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Thursday, November 26, 2020
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trichoderma ke fayde – ट्राइकोडर्मा कल्चर से दोगुना पैदावार बढ़ाएँ

kheti kisani me trichoderma ke fayde – खेती किसानी में ट्राइकोडर्मा कवक के फ़ायदे जानकर आप अचरज में ज़रूर पड़ जाएँगे । ट्राइकोडर्मा के खेती में प्रयोग करने के बेशुमार लाभ हैं । ट्राइकोडर्मा एक कवक यानी फ़ंगस है । यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण एवं कृषि की दृष्टि से उपयोगी है। इसका प्रयोग प्रमुख रूप से रोगकारक जीवों की रोकथाम के लिये किया जाता है। ट्राइकोडर्मा फसलों में विभिन्न प्रकार की कवक जनित बीमारियों को रोकने में कारग़र है।

 Garden friendly fungi – केचुये की तरह किसानो का दोस्त होता है ट्राईकोडमा

ट्राइकोडर्मा न सिर्फ़ फसलों की पैदावार बढ़ता है । बल्कि कवक से फसलों से होने वाली बीमारियों को भी ख़त्म करता है । खेतों की मिट्टी में कई कवक यानी फफूँदी की बहुत की प्रजातियाँ पायी जाती है । जिसमें कुछ फसलों में बीमारी पैदा करती करती हैं । जिसे शत्रु फफूँदी कह सकते है ।

trichoderma ke fayde – read full article about trichoderma benefits in kheti kisani

खेती में ट्राइकोडर्मा के फायदे व उत्पादन तकनीक - trichoderma ke fayde
खेती में ट्राइकोडर्मा के फायदे व उत्पादन तकनीक – trichoderma ke fayde

वहीं फफूँदी की ऐसी प्रजाति भी होती है जो फसलों व मिट्टी के लिए लाभदायक होती हैं । ऐसी फफूँदी को मित्र फफूँदी कह सकते हैं । इन्हें आप केचुये की तरह यह Garden friendly fungi है । उन्ही मित्र फफूँदी में एक है ट्राइकोडर्मा Trichoderma की 6 प्रजातियाँ की खोजी जा चुकी हैं । लेकिन सिर्फ़ दो प्रजातियाँ ही मृदा में सबसे ज़्यादा मिलती है । इनमें से एक है – ट्राईकोडर्मा विरिडी व दूसरी ट्राईकोडर्मा हर्जीयानम ।

Trichoderma – ट्राइकोडर्मा अरोगकारक मृदोपजीवी कवक है जो प्रायः कार्बनिक अवशेषों पर पाया जाता है kheti me trichoderma ke fayde समझने के लिए हमें ट्राइकोडर्मा के काम करने के ढंग को समझना होगा । यह पौधों के जड़ों के विन्यास क्षेत्र में रहता है । पौधें की जड़ों के विन्यास क्षेत्र को राइजोस्फियर कहा जाता है । मिट्टी में अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए लगातार कड़ा परिश्रम करते हैं । ट्राईकोडरमा पौधे के बॉडीगार्ड का काम करता है । यह पौधें की नर्सरी की अवस्था से बड़े होने तक फफूँदजनित बीमारियों से रक्षा करता रहता है । ट्राइकोडर्मा के व्यवहार के कारण जैविक खेती में जैव कवकनाशी के रूप में इसका प्रयोग किया जाने लगा है ।

खेती में ट्राइकोडर्मा के फायदे व ट्राइकोडर्मा उत्पादन तकनीक के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें – trichoderma ke fayde in hindi

खेतों में रासायनिक कीटनाशक व दवाओं से जहां स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है वहीं मिट्टी के गठन पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है । खेतों में जैव कवक नाशी के रूप में kheti me trichoderma ke fayde के रूप में बड़ा फ़ायदा यही है कि इस जैव रसायन से बिना केमिकल रहित अनाज व सब्ज़ी व फल उगाए जा सकते हैं ।

