अनानास की खेती की जानकारी : Pineapple Farming in Hindi

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अनानास ब्राजील मूल का पौधा होता है । यह एक ऐसा फल है जिसको आप कभी भी ताजा काटकर खा सकते है । यह कईं तरह के पोषक तत्वों से भरा हुआ फल है, जो शरीर के अंदर मौजूद कईं तरह के विष को बाहर निकालने का कार्य करता है । इसका तना काफी ज्यादा छोटा होता है और इसकी गांठे काफी ज्यादा मजबूत भी होती है । अनानास का तना प्रायः पत्तियों से भरा हुआ होता है और यह पूरी तरह से गठीला होता है । अनानास में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम भी पाया जाता है और यह शरीर को कई तरह की ऊर्जा भी प्रदान करता है ।

अनानास खाने के फायदे –

अनानास औषधीय गुण वाला फल है । इसके फलों का उपयोग खाने में किया जाता है । ये शरीर के अंदर मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालता है. इसमें क्लोरीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है । साथ ही पित्त विकारों में विशेष रूप से और पीलिया में लाभकारी होता है । ये गले एवं मूत्र रोगों में फायदेमंद होता है. इसके अलावा हड्डियों को मजबूत बनाता है. यह उच्च एंटीआक्सीडेंट का स्रोत है व इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । जिससे यह कैंसर के खतरे को कम करता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है । इससे सर्दी समेत कई अन्य संक्रमण का खतरा कम हो जाता है. इसका इस्तेमाल सलाद, जूस, केक, जैम एवं जैली आदि बनाने में किया जाता है ।

अनानास का जूस पीने के फायदे –

अनानास का जूस हमारी आंखों के लिए बहुत फायदे मंद होता है। अनानास के जूस में पाए जाने वाले विटामिन एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-ए हमारी आंखों के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। अगर इस जूस को लगातार पीया जाता है तो आंखों को होने वाली कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। इस जूस के आंखों की रोशनी में कमी नहीं आती। अनानास के जूस में ब्रोमेलैन नाम का तत्व पाया जाता है, जिससे पेट में होने वाले कई रोगों से छुटकारा मिलता है। इस जूस से दस्त और पेट फुलने की समस्या से राहत मिलती है। साथ ही इस जूस से पाचन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। इस जूस में एंजाइम्स पाया जाता है जो प्रोटीन को डाइजेस्ट करने में मदद करता है। यह जूस वजन घटाने में भी कारगर होता है।
इस जूस में वसा नहीं पाई जाती और कैलोरी भी कम होती है। इसके लगातार सेवन करने से वजन कम होता है। इस जूस को पीने से हड्डियों को मजबूती मिलती है। इसको पीने से हड्डियों में सूजन नहीं आती। जूस में पाया जाने वाला विटामिन-सी और पोटेशियम त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे चेहरे पर मुंहासें, पींपल्स और काले धब्बों को कम करने में बहुत मदद मिलती है। डॉक्टरों का कहना है कि इसके पीने से चेहरे की मरी हुई कोशिकाएं हट जाती हैं और चेहरे पर चमक नहीं आती। इसको पीने से दांतों पर जमा बैक्टीरिया खत्म होता है। जो लोग अर्थराइटिस से ग्रसित होते हैं उन्हें अनानास का जूस पीने की सलाह दी जाती है। क्योंकि अनानास के जूस में बीटा-कैरोटिन और विटामनन-ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इस जूस को पीने से अस्थमा का खतरा भी कम हो जाता है। इस जूस में एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण होते हैं, जिससे अर्थराइटिस से होने वाले दर्द और सूजन से राहत मिलती है। इस जूस में विटामिन -सी, बीटा-कैरोटिन पाया जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही हृदय रोग होने का खतरा भी कम हो जाता है।

