पौधों में पोषक तत्वो के कार्य व कमी के लक्षण व निदान

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जिस तरह से हर जीवित प्राणी को जीवित रहने तथा स्वस्थ रहने के लिए पोषक तत्वों की जरूरत होती है । उसी तरह से पौधों को भी अपनी वृद्धि, प्रजनन, तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए कुछ पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों के न मिल पाने से पौधों की वृद्धि रूक जाती है यदि ये पोषक तत्व एक निश्चित समय तक न मिलें तो पौधा सूख जाता है।

फसलोत्पादन मे पोषक तत्वो के कार्य व कमी के लक्षण – Plant Nutrient Functions and Deficiency and Toxicity Symptoms

फसल की अधिकतम पैदावार के लिए आवश्यक पोषक तत्त्व –

वैज्ञानिक परीक्षणो के आधार पर 17 तत्वों को पौधो के लिए जरूरी बताया गया है, जिनके बिना पौधे की वृद्धि-विकास तथा प्रजनन आदि क्रियाएं सम्भव नहीं हैं। इनमें से मुख्य तत्व कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश है। नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश को पौधे अधिक मात्रा में लेते हैं, इन्हें खाद-उर्वरक के रूप में देना जरूरी है। इसके अलावा कैल्सियम, मैग्नीशियम और सल्फर की आवश्यकता कम होती है अतः इन्हें गौण पोषक तत्व के रूप मे जाना जाता है इसके अलावा लोहा, तांबा, जस्ता, मैंग्नीज, बोरान, मालिब्डेनम, क्लोरीन व निकिल की पौधो को कम मात्रा में जरूरत होती है।

फसलोत्पादन मे पोषक तत्वो के कार्य व कमी के लक्षण - Plant Nutrient Functions and Deficiency and Toxicity Symptoms
फसलोत्पादन मे पोषक तत्वो के कार्य व कमी के लक्षण – Plant Nutrient Functions and Deficiency and Toxicity Symptoms

जीवन निर्वाह करने के लिए जीवित सभी प्राणियों को वृद्धि व विकास के लिए कुछ पोषक तत्वों की आवश्कता होती है । पौधों को अपनी वृद्धि, प्रजनन, तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए कुछ पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है । इन पोषक तत्वों के उपलब्ध न होने पर पौधों की वृद्धि रूक जाती है यदि ये पोषक तत्व एक निश्चित समय तक न मिलें तो पौधों की मृत्यु आवश्यम्भावी हो जाती है । खेती किसानी में फसल ख़राब होने से बड़ा नुक़सान उठाना पड़ता है। इस सबसे बचने के लिए समय पर पोषक तत्व खाद व उर्वरक के रूप में खेतों में डालना चाहिए।
इसे भी पढ़ें – पौधों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण ऐसे करें पहचान
पौधे भूमि से जल तथा खनिज-लवण शोषित करके वायु से कार्बन डाई-आक्साइड प्राप्त करके सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अपने लिए भोजन का निर्माण करते हैं । फसलों के पौधों को प्राप्त होने वावली कार्बन-डाई-आक्साइड तथा सूर्य के प्रकाश पर किसान या अन्य किसी का नियन्त्रण सम्भव नहीं हैं लेकिन कृषक फसल को प्राप्त होने वाले जल तथा खनिज-लवणों को नियन्त्रित कर सकता है । वैज्ञानिक परीक्षणो के आधार पर 17 तत्वों को पौधो के लिए आवश्यक निरूपित किया गया है, जिनके बिना पौधे की वृद्धि-विकास तथा प्रजनन आदि क्रियाएं सम्भव नहीं हैं। इनमें से मुख्य तत्व कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन , नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश है। इनमें से प्रथम तीन तत्व पौधे वायुमंडल से ग्रहण कर लेते हैं। नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश को पौधे अधिक मात्रा में ग्रहण करते हैं अतः इन्हें खाद-उर्वरक के रूप में प्रदाय करना आवश्यक है। इसके अलावा कैल्सियम, मैग्नीशियम और सल्फर की आवश्यकता कम होती है अतः इन्हें गौण पोषक तत्व के रूप मे जाना जाता है इसके अलावा लोहा, तांबा, जस्ता, मैंग्नीज, बोरान, मालिब्डेनम, क्लोरीन व निकिल की पौधो को अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है।