साथ ही मिट्टी के कणों का गठन भी सुधरता है । जिससे मिट्टी में जल धारण की क्षमता बढ़ती है । सिंचाई के साथ साथ साल भर में हज़ारों रुपए फसलों की बीमारियों की रोकथाम हेतु जो खर्च होते हैं वो भी हम बचा सकते हैं । ट्राइकोडर्मा का जैव कवकनाशी के रूप में इस्तेमाल ईकोफ़्रेंडली है । इसका अभी तक कोई साइड इफ़ेक्ट देखने को नही मिला है ।

kheti me trichoderma ke fayde –

खेती में ट्राइकोडर्मा के प्रयोग से लाभ ही लाभ

– Trichoderma रोगकारक जीवों को नष्ट करता है जिससे पौधे निरोगी रहते हैं और अच्छी बढ़वार करते हैं ।
– यह पौधों के इम्यून सिस्टम को बढ़ाता है, पौधे में रोग प्रतिरोधी क्षमता के कारण रासायनिक दवाओं विशेषकर कवकनाशी पर खर्च कम हो जाता है ।
– पौधों में रोगकारकों के विरुद्ध तंत्रगत अधिग्रहित प्रतिरोधक क्षमता (सिस्टेमिक एक्वायर्ड रेसिस्टेन्स) की क्रियाविधि को सक्रिय करता है।
– लगातार रासायनिक खादों व दवाइयों के प्रयोग से दूषित हो गयी मिट्टी का बायो उपचार (bio remediation) भी होता है ।
– मिट्टी में पौधों की पत्तियों फसलों के अवशेष व सड़े – गले कार्बनिक पदार्थों की अपघटन की क्रिया में तेज़ी लाता है । यह अपघटक जैव उर्वरक बनकर पौधे में एंटीऑक्सीडेंट रेट को बढ़ाता है । जिससे पौधें में रोग कम लगता है ।
– Trichoderma पौधे में micro nutrition elements- सूक्ष्म पोषक तत्वों को घुलनशील Trichoderma का रिज़ल्ट सब्ज़ी वाली फसलों में अच्छा पाया गया है। – ऑरगेनोक्लोरिन, ऑरगेनोफास्फेट एवं कार्बोनेट समूह के कीटनाशकों के समूह को Trichoderma करता है । जिससे मिट्टी की संरचना में सुधार होता है ।
– Trichoderma के कारण पौधे के आस-पास गहरी जड़ वाली घास उग आती है । जिससे पानी संचयन क्षमता बढ़ती है । और पौधों में नमी काफ़ी समय तक बनी रहती है ।
टमाटर की खेती में टमाटर के फलों में nutrition quality मसलन फल में खनिज तत्व और एंटीऑक्सीडेंट अपेक्षाकृत अधिक पायी गयी । जिससे पौधों की वृद्धि बढ़ती है और फलों की गुणवत्ता भी अच्छी होती है ।

Trichoderma production technologgy –

घर पर ट्राईकोडरमा कल्चर बनाने की विधि
Trichoderma बनाने की विधि बहुत सरल है, Trichoderma उत्पादन तकनीक को एक बार समझने के बाद इसे घर पर ही बनाया जा सकता है । ट्राइकोडर्मा कवक बनाने के बारे में पूरी जानकारी आपको खेती किसानी के इस आलेख में दी जाएगी

Materials required to make trichoderma –

ट्राइकोडर्मा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
– 28-30 किलो गोबर के कंडे जो गिनती में ये 85-90 होंगे । जिसे कुछ स्थानों पर उपले भी कहा जाता है । अपनी स्थानीय भाषा के हिसाब से इसे समझ लें ।
– हाईक्वालिटी का ट्राइकोडर्मा कल्चर -(उच्च गुणवत्ता वाला शुद्ध ट्राईकोडरमा कल्चर से बेस्ट ट्राईकोडरमा तैयार होता है ।)
जूट के पुराने बोरे ( ये आमतौर पर घर पर ही मिल जाते हैं )
– प्लास्टिक के दस्ताने (कंडे के मिश्रण व ट्राईकोडरमा कल्चर को कंडे के ढेर में अच्छे से मिलाने के लिए )

Rural domestic method of production of Trichoderma-

ट्राइकोडर्मा के बनाने की ग्रामीण घरेलू विधि
गोबर के कंडो को किसी छायादार स्थान पर कूट कर बिलकुल बारीक कर लें । फिर कंदों के बारीक मिश्रण में ट्राइकोडर्मा के उत्पादन की ग्रामीण घरेलू विधि में कण्डों (गोबर के उपलों) का प्रयोग करते हैं। खेत में छायादार स्थान पर उपलों को कूट- कूट कर बारिक कर देते हैं। कंडे को भली प्रकार बारीक कर लें । कूटने के बाद जो गाँठे रह जाएँ उसे दस्ताने पहनकर हाथों से मसल कर बारीक कर लें । बारीक मिश्रण में पानी का छिड़काव कर फिर उसे हाथों से मिलाएँ ताकि उसमें नमी आ जाएँ । पानी मिलाने व मसलने के बाद कंडे का मिश्रण गाढ़ा भूरा रंग का दिखने लगेगा ।

