। ऐसा करने से गैपिंग की समस्या ना होगी।

खाद व उर्वरक –

टमाटर की खेती से अधिकतम व गुणवत्ता पूर्ण उपज खाद व उर्वरक पर निर्भर करती है। मिट्टी की जाँच के बाद ही उर्वरक का प्रयोग उचित रहता है। मृदा रिपोर्ट कार्ड के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें। अगर मृदा परीक्षण ना हुआ हो तो नाइट्रोजन 120 किलोग्राम, फ़ोस्फोरस 60 किलोग्राम व पोटाश 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से देना चाहिए। टमाटर की खेती में जैव उर्वरक जैसे गोबर की खाद,स्लज,नीम की खली आदि का प्रयोग लाभकारी होता है। नाइट्रोजन की मात्रा को दो बराबर भागों में बाँटकर एक भाग पौधों के बढ़वार के समय व दूसरी मात्रा पौधों में फूल व फल लगते समय दें।

सिंचाई  व जल निकास प्रबंधन –

टमाटर की फ़सल में 8 से 12 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहें। पानी की खपत बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा आजकल बौछारी सिंचाई व ड्रिप सिंचाई की सिफ़ारिश की जाती है।

खरपतवार नियंत्रण –

टमाटर की फ़सल पर नमी के कारण कई प्रकार के खरपतवार उग आते हैं जिनकी रोकथाम के लिए निराई कर खरपतवार का नियंत्रण करना चाहिए। निराई – गुड़ाई करते समय पौधों की जड़ों पर मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए । ताकि पौधों की जड़ें बाहर ना निकलें। खरपतवार के नियंत्रण हेतु किसी भी खरपतवार नाशी यथा – पेंडिमिथालिन १ किलोग्राम सक्रिय अवयव को रोपाई के ४५ दिन बाद उपयोग करें । यह रसायन खरपतवारों को नष्ट कर देगा।

फ़सल सुरक्षा प्रबंधन –

कीट सुरक्षा प्रबंधन – प्याज़ की खेती देखें ।
रोग सुरक्षा प्रबंधन – प्याज़ की खेती देखें ।

फलों की तुड़ाई –

टमाटर की तुड़ाई आवश्यकता के अनुरूप की करें – आमतौर पर टमाटर पका हर,या गुलाबी होने पर या फिर लाल और अधिक पके अवस्था में की जाती है। टमाटर को मार्केटिंग हेतु अगर किसी दूर जगह भेजना हो तो अधपके गुलाबी टमाटरों की तुड़ाई करना उत्तम रहता है। वहीं अगर टमाटर की बीज उत्पादन की दृष्टिकोण तुड़ाई करना हो तो ख़ूब पके हुए लाल फलों का चुनाव करना चाहिए। सलाद व सब्ज़ी के लिए हल्के लाल अथवा गुलाबी फलों की तुड़ाई करना चाहिए ।

उपज –

किसी भी फ़सल की उपज भूमि की उपजाऊ शक्ति, जलवायु व तापमान,उन्नत क़िस्म,व फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है – सामान्यत : उन्नत क़िस्मों से 250-300 व संकर क़िस्मों से 500-600 कुन्तल प्रति हेक्टेयर टमाटर की पैदावर प्राप्त हो जाती है।

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