पोषक तत्वों की कमी की पहचान – Nutrition deficiency symptoms in plants

क्र.सं0 पोषक तत्व पोषक तत्व की कमी के लक्षण
1. नाइट्रोजन
N
इसकी कमी के लक्षण प्रारंभिक पत्तियों पर दिखना शुरू हो जाते हैं | पत्ती पीली पड़ने लगती हैं , उसकी लचक कम होने लगती हैं और वह कड़ी व छोटी रहती हैं | तनाव के कारण वह तने की ओर खिचनें लगती हैं तथा आसानी से टूट कर गिर जाती हैं , पौधे की वृद्दि रुक जाती हैं |
2. फास्फोरस
P
इसकी कमी के लक्षण भी प्रारंभिक निचली पत्तियों पर दिखतें हैं | पत्ती गहरे हरे रंग की सकरी तथा कड़ी पड़ जाती हैं , शिरायें बैंगनी सी दिखती हैं प्रकाश संश्लेषण की क्रिया धीमी पड़ने से पौधा छोटा व कमजोर पड़ जाता हैं | तना में पर्याप्त कड़ापन नही होता और रस संचार अवरुद्ध होने से पौधे का विकास रुक जाता हैं |
3. पोटाश
K
इसकी कमी के लक्षण भी प्रारंभिक पत्तियों पर दिखाई पड़ते हैं | पत्ती का रंग उतरने लगता हैं , उसके सिरे से लेकर कोरो तक भूरा कत्थई रंग बढने लगता हैं | पत्तियां रस संवहन की कमी से अंदर को मुड़ने लगती हैं और धीरे – धीरे सूख जाती हैं |
पौधे सभी प्रकार के संतुलन जैसे जल संतुलन, रस संतुलन, तापमान संतुलन, तत्व संतुलन, गुरुत्व संतुलन बनाये रखते हैं, जिससे पौधा जड़ तना व पत्तियों के माध्यम से सभी तत्वों को ग्रहण करता हैं |
4. मैग्नीशियम
Mg
इसकी कमी के लक्षण प्रारंभिक पत्तियों के साथ – साथ द्वितीयक पत्तियों पर भी दिखाई देना शुरू होते हैं | पत्तियां शिरे से और कोरों से पीली पड़ती हुई पुरे पत्ते को पीली कर देती हैं | पत्तियों की शिरायें (Veins) फूल जाती हैं तथा रंग उतर जाता हैं | पत्ती का अग्रभाग नीचे को झुक या लटक जाता हैं,पत्ती आसानी से गिर जाती हैं |
5. जिंक
Zn
इसकी कमी के लक्षण द्वितीयक पत्तियों पर दिखते हैं | पत्ती पीली पड़ने लगती हैं, उसकी शिरायें (Veins) हरी दिखती हैं और उन पर भूरे रंग के धब्बे पड़ने लगते हैं, पत्ती शीघ्रता से सूखने लगती हैं |
6. मालिब्डेमन
Mo
इसकी कमी के लक्षण द्वितीयक पत्तियों पर दिखना शुरू होते हैं | पूरी पत्ती रंग उड़े पीले रंग के समान हो जाती हैं, शिराओं (Veins) का हरापन उड़ जाता हैं, केवल उनकी धारी दिखती हैं | शिराओं को छोड़कर पूरी पत्ती पर सुनहला भूरा धब्बा पड़ जाता हैं, जिससे पत्ती के नीचे ऊँगली लगाने पर चिपचिपा पदार्थ सा लग जाता हैं, और पत्ती सूख जाती है |
7. तांबा
(कापर)
Cu
इसकी कमी के लक्षण द्वितीयक पत्तियों के साथ तृतीयक पत्तियों पर दिखता है | पत्ती की शिरायें पूर्णताः गायब हो जाती हैं , पत्ती का रंग नीलाभ पीला हो जाता हैं, और वह तने से नीचे को लटक कर टूट जाती हैं |
8. मैंगनीज
Mn
इसकी कमी के लक्षण द्वितीयक एवं तृतीयक पत्तियों पर दिखाई पड़ते हैं | पत्ती हरिताभ पीली हो जाती हैं और शिराओं (Veins) का पूरा तंत्र – जाल दिखाई देने लगता हैं जो हरे रंग की आभा लिये होती हैं |
9. सल्फर
S
इसकी कमी के लक्षण तृतीयक या ऊपर की नई पत्तियों पर दिखाई देना शुरू होते हैं | पत्ती गंधक का पीलापन लिये पीली हो जाती है, शिरायें (Veins) हल्की हरी पीली आभा लिये होता हैं | गंधक के रंग से मेल खाने के कारण इसकी पहचान आसानी से हो जाती हैं |
10. लोहा
(आयरन)
Fe
इसकी कमी के लक्षण ऊपर की पत्तियों पर दिखाई देना शुरू हो जाते हैं | नई पत्ती हरिताभ पीली (लोहे के हरे रंग) दिखने लगती हैं, शिरायें (Veins) गहरी हरी साफ दिखाई देती हैं, पत्ती कड़ी पड़कर टूट जाती हैं |
11. कैल्शियम
Ca
इसकी कमी के लक्षण कली के नीचे की पत्ती पर दिखाई पड़ते हैं जो कली को संभालती हैं, कली पत्र पीले पड़ने लगते हैं और झुलसकर या सूखकर मुड़ने लगते हैं और कली का अग्रभाग – सूखने लगता है , धीरे – धीरे पूरी कली सूख जाती हैं |
12. बोरान
B
इसकी कमी के लक्षण सीधे पुष्प पर दिखाई पड़ते हैं | मुख्य कलिका का रंग भूरा कत्था पड़ने लगता है, वह शीर्ष से सूखते हुए नीचे की ओर सूखती जाती है और वह मर जाती है |
13. क्लोरीन
Cl
इसकी कमी के लक्षण नई पत्तियों पर आते हैं , पत्ती शीघ्रता से पीली पड़ती जाती है और वह मुरझा कर गिर जाती हैं |
प्राकृतिक तत्व
14. कार्बन
C
यह जीवांश में पाया जाता हैं, इसकी कमी से पूरा पौधा प्रभावित होता हैं मिट्टी कड़ी होने से जड़ो का संचार मिट्टी में पूरी तरह से नही होने से पौधा कमजोर ,पीला व छोटा होता हैं | जैविक खाद से पूर्ति होती हैं |
15. हाइड्रोजन
H
इसकी कमी से नमी का संवहन प्रभावित होता है, पौधे की ऊर्जा कम हो जाती है और तापमान अनियंत्रित हो जाता हैं | पूरा पौधा खिला हुआ नही दिखता | पौधों के बीच उचित अंतर रखना चहिये |
16. आक्सीजन इसकी कमी से पौधे का पूरा जीवन चक्र प्रभावित होता हैं, पौधे का स्वरूप प्रभावित होता हैं,पौधा अच्छा नही दिखता, वातावरण परिवर्तन से जल्दी प्रभावित होकर कमजोर हो जाता है | पुरे खेत में वायु का सही संचार हो पुरे पौधे को तने से पत्ती तक पूरी हवा मिले, पौधों के बीच उचित अंतर रखें |
किसान भाइयो को काफी बारीकी से पौधों की पत्तियों का निरीक्षण कर उचित तत्व की कमी को परख कर उसकी प्रतिपूर्ति मृदा वैज्ञानिक की सलाह से करना चहिये | अपने खेतों पर सतत भ्रमण कर तत्वों की कमी के लक्षणों को चिन्हित करें ताकि मिट्टी में उस तत्व को संतुलित मात्रा में डालकर मृदा को स्वस्थ बनाये रखें