इसके बाद ट्राइकोडर्मा शुद्ध कल्चर 60 ग्राम मात्रा को उसी कंडे के ढेर में मिला दें । ट्राईकोडरमा कल्चर को अच्छे ढंग से कंडे के मिश्रण में मिला दें । अब आपने 100 फ़ीसदी काम पूरा कर लिया है । अब ढेर को पुराने जूट के बोरे से ढक कर कुछ दिन के लिए छोड़ दें । ढेर में नमी बनाए रखने के लिए समय समय पर उनके पानी का छिड़काव करते रहें । 2 सप्ताह में ढेर के बोरे हटाकर एक बार फिर से फावड़े से मिलाएँ ।
पानी का छिड़काव करके फिर उसे बोरों से धक दें । लगभग 20-22 दिनो में हरे रंग की फफूँद दिखने लगेगी । यही है ट्राइकोडर्मा । महीने भर में ये पोर तरह हरी दिखायी देनें लगेगी । अब ट्राइकोडर्मा तैयार हो गया है । अब इसका इस्तेमाल का भूमि शोधन के लिए कर सकते हैं । इस तरह से आप घर पर ही बड़ी आसानी से सस्ते व उच्च गुणवत्ता युक्त ट्राइकोडर्मा का उत्पादन कर सकते है। तैयार ट्राइकोडर्मा का कुछ भाग कच्चे माल के लिए बचा कर रख दीजिए यह दुबारा ट्राइकोडर्मा बनाने के लिए मदर कल्चर के रूप प्रयोग कर सकते हैं । जिसके लिए आपको बाज़ार से ट्राइकोडर्मा कल्चर नही ख़रीदना पड़ेगा । आपके पैसे भी बचेंगे ,

How to use trichoderma culture-

ट्राईकोडर्मा कल्चर के प्रयोग के तरीके
ट्राइकोडर्मा को कैसे इस्तेमाल करना है यह जानकारी होना बहुत ज़रूरी है । ट्राइकोडर्मा के इस्तेमाल की अच्छी जानकारी होने पर ही आप kheti me trichoderma ke fayde ले सकेंगे । ट्राइकोडर्मा का प्रयोग भूमि उपचार, बीज उपचार, पर्णीय छिड़काव, व जड़ उपचारित करने में किया जाता हैं । ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल पादप रोग प्रबंधन में किया जाता है । इसके प्रयोग से जड़गलन विगलन,अदरक का प्रकंद विगलन,चुकन्दर का आद्रपतन,दलहनी व तिलहनी फसलों से उकठा रोग,दलहनी व तिलहनी फसलों से उकठा रोग,का उपचार किया जाता है । बीज के उपचार के लिये 5 ग्राम पाउडर प्रति किलो बीज में मिलाते  हैं । यह पाउडर बीज में चिपक जाता है  बीज को भिगोने की जरूरत नहीं है क्योंकि पाउडर में कार्बक्सी मिथाइल सेल्यूलोज मिला होता है। बीज के जमने के साथ.साथ द्राइकोडर्मा भी मिट्टी में चारो तरफ बढ़ता है और जड़ को चारों तरफ से घेरे रहता है जिससे कि उपरोक्त कोई भी कवक आसपास बढ़ने नहीं पाता। जिससे फसल के अन्तिम अवस्था तक बना रहता है।

Method of soil treatment with Trichoderma –

ट्राइकोडर्मा से भूमि शोधन करें
चलिए बात करते हैं ट्राइकोडर्मा से मिट्टी को उपचारित करने की, मिट्टी में ही तमाम तरह की Harmful fungus and bacteria होते हैं । जो पौधों को रोगी बनाते हैं । खेत को शोधित करने के लिए गोबर की खाद जिसे farm yard manure भी कहा जाता है । इसकी 25 किलोग्राम मात्रा में ट्राइकोडर्मा की किलोग्राम मात्रा अच्छी प्रकार मिक्स करके छाया वाली जगह पर स्पोर जमने के लिए रख दें । 7-10 दिन में स्पोर जम जाते है । 10 दिन बाद इसको खेत की मिट्टी में मिला दें । इसके अलावा 150 पाउडर को चार से पाँच सेमी गहराई पर एक घन मीटर मिट्टी में भी मिला दें । इसके बाद बुवाई कर करें । ट्राइकोडर्मा पौधे की जड़ों के आसपास एक ईको बना लेता हैं । जिससे कवक जनित रोग पौधे को नुक़सान नही पहुँचा पाते ।

