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Saturday, December 5, 2020
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खरबूज़ा की उन्नत खेती कैसे करें (kharbooja ki kheti kaise kare)

खरबूज़ा की उन्नत खेती कैसे करें (kharbooja ki kheti kaise kare)

गर्मियों के मौसम आते ही हमारे मन में रसीले स्वाद वाले मीठे ख़रबूज़े की तश्वीर आने लगती है। यह अपने मिठास व बेहतरीन स्वाद के लिए लोकप्रिय है। इसके कच्चे फलों की सब्ज़ी भी बनती है। हल्का मीठा व रस से भरपूर ख़रबूजा हाईडरेटिंग की समस्या को दूर करता है। cucumis melo कुकमिश मेलो वानस्पतिक नाम से वनस्पतिक जगत में जाना जाने वाला ख़रबूज़ा कुकरबिटेसी कुल का पौधा होता है। अगर हम गुणसूत्रों की बात करें तो 24 जोड़े गुणसूत्र पाए जाते हैं।ईरान की गर्म घाटियों व भारत का पश्चिमी भाग को ख़रबूज़ा के जन्मस्थान माना जाता है।

खरबूज़ा की उन्नत खेती कैसे करें (kharbooja ki kheti kaise kare)
खरबूज़ा की उन्नत खेती कैसे करें (kharbooja ki kheti kaise kare)

देश के कई राज्यों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। उत्तर प्रदेश,बिहार,राजस्थान, दिल्ली आदि में व्यवसायिक रूप से उगाया जाता है इसके साथ-साथ दक्षिण भारत में भी ख़रबूज़ा की खेती अब की जाने लगी है।

कद्दू,ककड़ी और लौकी जैसी सब्ज़ियों के कुल का होने के नाते ख़रबूज़ा का फल लम्बी-लम्बी बेल व लताओं पर लगता है। गोल व आयताकार आकृति वाले ख़रबूज़ा के फल विटामिन a, विटामिन b, के साथ – साथ फोलिक एसिड व फ़ाइबर खनिज लवणों से भरपूर होते हैं।

ख़रबूज़ा का फल औषधीय गुणों से भरपूर होता है –

ख़रबूज़ा का फल वज़न घटाने में सहायक है (muskmelon helps in weight loss), ख़रबूज़ा हमें कैंसर से भी बचाता है (muskmelon in cancer in hindi) , मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभदायक है ख़रबूज़ा (muskmelon benefits for diabetics in hindi), दिल व आँखों के लिए (muskmelon benefits for heart and eyes ), ख़रबूज़ा का सेवन है फेफड़ों के लिए अच्छा (muskmelon good for lungs in hindi), महिलाओं के लिए मासिक धर्म के ऐंठन से राहत दिलाए ख़रबूज़ा,(kharbooja fruits for pregnancy),गठिया के लिए भी ख़रबूज़ा बहुत लाभकारी होता है। ख़रबूज़ा का उपयोग बालों के लिए लाभकारी होता है (muskmelon benefits for hair)  पाचन तंत्र के लिए भी ख़रबूज़ा फ़ायदेमंद होता है (kharbooja benefits for digestion in hindi)

तरबूज़ की खेती (tarbooj ki kheti) कैसे करें, तरबूज़ की उन्नत खेती की तकनीक

खेती किसानी डॉट ओर्ग में आइए आज बात करते हैं ख़रबूज़ा की खेती के बारे में, हमारे किसान भाई गूगल पर खोजते रहते हैं ख़रबूज़ा की उन्नत खेती, kharbooja ki unnat kheti, ख़रबूज़ा उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक (muskmelon production techniques) ।

तो आइए शुरू करते हैं –

जलवायु (climate and temperature) –

ख़रबूज़ा एक गर्म व शुष्क जलवायु वाला पौधा है। इसके बीजों के अंकुरण के 27 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान की ज़रूरत होती है। इसके फल को पकने व मिठास के लिए गरम लू जलवायु उपयुक्त होती है। ठंड व पाला इसकी पौधों व बढ़वार के लिए बहुत क्षति पहुँचाता है।

 

भूमि व भूमि की तैयारी (soil and soil preparation ) –

ख़रबूज़ा की खेती के लिए 6 से 7 पीएच माँ वाली उचित जल निकास युक्त भूमि उपयुक्त होती है। जीवांश युक्त रेतीली दोमट भूमि ख़रबूज़ा की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होती हैं ।ख़रबूज़ा की बुवाई के लिए मिट्टी पलटने वाले हल से 2 से 3 जुताई करें। इसके बाद कल्टीवेटर व हैरो से 2-3 जुताई करे। हर जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत को समतल बना लें । बुवाई हेतु क्यारियों व सिंचाई हेतु नालियों का निर्माण कर लें। क्यारियों की चौड़ाई 3-4 मीटर रखनी ठीक होती है।