पौधों के लिए आवश्यक महत्पूर्ण पोषक तत्वो के कार्य व कमी के लक्षण प्रस्तुत हैं।

(1) Functions of Nitrogen – नाइट्रोजन (नत्रजन) के प्रमुख कार्य –

नाइट्रोजन (Nitrogen), एक रासायनिक तत्व है । नाइट्रोजन का प्रतीक चिन्ह N है। नाइट्रोजन का परमाणु क्रमांक 7 है। पृथ्वी के वायुमण्डल का लगभग 78% नाइट्रोजन ही है। यह सर्वाधिक मात्रा में तत्व के रूप में उपलब्ध पदार्थ भी है। यह एक रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन और प्रायः अक्रिय गैस है। इसकी खोज 1773 में स्कॉटलैण्ड के वैज्ञनिक डेनियल रदरफोर्ड ने की थी। नाइट्रोजन से प्रोटीन बनती है जो जीव द्रव्य का अभिन्न अंग है तथा पर्ण हरित के निर्माण में भी भाग लेती है । नाइट्रोजन का पौधों की वृद्धि एवं विकास में योगदान इस तरह से है-
यह पौधों को गहरा हरा रंग प्रदान करता है । वानस्पतिक वृद्धि को बढ़ावा मिलता है । अनाज तथा चारे वाली फसलों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है । यह दानो के बनने में मदद करता है ।
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पौधों मे – नाइट्रोजन नत्रजन-कमी के लक्षण -nitrogen deficiency symptoms in plants

पौधों मे प्रोटीन की कमी होना व हल्के रंग का दिखाई पड़ना । निचली पत्तियाँ पड़ने लगती है, जिसे क्लोरोसिस कहते हैं। पौधे की बढ़वार का रूकना, कल्ले कम बनना, फूलों का कम आना। फल वाले वृक्षों का गिरना। पौधों का बौना दिखाई पड़ना। फसल का जल्दी पक जाना, आदि लक्षण पौधे में दिखने लगते हैं।

(2) Functions of phosphorus in plants – फॉस्फोरस के कार्य –

फॉस्फोरस की उपस्थिति में कोशा विभाजन शीघ्र होता है। यह न्यूक्लिक अम्ल, फास्फोलिपिड्स व फाइटीन के निर्माण में सहायक है। प्रकाश संश्लेषण में सहायक है। यह कोशा की झिल्ली, क्लोरोप्लास्ट तथा माइटोकान्ड्रिया का मुख्य अवयव है। फास्फोरस मिलने से पौधों में बीज स्वस्थ पैदा होता है तथा बीजों का भार बढ़ना, पौधों में रोग व कीटरोधकता बढती है । फास्फोरस के प्रयोग से जड़ें तेजी से विकसित तथा सुद्दढ़ होती हैं । पौधों में खड़े रहने की क्षमता बढ़ती है । इससे फल शीघ्र आते हैं, फल जल्दीबनते है व दाने शीघ्र पकते हैं। यह नत्रजन के उपयोग में सहायक है तथा फलीदार पौधों में इसकी उपस्थिति से जड़ों की ग्रंथियों का विकास अच्छा होता है ।

phosphorus deficiency symptoms in plants – फॉस्फोरस-कमी के लक्षण –

इसकी कमी से पौधे छोटे रह जाते हैं, पत्तियों का रंग हल्का बैगनी या भूरा हो जाता है।फास्फोरस गतिशील होने के कारण पहले ये लक्षण पुरानी (निचली) पत्तियों पर दिखते हैं । दाल वाली फसलों में पत्तियां नीले हरे रंग की हो जाती हैं । पौधो की जड़ों की वृद्धि व विकास बहुत कम होता है कभी-कभी जड़े सूख भी जाती हैं । अधिक कमी में तने का गहरा पीला पड़ना, फल व बीज का निर्माण सही न होना। इसकी कमी से आलू की पत्तियाँ प्याले के आकार की, दलहनी फसलों की पत्तियाँ नीले रंग की तथा चौड़ी पत्ती वाले पौधे में पत्तियों का आकार छोटा रह जाता है।
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Functions of potassium in plants – पोटैशियम के कार्य –

