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Sunday, December 6, 2020
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करी पत्ता की खेती या मीठी नीम की खेती कैसे करें

मीठी नीम जिसे करी पत्ता के नाम से जानते हैं यह संगधीय श्रेणी का पौधा है । करी पत्ता का वैज्ञानिक नाम मुर्राया कोएनिगी (Murraya koenigii) है । आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दें करी पत्ता का कुल रूटेऐसी है । करी पत्ता वृक्ष मूल रूप से भारत और श्रीलंका में पाया जाता है। समान्यत: यह हिमालय के क्षेत्र, आसाम, चटगाँव में पाया जाता है।

Read full About Meethi Neem ki Kheti – Curry Patta ki Kheti

करी पत्ता की खेती या मीठी नीम की खेती कैसे करें
करी पत्ता की खेती या मीठी नीम की खेती कैसे करें

करी पत्ता का पेड़ कैसा होता है

यह एक ऐसा वृक्ष है जिसकी पत्तियों से तीखी सुरभित खुशबू आती है। यह भारत के प्रायद्दीपीय क्षेत्र के सदाबहार और पर्णपाती जंगलो में पाया जाता है। करी पत्ता ( meethi neem curry tree ki kheti in hindi ) के पत्तों को अधिकतर रसेदार व्यंजनों में प्रयोग किया जाता है । इसलिए इसके पत्तों को करी पत्ता (meethi neem curry tree ki kheti in hindi) व पेड़ को करी पेड़ के नाम से भी जाना जाता है | कुछ स्थानों पर इसकी पत्तियों को मीठी नीम की पत्तियां भी कहा जाता है |

इस वृक्ष के प्रत्येक हिस्से से एक तीव्र विशिष्ट गंध आती है। कन्नड़ भाषा में इसे काला नीम भावार्थ से पुकारते हैं |
किसान भाइयों एक बात यहाँ पर स्पष्ट तौर खेती किसानी डॉट ओर्ग अपने पाठकों को बता देना चाहता है । कि इस पौधे का किसी भी तरह का सम्बन्ध नीम के पेड़ से नही है | मैदानी इलाको के लोग विशेष रूप से दक्षिण भारत के लोग इस पौधो की पत्तियों का उपयोग विभिन्न प्रकार की करी तैयार करने में मसालों के रूप करते है। इसकी सुगंधित पत्तियो के लिए खेती की जाती है। यह संपूर्ण भारत में लगभग 1500 मीटर की ऊचाँई तक पाया जाता है।

हमारे देश के बुन्देलखंड प्रान्त में यह पत्ता कढ़ी या करी नामक व्यंजन बनाने में भी उपयुक्त होता है। हालांकि कढ़ी पत्ते (meethi neem curry tree ki kheti in hindi) का सबसे अधिक उपयोग रसेदार व्यंजनों में होता है । पर इनके अलावा भी अन्य कई व्यंजनों में मसाले के साथ इसका इस्तेमाल किया जाता है | करी पत्ता की पत्तियों को पीस कर चटनी भी तैयार की जाती है। जिसे लोग बहुत स्वाद से खाते हैं |

करी पत्ता की खेती या मीठी नीम की खेती कैसे करें ? ( curry patta ki kheti meethi neem ki kheti kaise kare ) हेल्थ कांसेस लोग जिन्हें स्वास्थ्य की विशेष फ़िक्र रहती है | मीठी नीम के पत्तों को सलाद में भी प्रयोग करते हैं | साऊथ इन्डियन व श्री लंका व्यंजनों के छौंक में, खासकर रसेदार व्यंजनों में, बिलकुल तेज पत्तों की तरह, इसकी पत्तियों का उपयोग किया जाता है | मीठी नीम या करी पत्ता पेड़ मुराया कोएनिजी (Murraya koenigii) की पत्तियों का आयुर्वेदिक चिकित्सा में जड़ी-बूटी के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इनके औषधीय गुणों में ऐंटी-डायबिटीक (anti-diabetic), ऐंटीऑक्सीडेंट (antioxidant),ऐंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial), ऐंटी-इन्फ्लेमेटरी (anti-inflammatory), हिपैटोप्रोटेक्टिव (hepatoprotective), ऐंटी-हाइपरकोलेस्ट्रौलेमिक (anti-hypercholesterolemic) इत्यादि शामिल हैं। लम्बे बाल की चाहत रखने वाली लड्कियों व महिलाओं के लिए कढ़ी पत्ता बहुत लाभकारी माना जाता है।