अनानास वृक्षारोपण के लिए अनुकूल जलवायु

पाइनेपल वृक्षारोपण के लिए पर्याप्त वर्षा के साथ एक आर्द्र जलवायु आदर्श है। इस प्रकार की जलवायु तटीय क्षेत्रों में पाई जाती है। इष्टतम तापमान 22 और 32⁰C के बीच होना चाहिए। जबकि पत्तियां 32⁰C पर सबसे अच्छी होती हैं, जड़ें 29 .C में सबसे अच्छी होती हैं। अनानास की फसलें 20 से नीचे और 36 .C से ऊपर के तापमान पर नहीं उगती हैं। दिन और रात के तापमान के बीच 4⁰C का अंतर होना चाहिए। हालांकि, रात में एक उच्च तापमान अनानास के लिए वांछनीय नहीं है। हालांकि पर्याप्त वर्षा अनानास के लिए अच्छी तरह से अनुकूल है, यह 100-150 सेमी बारिश में सबसे अच्छा बढ़ता है। अगर देश की बात करें तो हमारे यहां पर पश्चिमी समुद्री तटीय क्षेत्र और उत्तर पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों में समुद्र तट से 1 हजार से 2 हजार फुट की ऊंचाई पर इसको उगाते है ।

पाइनेपल की खेती जमीन का चयन –

अनानास किसी भी प्रकार की मिट्टी में अच्छी तरह से विकसित हो सकता है । हालांकि रेतीले दोमट सबसे आदर्श है। अनानास की खेती के लिए सबसे बुनियादी आवश्यकता है मिट्टी का अच्छी तरह से सूखा होना। यह भारी में भी विकसित हो सकता है, मिट्टी की मिट्टी प्रदान की जाती है बशर्ते कि मिट्टी में जल निकासी की अच्छी क्षमता हो। Pineapple की खेती के लिए पानी को लॉग करने वाली मिट्टी की सिफारिश नहीं की जाती है। जलोढ़ और लेटराइट अन्य मिट्टी के प्रकार हैं जो अनानास के रोपण के लिए उपयुक्त हैं। अनानास को 5.5 और 6.0 के बीच पीएच के साथ थोड़ी अम्लीय मिट्टी की आवश्यकता होती है।

खेत की तैयारी (Pineapple Farming)

अनानास की अच्छी उपज के लिए खेत से खरपतवार नष्ट कर मिट्टी पलटने वाले से खेत की अच्छी तरह जुताई कर ले. उसके बाद गोबर की सड़ी हुई खाद खेत की मिट्टी में मिलाकर दो से तीन जुताई कल्टीवेटर से कर पाटा जरुर लगा दे । इसके बाद पानी लगाकर खेत का पलेवा कर दे । और खेत की उपरी सतह सूखने के बाद रोटावेटर लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बना ले. उसके बाद पुनः पाटा लगाकर खेत को सत्ताल कर ले ।

अनानास की उन्नत क़िस्में –

क्वीन –

अनानास की इस किस्म को असम, मिजोरम, मेघालय आदि राज्यों में मुख्य रूप से उगाया जाता है. यह बहुत जल्द पकने वाली किस्म है. इसके पौधे आकर में छोटे होते है. इसकी पत्तियों का आकार छोटा होता है. इसका सर दांतेदार होता है. फलों को रंग पकने के बाद पीला होता है. खाने में स्वादिष्ट और फल का वजन दो किलो के आसपास होता है.

जाइंट क्यू –

अनानास की इस किस्म को त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, असम और मिजोरम में मुख्य रूप से उगाया जाता है. इस किस्म के पौधों की पत्तियां चिकनी एवं लम्बी होती है. सिर दांतेदार होता है. फलों का आकार बड़ा होता है. इसके अलावा फल का वजन लगभग 3 किलो तक होता है. अनानास की इस किस्म को पछेती किस्म के रूप में उगाया जाता है.

रैड स्पैनिश-

अनानास की इस किस्म को असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और मेघालय में उगाई जाती है. इस किस्म रोगों का प्रकोप कम होता है. फलों का आकार सामान्य होता है । फलों का बाहरी आवरण कठोर, खुरदरा और पीले रंग का होता है. इसके गूदे में अम्लीय गुण के साथ पीले रंग का होता है. इसको ताजा खाना लाभदायक होता है ।

मॉरिशस –

अनानास की यह किस्म कई राज्यों में उगाई जाती है । यह एक विदेशी किस्म है. जिसकी पत्तियां दातेदार होती है । इसका फल लगभग दो किलो तक होता है. और फल पकने में एक साल के ऊपर का समय लगता है ।