1. जड़ों को मजबूत बनाता है एवं सूखने से बचाता है। फसल में कीट व रोग प्रतिरोधकता बढ़ाता है। पौधे को गिरने से बचाता है।
2. स्टार्च व शक्कर के संचरण में मदद करता है। पौधों में प्रोटीन के निर्माण में सहायक है।
3. अनाज के दानों में चमक पैदा करता है। फसलो की गुणवत्ता में वृद्धि करता है । आलू व अन्य सब्जियों के स्वाद में वृद्धि करता है । सब्जियों के पकने के गुण को सुधारता है । मृदा में नत्रजन के कुप्रभाव को दूर करता है।

potassium deficiency symptoms in plants – पोटैशियम-कमी के लक्षण –

पत्तियाँ भूरी व धब्बेदार हो जाती हैं तथा समय से पहले गिर जाती हैं। पत्तियों के किनारे व सिरे झुलसे दिखाई पड़ते हैं। इसी कमी से मक्का के भुट्टे छोटे, नुकीले तथा किनारोंपर दाने कम पड़ते हैं। आलू में कन्द छोटे तथा जड़ों का विकास कम हो जाता है पौधों में प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया कम तथा श्वसन की क्रिया अधिक होती है।

Functions of calcium in plants – कैल्सियम के कार्य

यह गुणसूत्र का संरचनात्मक अवयव है। दलहनी फसलों में प्रोटीन निर्माण के लिए आवश्यक है। यह तत्व तम्बाकू, आलू व मूँगफली के लिए अधिक लाभकारी है। यह पौधों में कार्बोहाइड्रेट संचालन में सहायक है।

calcium deficiency symptoms in plants – कैल्सियम-कमी के लक्षण

नई पत्तियों के किनारों का मुड़ व सिकुड़ जाना। अग्रिम कलिका का सूख जाना। जड़ों का विकास कम तथा जड़ों पर ग्रन्थियों की संख्या में काफी कमी होना। फल व कलियों का अपरिपक्व दशा में मुरझाना।
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Functions of Magnesium in plants – मैग्नीशियम के कार्य-

क्रोमोसोम, पोलीराइबोसोम तथा क्लोरोफिल का अनिवार्य अंग है। पौधों के अन्दर कार्बोहाइड्रेट संचालन में सहायक है। पौधों में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट तथा वसा के निर्माण मे सहायक है। चारे की फसलों के लिए महत्वपूर्ण है।