करी पत्ता के पेड़ का वानस्पतिक स्वरूप (curry leaves)

यह एक फैलने वाली झाड़ी है। तना गहरे हरे से लेकर भूरे रंग का होता है जिसमें असंख्य बिन्दु बने होते है। मुख्य तने की परिधि लगभग16 से.मी. होती है। मीठी नीम की पत्तियाँ 30 से.मी. लंबी होती है | साथ ही प्रत्येक पर24 पत्रक होते है। मीठी नीम के पत्रक भाले के आकार के लगभग 4.9 से.मी. लंबे, व लगभग 1.8 से.मी. के चौड़े होते हैं | इसके डंठल की लम्बाई लगभग0.5 से.मी. होती है |

मीठी नीम (करी पत्ता ) की खेती कैसे करें ? (Meethi Neem Curry tree ki kheti in hindi
मीठी नीम में पुष्पं 15 अप्रैल से प्रारम्भ होकर 15 मई तक समाप्त होते हैं | इसके फूल उभयलिंगी, सफेद कीप के आकार और मीठी सुगंध वाले होते है। एक पूर्ण खिले हुये फूल का औसत व्यास लगभग 1.12 से.मी. होता है। 15 मई के बाद मीठी नीम में फलन प्रारम्भ होती है | मीठी नीम के फल फल आयताकार लगभग 1.4 से 1.6 से.मी. लंबे, 1 से 1.2 से.मी. व्यास के होते हैं | इनका वजन लगभग 880 मिलीग्राम होता है | परिपक्व फलों की सतह बहुत चमकीली के साथ काले रंग की होती है | मीठी नीम में फलों की संख्या प्रति समूह32 से80 होती है साथ ही बीज 11 मिमी लंबे और8 मिमी व्यास के होते है। मीठी नीम के प्रत्येक फल में एक बीज होता है जो11 मिमी लंबा औप8 मिमी व्यास का होता है। मीठी नीम का पौधा लगभग2.5 मीटर ऊँचाई बढ़ता है |kheti kisani में आज करी पत्ता की खेती या मीठी नीम की खेती (meethi neem curry tree ki kheti in hindi) के बारे में जानकारी देंगे ।

जलवायु व तापमान –

मीठी नीम (curry leaves) का पौधा एक उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु का पौधा है इसकी बढवार उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु में सबसे अच्छी होती है | पूर्ण सूर्य की रोशनी के साथ इसे गर्म तापमान की आवश्यकता होती है। मीठी नीम करी पत्ता पौधे को समुद्र तल से1000 मी. की ऊँचाई पर भी उगाया जा सकता है।

भूमि की जानकारी (bhumi jankari) –

करी पौधा की खेती (kadi patta) के लिए उपजाऊ छिद्रयुक्त व उचित जल प्रबन्धन वाली दोमट भूमि उपयुक्त होती है | मीठी नीम के लिए चयनित मृदा में जल ग्रहण करने की क्षमता होनी चाहिए | भूमि का पीएच 6 से 7 के बीच होना चाहिए |

भूमि की तैयारी –

मीठी नीम की खेती (kadi patta ki kheti) के लिए खेत को 2 से 3 जुताइयाँ कर हर जुताई के बाद पाटा चलाकर खेत को समतल कर लेना चाहिए | खेत को ढेले रहित व भुरभुरा बना लेना चाहिए |

फसल पद्धति की जानकारी –

मीठी नीम के पौधे रोपाई के लिए बीजों के द्वारा आसानी से उगाया जा सकता है। इस प्रकार उत्पादन बहुतायत से होता है। बीजों को गूदे से अच्छी प्रकार निकल कर साफ़ करें रोपाई के समय किसान भाई ध्यान दें की मीठी नीम के बीजों को उनके आकार की गहराई तक लगाना चाहिए, ताकि उनमें अंकुरण शीघ्र हो |

