मूंगफली की खेती की| मूंगफली की उन्नत फसल उत्पादन तकनीक

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भारत के विभिन्न हिस्सों में उगाई जाने वाली एक प्रमुख फसल है। क्योंकि मूंगफली मानव के आहार का एक बहुत प्रमुख हिस्सा है मूंगफली की खेती तिलहनी फसलों में आती है भारत में लगभग मूंगफली का उत्पादन 75 से 85 प्रतिशत हिस्सा तेल के रूप में प्रयोग किया जाता है।

Peanut Farming | Groundnut Farming Technology in hindi

100 ग्राम मूंगफली के दानों से हमें 26 ग्राम प्रोटीन तथा 20 से 25 ग्राम तेल और 48 से 50 ग्राम वसा प्राप्त होती है।

मूंगफली की खेती की| मूंगफली की उन्नत फसल उत्पादन तकनीक 1

मूंगफली की प्रजातियां | Peanut स्पेशज

मूंगफली की जायद फसल के लिए प्रमुख प्रजातियां – आईसीजीएस-1, आर-9251, टीजी37, आर-8808, आईसीजीएस-44, डीएच-86

मूंगफली हेतु जलवायु

मूंगफली के लिए अर्ध-उष्ण जलवायु अधिक उपयुक्त होती है| सूर्य की अधिक रोशनी और उच्च तापमान इसकी बढ़वार एवं पैदावार के लिए अनुकूल हैं|

उपयुक्त भूमि

मूंगफली को हल्की से लेकर भारी भूमियों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है| लेकिन बलुई दोमट भूमि जिसमें जल निकास अच्छा हो तथा प्रचुर मात्रा में कैल्सियम एवं जीवांश मौजूद हों, मूंगफली के लिए सबसे उपयुक्त रहती है| मूंगफली के लिए हल्की अम्लीय भूमि जिसका पी एच मान 6.0 से 6.5 के बीच हो, उपयुक्त होती हैं| जिन भूमियों में ऊसर एवं लवण की समस्या हो या अधिक अम्लीय हो, मूंगफली को बढ़ावा नहीं देना चाहिए|

खेत की तैयारी

खेत की जुताई की संख्या, भूमि की किस्म, फसल चक्र, भूमि में नमी की मात्रा और प्रयोग में आने वाले यंत्र आदि पर निर्भर करती है| आमतौर पर पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद 3 से 4 जुताइयां कल्टीवेटर या देशी हल से करके मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए| खेत में नमी को बनाए रखने के लिए हर जुताई के बाद पाटा लगाना जरूरी है|

दीमक एवं विभिन्न प्रकार के भूमिगत कीड़ों से फसल के बचाव हेतु क्विनलफोस 1.5 प्रतिशत 25 किलोग्राम प्रति हेक्टर की दर से अंतिम जुताई के साथ मिटटी में मिला देना चाहिए साथ में नीम की खली 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का भी प्रयोग करें|

बीज की मात्रा

1. मूंगफली की झुमका किस्मों के बीज की उचित मात्रा 100 से 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है|

2. मध्यम फैलने वाली किस्मों के बीज की उचित मात्रा 80 से 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है|

3. अधिक फैलने वाली किस्मों के बीज की उचित मात्रा 60 से 80 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपयुक्त होती है|

बीजोपचार

1. बुवाई से पूर्व बीज को 2 या 3 ग्राम थिरम या कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाकर उपचार करें|

2. इस उपचार के 5 से 6 घंटे बाद, बीज को एक विशिष्ट प्रकार के उपयुक्त राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें|

3. उपचार हेतु एक टिन के चौड़े बर्तन में 1/2 लीटर पानी लें और उसमें 50 ग्राम गुड़ मिलाकर हल्का सा उबालें, अब पानी को एकदम ठंडा कर लें| फिर इस घोल में 200 से 250 ग्राम राइजोबियम कल्चर मिलाएं| इस तैयार घोल के मिश्रण को 10 किलोग्राम बीज के ऊपर समान रूप से छिड़क कर हल्के हाथ से मिलाएं, जिससे बीज के ऊपर हल्की परत बन जाए|

4. उपचार के बाद बीज को छाया में सुखायें तथा शीघ्र ही बुवाई के लिए उपयोग करें|

बुआई का समय

रबी या जायद- मूंगफली की बुवाई के समय खेत की उपरी 10 सेंटीमीटर सतह का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं होना चाहिए| उत्तरी क्षेत्र में जहां जायद मूंगफली की खेती की जाती है, फरवरी से मार्च में यह अवस्था आती है| जबकि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में नवम्बर से जनवरी तक रबी या जायद मौसम की मूंगफली की बुवाई के लिए उचित तापमान उपलब्ध होता है|

खरीफ- खरीफ मौसम की फसल की बुवाई का उचित समय जून का दूसरा पखवाड़ा है| असिंचित क्षेत्रों में जहां बुवाई वर्षा के बाद की जाती है, जुलाई के पहले पखवाड़े में बुवाई के काम को पूरा कर लें|

बीज की मात्रा

1. मूंगफली की झुमका किस्मों के बीज की उचित मात्रा 100 से 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है|

2. मध्यम फैलने वाली किस्मों के बीज की उचित मात्रा 80 से 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है|

3. अधिक फैलने वाली किस्मों के बीज की उचित मात्रा 60 से 80 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपयुक्त होती है|

बीजोपचार

1. बुवाई से पूर्व बीज को 2 या 3 ग्राम थिरम या कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाकर उपचार करें|

2. इस उपचार के 5 से 6 घंटे बाद, बीज को एक विशिष्ट प्रकार के उपयुक्त राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें|

3. उपचार हेतु एक टिन के चौड़े बर्तन में 1/2 लीटर पानी लें और उसमें 50 ग्राम गुड़ मिलाकर हल्का सा उबालें, अब पानी को एकदम ठंडा कर लें| फिर इस घोल में 200 से 250 ग्राम राइजोबियम कल्चर मिलाएं| इस तैयार घोल के मिश्रण को 10 किलोग्राम बीज के ऊपर समान रूप से छिड़क कर हल्के हाथ से मिलाएं, जिससे बीज के ऊपर हल्की परत बन जाए|

4. उपचार के बाद बीज को छाया में सुखायें तथा शीघ्र ही बुवाई के लिए उपयोग करें|

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बुआई का समय

रबी या जायद- मूंगफली की बुवाई के समय खेत की उपरी 10 सेंटीमीटर सतह का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं होना चाहिए| उत्तरी क्षेत्र में जहां जायद मूंगफली की खेती की जाती है, फरवरी से मार्च में यह अवस्था आती है| जबकि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में नवम्बर से जनवरी तक रबी या जायद मौसम की मूंगफली की बुवाई के लिए उचित तापमान उपलब्ध होता है|

खरीफ- खरीफ मौसम की फसल की बुवाई का उचित समय जून का दूसरा पखवाड़ा है| असिंचित क्षेत्रों में जहां बुवाई वर्षा के बाद की जाती है, जुलाई के पहले पखवाड़े में बुवाई के काम को पूरा कर लें|

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