Magnesium deficiency symptoms in plants – मैग्नीशियम-कमी के लक्षण

पत्तियाँ आकार में छोटी तथा ऊपर की ओर मुड़ी हुई दिखाई पड़ती हैं। दलहनी फसलों में पत्तियो की मुख्य नसों के बीच की जगह का पीला पड़ना।
(6) गन्धक (सल्फर) के कार्य
1. यह अमीनो अम्ल, प्रोटीन (सिसटीन व मैथिओनिन), वसा, तेल एव विटामिन्स के निर्माण में सहायक है।
2. विटामिन्स (थाइमीन व बायोटिन), ग्लूटेथियान एवं एन्जाइम 3ए22 के निर्माण में भी सहायक है। तिलहनी फसलों में तेल की प्रतिशत मात्रा बढ़ाता है।
3. यह सरसों, प्याज व लहसुन की फसल के लिये आवश्यक है। तम्बाकू की पैदावार 15-30प्रतिशत तक बढ़ती है।
गन्धक-कमी के लक्षण
1. नई पत्तियों का पीला पड़ना व बाद में सफेद होना तने छोटे एवं पीले पड़ना।
2. मक्का, कपास, तोरिया, टमाटर व रिजका में तनों का लाल हो जाना।
3. ब्रेसिका जाति (सरसों) की पत्तियों का प्यालेनुमा हो जाना।
(7) लोहा (आयरन) के कार्य
1. लोहा साइटोक्रोम्स, फैरीडोक्सीन व हीमोग्लोबिन का मुख्य अवयव है।
2. क्लोरोफिल एवं प्रोटीन निर्माण में सहायक है।
3. यह पौधों की कोशिकाओं में विभिन्न ऑक्सीकरण-अवकरण क्रियाओं मे उत्प्रेरक का कार्य करता है। श्वसन क्रिया में आक्सीजन का वाहक है।
लोहा-कमी के लक्षण
1. पत्तियों के किनारों व नसों का अधिक समय तक हरा बना रहना।
2. नई कलिकाओं की मृत्यु को जाना तथा तनों का छोटा रह जाना।
3. धान में कमी से क्लोरोफिल रहित पौधा होना, पैधे की वृद्धि का रूकना।
(8) जस्ता (जिंक) के कार्य
1. कैरोटीन व प्रोटीन संश्लेषण में सहायक है।
2. हार्मोन्स के जैविक संश्लेषण में सहायक है।
3. यह एन्जाइम (जैसे-सिस्टीन, लेसीथिनेज, इनोलेज, डाइसल्फाइडेज आदि) की क्रियाशीलता बढ़ाने में सहायक है। क्लोरोफिल निर्माण में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
जस्ता-कमी के लक्षण
1. पत्तियों का आकार छोटा, मुड़ी हुई, नसों मे निक्रोसिस व नसों के बीच पीली धारियों का दिखाई पड़ना।
2. गेहूँ में ऊपरी 3-4 पत्तियों का पीला पड़ना।
3. फलों का आकार छोटा व बीज कीपैदावार का कम होना।
4. मक्का एवं ज्वार के पौधों में बिलकुल ऊपरी पत्तियाँ सफेद हो जाती हैं।
5. धान में जिंक की कमी से खैरा रोग हो जाता है। लाल, भूरे रंग के धब्बे दिखते हैं।
(9) ताँबा (कॉपर ) के कार्य
1. यह इंडोल एसीटिक अम्ल वृद्धिकारक हार्मोन के संश्लेषण में सहायक है।
2. ऑक्सीकरण-अवकरण क्रिया को नियमितता प्रदान करता है।
3. अनेक एन्जाइमों की क्रियाशीलता बढ़ाता है। कवक रोगो के नियंत्रण में सहायक है।
ताँबा-कमी के लक्षण
1. फलों के अंदर रस का निर्माण कम होना। नीबू जाति के फलों में लाल-भूरे धब्बे अनियमित आकार के दिखाई देते हैं।