अनानास की व्यावसायिक खेती के लिए विभिन्न किस्में इस प्रकार उपलब्ध हैं। ये टिशू कल्चर के जरिए पैदा होते हैं। क्यु, जिआनट क्यु , सरोलेट रोटचील्ड, कवीन, जलधुप, लखत आदि किस्में अनानास की है।

अनानास की खेती के लिए पौधे तैयार करना – अनानास प्रवर्धन की विधि (Pineapple Farming)

अनानास की पौध इसके पौधों पर बनने वाली शाखाओं से तैयार की जाती है. जिन्हें साइड पुत्तल (सकर), गूटी पुत्तल (स्लिप) और क्राउन के नाम से जाना जाता है । सकर पौधे के जमीन में तैयार होने वाले भाग की पत्तियों को हटाकर तैयार किया जाता है । और स्लिप जमीनी भाग से निकलने वाली शाखाओं से तैयार किया जाता है । जबकि क्राउन फलों पर बनने वाली शाखाओं से तैयार होता है ।

पौध को खेत में लगाने से पहले साफ़ करके उपचारित कर लेना चाहिए । पौध को उपचारित करने से पहले पीली पत्तियां तोड़कर हटा देना चाहिए । उसके बाद बाद बीज को सेरासेन घोल या थीरम से उपचारित कर कुछ समय तक धुप में सूखने के बाद खेतों में उगाना चाहिए । इसके सकर से तैयार पौधों को लगाना अच्छा होता है । क्योकि सकर से लगाए गये पौधे रोपाई के लगभग 15 महीने बाद फल देना शुरू करते है । जबकि स्लिप और क्राउन से लगाए गए पौधे रोपाई के बाद फल देने में 20 से 24 महीने का टाइम लगाते है ।

पौध लगाने समय –

अनानास की पौध लगाने का उपयुक्त समय बरसात के महीने में होता है । जहाँ पर सिंचाई की सुविधा होती है वहां वर्ष के किसी महीने में भी इसको लगाया जा सकता है।

अंतरण – spacing

अनानास के पौध की रोपाई कतारों में की जाती है. इसकी पौध को 45 सेमी० X 45 सेमी० X 75 सेमी० की दूरी पर दुहरी कतारों में लगाना उचित रहता है ।

खाद एवं उर्वरक की मात्रा –

अनानास की अच्छी उपज के लिए आवश्यक उर्वरक की जरुरत होती है. अनानास में सबसे पहले जुताई के समय 200 से 250 कुतंल गोअबर की सड़ी हुई खाद मिट्टी में मिला देना चाहिए. इसके अलावा नाइट्रोजन 16 ग्राम और पोटाश 2.5 ग्राम प्रति पौधा प्रति वर्ष देना चाहिए. नाइट्रोजन के लिए अमोनियम सल्फेट उर्वरक उत्तम है. अनानास की फसल के लिए उर्वरकों को घोल कर उपयोग लाभकारी होता है. उर्वरकों को पौधों के चारो ओर छिटक कर भूमि में मिला देना चाहिए. उर्वरकों की पहली मात्रा रोपाई के 90 दिन बाद देना चाहिए ।
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सिंचाई (Pineapple Farming) –

अनानास की पहली सिंचाई आवश्यतानुसार करे. बरसात के मौसम में लगाने के कारण ज्यादा सिंचाई की जरुरत नही पड़ती है. लेकिन जब भी नमी कम दिखाई दे सिंचाई करना चाहिए.सूखे मौसम में 15 दिन के अंतर पर सिंचाई करनी चाहिए। इसकी सिंचाई करते समय ध्यान रखे सिंचाई धीमे बहाव से करे या ड्रिप सिस्टम को प्रयोग करना लाभकारी होता है । इससे पौधे की जड़े नही उखड़ती है ।

खरपतवार नियंत्रण –

अनानास की खेती में खरपतवार नियंत्रण बहुत ही आवश्यक है इसके लिए आप इसकी फसल की 4 से 5 निराई गुड़ाई कर सकते है. पहली निराई-गुड़ाई 25 से 30 दिन बाद करनी चाहिए. पहली गुड़ाई में पौधे पास के खरपतवार हटाकर मिट्टी को चढ़ा देना चाहिए. बाकि बची हुई निराई-गुड़ाई 25-25 दिन के अंतराल पर करे. साथ ही यह भी ध्यान रखे कि खेत में जबा ज्यादा खरपतवार दिखाई दे तो उसे तुरंत ही साफ़ कर दे.

