तम्बाकू की सूंडी का जैविक कीटनाशक से रोकथाम करें

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तम्बाकू की सूंडी का जैविक कीट नाशक से करें रोकथाम । न्यूक्लियर पॉलीहेड्रासिस वायरस (एन.पी.वी.) पर आधारित हरी सूंडी़ (हेलिकोवर्पा आर्मीजे़रा ) से करें बचाव,

तम्बाकू की सूंडी का जैविक कीटनाशक से रोकथाम करें – how to prevent tobacco crop from biopestcide

न्यूक्लियर पॉलीहेड्रासिस वायरस (एन.पी.वी.) पर आधारित हरी सूंडी़ (हेलिकोवर्पा आर्मीजे़रा) अथवा तम्बाकू सूंड़ी (स्पोडाप्टेरा लिटूरा) काजैविक कीटनाशक है जो तरल रूप में उपलब्ध है। इसमें वायरस कण होते हैं जिनसेसूंडी द्वारा खाने या सम्पर्क में आने पर सूंडियों का शरीर से दिन केभीतर गाढ़ा भूरा फूला हुआ व सड़ा हो जाता हेसफेद तरल पदार्थ निकलता है व मृत्यु हो जाती है। रोग ग्रसित तथा मरी हुई सूंडियां पत्तियों एवं टहनियोंपर लटकी हुई पाई जाती हैं।

एन.पी.वी. कपासफूलगोभीटमाटरमिर्चभिण्डीमटरमूंगफलीसूर्यमुखीअरहरचनामोटा अनाजतम्बाकू एवं फूलों को नुकसान से बचाताहै। प्रयोग करने से पूर्व मिली एन.पी.वी. को लीटर पानी में घोल बनायेतथा ऐसे घोल को 250 से 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 12 से 15 दिनों केअंतराल पर से छिड़काव फसलों के लिए उपयोगी हैं। छिड़काव सांयकाल को कियाजाय तथा ध्यान रहे कि लार्वा की प्रारम्भिक शैशवावस्था में अथवा अंडा देनेकी स्थिति में प्रथम छिड़काव किया जाय। एन.पी.वी. की सेल्फ लाइफ 01 माह है।

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