2. अधिक कमी के कारण अनाज एवं दाल वाली फसलों में रिक्लेमेशन नामक बीमारी होना।
(10) बोरान के कार्य
1. पौधों में शर्करा के संचालन मे सहायक है। परागण एवं प्रजनन क्रियाओ में सहायक है।
2. दलहनी फसलों की जड़ ग्रन्थियों के विकास में सहायक है।
3. यह पौधों में कैल्शियम एवं पोटैशियम के अनुपात को नियंत्रित करता है।
4. यह डी.एन.ए., आर.एन.ए., ए.टी.पी. पेक्टिन व प्रोटीन के संश्लेषण में सहायक है
बोरान-कमी के लक्षण
1. पौधे की ऊपरी बढ़वार का रूकना, इन्टरनोड की लम्बाई का कम होना।
2. पौधों मे बौनापन होना। जड़ का विकास रूकना।
3. बोरान की कमी से चुकन्दर में हर्टराट, फूल गोभी मे ब्राउनिंग या खोखला तना एवं तम्बाखू में टाप- सिकनेस नामक बीमारी का लगना।
(11) मैंगनीज के कार्य
1. क्लोरोफिल, कार्बोहाइड्रेट व मैंगनीज नाइट्रेट के स्वागीकरण में सहायक है।
2. पौधों में आॅक्सीकरण-अवकरण क्रियाओं में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
3. प्रकाश संश्लेषण में सहायक है।
मैंगनीज-कमी के लक्षण
1. पौधों की पत्तियों पर मृत उतको के धब्बे दिखाई पड़ते हैं।
2. अनाज की फसलों में पत्तियाँ भूरे रग की व पारदर्शी होती है तथा बाद मे उसमे ऊतक गलन रोग पैदा होता है। जई में भूरी चित्ती रोग, गन्ने का अगमारी रोग तथा मटर का पैंक चित्ती रोग उत्पन्न होते हैं।
(12) क्लोरीन के कार्य
1. यह पर्णहरिम के निर्माण में सहायक है। पोधो में रसाकर्षण दाब को बढ़ाता है।
2. पौधों की पंक्तियों में पानी रोकने की क्षमता को बढ़ाता है।
क्लोरीन-कमी के लक्षण
1. गमलों में क्लोरीन की कमी से पत्तियों में विल्ट के लक्षण दिखाई पड़ते हैं।
2. कुछ पौधों की पत्तियों में ब्रोन्जिंग तथा नेक्रोसिस रचनायें पाई जाती हैं।
3. पत्ता गोभी के पत्ते मुड़ जाते हैं तथा बरसीम की पत्तियाँ मोटी व छोटी दिखाई पड़ती हैं।
(13) मालिब्डेनम के कार्य
1. यह पौधों में एन्जाइम नाइट्रेट रिडक्टेज एवंनाइट्रोजिनेज का मुख्य भाग है।
2. यह दलहनी फसलों में नत्रजन स्थिरीकरण, नाइट्रेट एसीमिलेशन व कार्बोहाइड्रेट मेटाबालिज्म क्रियाओ में सहायक है।
3. पौधों में विटामिन-सी व शर्करा के संश्लेषण में सहायक है।
मालिब्डेनम-कमी के लक्षण
1. सरसों जाति के पौधो व दलहनी फसलों में मालिब्डेनम की कमी के लक्षण जल्दी दिखाई देते हैं।
2. पत्तियों का रंग पीला हरा या पीला हो जाता है तथा इसपर नारंगी रंग का चितकबरापन दिखाई पड़ता है।
3. टमाटर की निचली पत्तियों के किनारे मुड़ जाते हैं तथा बाद में मोल्टिंग व नेक्रोसिस रचनायें बन जाती हैं।
4. इसकी कमी से फूल गोभी में व्हिपटेल एवं मूली मे प्याले की तरह रचनायें बन जाती हैं।
5. नीबू जाति के पौधो में माॅलिब्डेनम की कमी से पत्तियों मे पीला धब्बा रोग लगता है।