 

वहीं नदी के तटों पर ख़रबूज़ा की खेती के लिए थाले बना लेते हैं। थाले की गहराई इतनी हो की पानी हल्का-हल्का दिखना चाहिए। इसके बाद क्रमश : काम्पोस्ट खाद 5kg, अरंडी का तेल 100 gram, एसएसपी यानी सिंगल सुपर फ़ास्फ़ेट 25 gram व मयूरेट ओफ़ पोटाश 30 gram  सभी का मिश्रण बनाकर भर दें ।

 

उन्नत क़िस्में (improved varities )-

 

क्रम संख्या क़िस्म का नाम गुण, व क़िस्म का विवरण उपज
1 अर्का राजहंस फल गोल,थोड़े अंडाकार, 1.5-2.0 kg वजन वाले 28-30 टन/हे0
2 दुर्गपुरा मधु अगेती क़िस्म,500-600 ग्राम के फल,मीठे 15-20 टन/हे0
3 पूसा मधु रस फल गोल,हल्का गूदा नारंगी, रसदार 15-18 टन/हे0
4 हरा मधु गूदा हल्का रसीला,अत्यंत मीठा, 13 – 15 टन/हे0
5 अर्काजीत गूदा सफ़ेद, फल नारंगी,300-500 15-20 टन/हे0
6 पूसा शरबती फल गोल,हरी धारियों व जालीदार फल, 16-18 टन/हे0
7 पूसा रसराज फल गोल,छिलका हरा,गूदा हरा, रसीला, 18-20- टन/हे0
8 पंजाब सुनहरी अगेती क़िस्म, फल गोल व दीर्घ वृत्तीय, 16-18 टन/हे0
9 पंजाब रसीला फल गोल,छिलका हरा, घना रसीला, मीठा 16-18 टन/हे0

 

बुवाई का समय (sowing time ) –

वैसे तो बुवाई का समय स्थान विशेष पर निर्भर करता है जैसे यदि आप नदियों के किनारे बुवाई करने जा रहे हैं तो थाले में ख़रबूज़े की बुवाई नवम्बर – जनवरी तक, वहीं उत्तरी मैदानी भागों में समतल खेतों में फ़रवरी से मार्च के प्रथम सप्ताह तक, तथा दक्षिणी भारत में दिसम्बर-जनवरी में करनी चाहिए। अगर आप पहाड़ी स्थानों पर ख़रबूज़ा की खेती करना चाहते हैं तो इसे 15 अप्रैल से उगाना शुरू करें। इसके अलावा जहाँ पर पाला का प्रभाव ना के बराबर हो जैसे पश्चिमी बंगाल,बिहार, वहाँ पर नवम्बर -दिसम्बर में बुवाई करें।

बीज की मात्रा (seed rate) –

ख़रबूज़ा की उन्नत खेती के लिए स्वस्थ, बराबर आकार वाला, सुडौल, अच्छी क़िस्म का 2-3 किलोग्राम बीज एक हेक्टेयर के लिए पर्याप्त होता है।

 

बीज अंतरण (spacing ) –

अच्छी उपज लेने के लिए ख़रबूज़ा की खेती करने वाले प्रगतिशील किसान साथी

लाइन से लाइन की दूरी – 180-240 सेमी0 व

थाले से थाले की दूरी –   60-120 सेमी0 रखें । इस प्रकार बुवाई करने पर पौधों की वधवर के लिए पर्याप्त स्थान मिलेगा। जिससे उपज बढ़ जाएगी।

 

बुवाई का तरीक़ा (sowing methods )

ख़रबूज़ा की बुवाई के लिए इसके बीजों को बुवाई के 12 घंटे पूर्व पानी में भिगोकर रख दें। ऐसा करने से बीजों में अंकुरण शीघ्र होता है। खेती किसानी डॉट ओर्ग की टीम द्वारा देखा गया है कि कुछ किसान साथी ख़रबूज़ा की बुवाई हल के कूड़ों (furrow) में करते हैं। हमारा उनसे निवेदन है अच्छी उपज लेने के लिए थाले बनाकर नालियों में बुवाई करें। थाले की चौड़ाई 90 सेमी0 व गहराई 10 सेमी0 होनी चाहिए।

नदी किनारे बुवाई करने वाले किसान 3 से 4 बीज थाले में डाले। अंकुरण के बाद तीन से चार पत्तियाँ आने पर थाले में 2 स्वस्थ पौधे को छोड़कर बाक़ी पौधों को उखाड़ दें ।

 

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