Seed priming by trichoderma-

बीज उपचारित करने से मिलता है अधिक लाभ
इसके लिए सबसे पहले गाय के गोबर का गारा या घोल (स्लरी – Slurrygation) बना तैयर कर लें । इसक इसके लिए गाय का गोबर व गोमूत्र सबको मिला लिया जाता है । इस तरह गाय के गोबर का गारा या स्लरी तैयार हो जाता है । फिर हर लीटर स्लरी के हिसाब से 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा मिला दें । अच्छे से हिलाकर मिक्स कर दें । इसके बाद एक किलोग्राम बीज को उसी घोल में मिलाकर बीज शोषित करें बीज को घोल के बाहर निकाल कर छाया में सुखाने के लिए रख दें । अनाज, दलहन और तिलहन फसलों की बुवाई से पहले इस तरह से Seed treatment कर लेना चाहिए । Language of agriculture में इस तरह बीज बोने से पहले खास तरह के घोल की बीजों पर परत चढ़ाकर छाया में सुखाने की प्रक्रिया को सीड प्राइमिंग कहा जाता है।

trichoderma most effective Foliar spraying-

पत्तियों पर पर्णीय छिड़काव से करें रोगों का सफ़ाया
हमारी फसलों पर कुछ ऐसे रोग होते हैं जो भूमि के शोधन व बीज को उपचारित करने के बाद भी फसलों पर हो जाते हैं । इसके फसल पर लक्षण दिखने पर तुरंत ट्राइकोडर्मा का पौधों की पत्तियों पर छिड़काव करें । इसके लिए 5 से 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे मशीन से पर्णीय छिड़काव करें । ट्राइकोडर्मा के लीफ़ स्प्रे से पौधों में लगने वाले कुछ खास तरह के रोगों जैसे पर्ण चित्ती, झुलसा आदि की रोकथाम की जा सकती है ।

How to treat root with Trichoderma-

ट्राइकोडर्मा से रोपे जाने वाले कंद व जड़ उपचार करने का आसान तरीक़ा
रोपे जानी वाली फसलों व पौधों को आप ट्राइकोडर्मा से जड़ शोधित कर बीमारियों से बचा सकते हैं । इसके लिए 10 से 20 लीटर पानी में 250 ग्राम ट्राइकोडर्मा मिलाकर घोल बना लें । उसके बाद प्रत्यरोपित किए जाने वाले कंद (राइजोम), जड़ों , अथवा कलम को इस घोल में आधे घंटे तक डुबाने के बाद ये उपचारित हो जाएँगे । अब इन्हें खेत में लगाएँ ।

precautions when using trichoderma-

ट्राइकोडर्मा के इस्तेमाल से जुड़ी ज़रूरी कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखें
– kheti me trichoderma ke fayde के लिए ट्राइकोडर्मा के इस्तेमाल से पहले कुछ कंडीशन भी हैं । इनको समझना बहुत ज़रूरी है । अन्यथा kheti me trichoderma ke fayde की जगह नुक़सान अथवा मनमाफ़िक लाभ नही मिलेगा ।
– ट्राइकोडर्मा के विकास एवं अस्तित्व के लिए उपयुक्त नमी बहुत आवश्यक है इसलिए trichoderma के इस्तेमाल से पहले देख लें की मिट्टी सूखी ना हो ।
– जिस खेत में आपने ट्राइकोडर्मा का डाली हो उस खेत में एक सप्ताह तक कोई भी फ़ंगीसाइड या फफूँदीनाशक का इस्तेमाल ना करें ।
– अगर आप ट्राइकोडर्मा से बीज को उपचारित कर रहे हैं तो ध्यान रखें की सूर्य की किरणें उस पर सीधें ना पड़ें । एक बात और ट्राइकोडर्मा से उपचारित गोबर की खाद अधिक दिनो के लिए न रखें । मसलन चार छ: महीने तक अन्यथा यह उतनी असरदार नही रह जाएगी । उपचारित गोबर की खाद का इस्तेमाल अधिकतम 3-4 माह तक करना अच्छा रहता है ।

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