FAQ – अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न –

– फसलों में पोषक तत्वों की कमी की पहचान कैसे करें
– धान की खेती में नाइट्रोजन की कमी को कैसे पहचाने?
– गेहूँ की खेती में नाइट्रोजन की कमी कैसे पहचाने ?
– मुख्य पोषक तत्व और गौड़ पोषक तत्व क्या क्या है?
– सरसों की खेती में मालिब्डेनम-कमी के लक्षण कैसे पहचाने?
– गोभी की खेती में क्लोरीन-कमी के लक्षण की पहचान कैसे करें?
– अनाज की खेती में मैंगनीज-कमी के लक्षण किस प्रकार कैसे पहचाने ?
– फसलों में बोरान तत्व कैसे कार्य करता है?
– जस्ता पोषक तत्व के कार्य क्या है?
– पौधों में फास्फोरस का क्या कार्य है?
– मोलिब्डेनम की कमी के लक्षण कैसे होते हैं?
– पोषक तत्वों की कमी से क्या होता है?
– धान में जिंक की कमी से कौन सा रोग होता है?
– पोषक तत्वों की कमी के लक्षण
– पौधों में नाइट्रोजन की कमी के लक्षण
– चावल में पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों का वर्णन करें
– पौधों का मुख्य पोषक तत्व क्या है
– धान में जिंक की कमी के लक्षण
– पौधों में सल्फर की कमी के लक्षण
– पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोग
– पोषक तत्वों के वर्गीकरण
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उपरोक्त सभी प्रश्नों के उत्तर आपको इस पोस्ट में ज़रूर मिल जाएँगे।

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