कीट एवं रोग नियंत्रण –

अनानास की खेती में ज्यादा कीट एवं रोग का प्रकोप नही होता है फिर भी जो मुख्य कीट एवं रोग नुकसान पहुंचाते है वो निम्न वत है-
प्रमुख कीट एवं रोकथाम

अनानास का चूर्णी बग –

इस कीट अर्भक व वयस्क, दोनों ही क्षति पहुंचाते है. ये अनानास की जड़ों, जमीन की सतह वाले भागों एवं पत्तियों व फलों से रस चूसते है. भूमि के उपरी भाग पर प्रकोप करने वाले कीट ज्यादा हानि नही पहुंचाते है. मगर जमीन के नीचे रहने वाले कीट जड़ों को काफी हनी पहुंचाते है. जड़ों को हानि पहुँचाने के साथ-साथ ये अनानास के वायरस जनित रोग, म्लानि को भी फैलाते है.

रोकथाम – इसकी रोकथाम के लिए स्वस्थ कलम ही लगानी चाहिए. तथा कलम लगाने से पूर्व उन्हें एल्ड्रिन के घोल में डूबा लेना चाहिए. पत्तियों पर जमीन से उपरी भागों में इसका प्रकोप होने पर डायजिनान या मोनोक्रोटोफ़ॉस के 0.5 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहिए.

अनानास का स्लग कीट –

इस कीट की ईल्लियाँ ही क्षति पहुंचती है. प्रारम्भिक अवस्था में बहुत सारी इल्लियाँ पत्तियों की निचली सतह पर खुरच कर खाती है. परिणाम स्वरूप पत्तियां सूख जाती है. जब ये बड़ी हो जाती है. तो इस्धर उधर पौधों पर फैल जाती है. और पत्तियों को खा जाती है. छोटे पौधों पर इसका प्रकोप अधिक होता है.

रोकथाम – इसके नियंत्रण के लिए मैलाथियान के 0.5 प्रतिशत का घोल छिड़काव करना चाहिए. कार्बारिल का 0.1 प्रतिशत का घोल भी उपयोगी सिध्द होगा.

अनानास की खेती में लगने वाले प्रमुख रोग एवं रोकथाम –

शीर्ष विगलन –

इस रोग का पौधों और फलों दोनों पर प्रकोप होता है. शीर्ष विगलन की शुरुवाती अवस्था में लगने पर इसके पौधे का विकास बंद हो जाता है. इसके अलावा फलों में लगने से पूरे फल को नष्ट कर देता है.
रोकथाम – इस रोग की रोकथाम के लिए पौधों पर नीम के तेल या काढ़े का छिड़काव करना चाहिए.

जड़ गलन –

अनानास के इस रोग से पौधों में जड़ गलन का शुरू हो जाती है. इस रोग की मुख्य वजह अत्यधिक जलभराव होता है. जिससे पौधे सूखने लगते है ।

रोकथाम – इस रोग से बचाव की रोकथाम के लिए खेत में जलभराव न होने दे. अधिक प्रकोप होने पर बोर्डों मिश्रण का छिड़काव खेत में करना चाहिए.

फलों की तुड़ाई (Pineapple Farming)

अनानास के फलों की तुड़ाई फल पकने पर करनी चाहिए. अनानास की बुवाई से लेकर फल पकने तक लगभग 18 से 20 महीने लग जाते है. फल पकने पर पौधे की पीली पड़ने लगती है और फलों का रंग लाल पीला दिखाई पड़ने लगता है. इसी समय फलों की तुड़ाई कर लेनी चाहिए.

उपज (Pineapple Farming)

अनानास की उपज 40 से 45 टन प्रति हेक्टेयर में प्राप्त हो जाती है. एक हेक्टेयर खेत में लगभग 16 से 17 हजार पौधों लगाये जाते है. जिसमें प्रत्येक पौधे पर एक ही फल लगता है ।
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