खाद व उर्वरक khad and fertilizer –

खेत की तैयारी के समय मिटटी में 250-300 कुंतल सड़ी गोबर की खाद सामान रूप से खेत में मिला देना चाहिए |इसे वैसे तोअधिक उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती है। किन्तु पौधे के विकास के दौरान सप्ताहिक रूप में उर्वरक देना अच्छा रहता है |

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सिंचाई जल निकास व खरपतवार प्रबंधन –

मीठी नीम का पौधा अधिक जलमांग वाला पौधा है | किसान भाई गर्मियों के दिनों में फसल पर नियमित रूप से सिंचाई अवश्य करें | वहीँ सर्दियों में किसान भाई हल्की सिंचाई करें पर ध्यान रहे इस समय उर्वरक बिलकुल नही दें | सिंचाई के बाद भूमि नम हो जाती है | अब निराई गुड़ाई करना चाहिए | निराई गुड़ाई कर खरपतवार को निराई कर फसल से निकाल देना चाहिए | साल में1-2 बार निराई की आवश्यकता होती है। निराई करते समय पौधों पर मिटटी चढ़ा दें ताकि जड़े खुली न रहें |

तुड़ाई व फ़सल कटाई का समय harvesting –

मीठी नीम के पौधे में जब पर्याप्त वानस्पतिक विकास हो जाये | मीठी नीम के पौधे की शाखाओं में पत्तियाँ पूर्ण विकसित हो जाएँ | मीठी की नीम की तुड़ाई किसान भाई कर सकते हैं | वैसे तो आवश्यकता पड़ने पर इसकी पत्तियों को किसी भी समय तोडा जा सकता है | परिपक्व व बड़ी पत्तियों की तुड़ाई तोड़ना हाथ से करनी चाहिए | अविकसित पत्तियों की तुड़ाई किसान न करें | ऐसी पत्तियों की तुड़ाई अगले चक्र में करें |

सुखना drying –

मीठी नीम तोड़ी गयी सभी संपूर्ण पत्तियों को इकट्ठा करके छायादार जगह में सुखा लें | पातियों को पलटते रहें जिससे की पत्तियां सड़ने न पायें अन्यथा उनकी गुणवत्ता प्रतिकूल असर पड़ता है | बाजार में ऐसी पत्तियों का उचित दाम भी नही मिल पाता | साथ ऐसी पत्तियों से बनाएं चूर्ण में भी अन्य स्वस्थ पत्तियों से बनाये गये चूर्ण के बराबर खुशबू व गुणवत्ता नही होती है |

पैकेजिंग (packaging) –

मीठी नीम या करी पत्ता की पत्तियों की पैकेजिंग हेतु वायुरोधी थैले आदर्श व सर्वोत्तम माने जाते हैं | करी पत्ता की पत्तियों को पालीथीन या नायलाँन के थैलों में पैक किया जाता बाजार में भेजने के लिए तैयार तैयार किया जाता है |

भंडारण (storage) –

मीठी नीम की पत्तियों को शुष्क स्थान में भंडारित करना चाहिए। करी पत्ता की पत्तियों का भंडारण गोदाम भंडारण सर्वोत्तम होता है | कोल्ड स्टोरेज इसके लिए उपयुक्त नही होते |

परिवहन (transportation) –

किसान भाई अपनी सुविधा के अनुसार उत्पाद को बैलगाड़ी या टैक्टर से बाजार तक पहुंचाता है | वैसे बड़े क्षेत्रफल के उत्पादकों के लिए एजेंसियां अथवा व्यापारी सीधे खेत से लोडर अथवा ट्रक व ट्रैक्टर के माध्यम से ट्रांसपोर्ट कर लेते हैं | दूरी अधिक होने पर उत्पाद को ट्रक या लाँरियो के द्वारा बाजार तक पहुँचाया जाता हैं। परिवहन के दौरान चढ़ाते एवं उतारते समय मीठी नीम की पत्तियां अच्छी पैकेजिंग होने पर खराब नहीं होती |

अन्य मूल्य परीवर्धन (other value additions)

– करी पत्ता चूर्ण (curry leave powder)

आशा है आपको kheti kisani का यह आर्टिकल करी पत्ता की खेती या मीठी नीम की खेती कैसे करें ? ( curry patta ki kheti )अवश्य पसंद आया होगा ।

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