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Sunday, June 13, 2021
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सरसों की खेती का मॉडर्न तरीका

लेखक – कमल कृपाल

सरसों की खेती ( sarso ki kheti ) का तिलहनी फसलों में बड़ा स्थान है । तेल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा सरसों वर्गीय फसलों से प्राप्त होता है । अकेले राजस्थान में देश का सबसे बड़ा हिस्सा सरसों की पैदावार होती है । किसानो को सरसों की खेती (mustard crop) से अधिक फ़ायदा हो । इसके लिए सरकार ने सरसों के मूल्य पर 225 रुपये प्रति कुंतल वृद्धि की है । इस समर्थित मूल्य के बाद 4650 प्रति कुंतल सरसों का रेट होगा ।

खेती किसानी डॉट ऑर्ग के एक्सपर्ट के मुताबिक अगर किसान भाई खेती किसानी में उन्नत वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल करें तो निश्चित रूप से अधिकतम पैदावार प्राप्त कर सकते हैं । साथ ही फसलों पर कीटों व बीमारियों का प्रकोप भी कम होगा । इस तरह किसान भाई अधिक मुनाफा कमा सकते हैं ।

आज हम सरसों की खेती के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं । सरसों की जैविक खेती कैसे करते हैं ? इस आर्टिकल में आपको इस संबंध में पूरी जानकारी मिलने वाली है । इसलिए मॉडर्न सरसों की खेती करने के तरीके के बारे में जानने के लिए पूरा आर्टिकल जरूर पढ़ें ।

सरसों की खेती ( sarso ki kheti ) हेतु बुवाई का समय

Sowing Time
बारानी (शुष्क ) क्षेत्रों में सरसों की बुवाई 25 सितम्बर से 15 अक्टूबर के बीच करना अच्छा माना जाता है । सिंचित एरिया में सरसों की बुवाई 5 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक किसान भाई जरूर कर दें । सरसों की बुवाई गेंहू की खेती के साथ mix cropping के रूप में उत्तर भारत में किसान भाई करते हैं ।

बीज की मात्रा

Seed Rate –
बुआई के लिए सरसों का अच्छी क्वालिटी का 4 से 5 किलो ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त रहता है ।

अंतरण

Spacing –

सरसों के पौधों के आपस मे सघनता अच्छी पैदावार तय करता है । इसलिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 से 50 की दूरी तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 से0मी0 रखें ।

खाद एवं ऊर्वरक

fertilizers and manures

जैविक खेती में खेत में रासायनिक खादों का प्रयोग न करके जीवाश्म युक्त कार्बनिक खाद का उपयोग करना चाहिये । कम्पोस्ट खादों का अधिक से अधिक प्रयोग करें । सरसों की खेती में रासायनिक खादों के उपयोग को भी जान लें । बुआई के समय खेत में 100 किग्रा सिंगल सुपरफॉस्फेट, 35 किग्रा यूरिया और 25 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश (MoP) का इस्तेमाल करें ।

सिंचाई व जल निकास प्रबंधन

Irrigation
सरसों की खेती के लिए 1-2 सिंचाई पर्याप्त होती है ।फसल की पहली सिंचाई 35-40 दिन के बाद करें । जरूरत होने पर दूसरी सिंचाई फली में दाना बनते समय करें । फसल पर फूल आने के समय सिंचाई नहीं करनी चाहिए ।

सरसों की खेती (mustard crop) में फसल सुरक्षा प्रबंधन

Crop protection management

खरपतवार नियंत्रण

weed control
सरसों की बुआई के बाद 1-3 दिन के अंदर खरपतवार की रोकथाम के लिए पैंडीमेथालीन (30 EC) केमिकल की एक लीटर मात्रा को 400 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से अच्छे परिणाम मिलेंगे । सरसों का खेत अनावश्यक खरपतवार से मुक्त हो जाएगा ।

कीट नियंत्रण

insect control
इसके लिए एन्डोसल्फान 4 प्रतिसत मिथाइल पैरा थियोन 2 प्रतिशत चूर्ण 20 से 25 किलो हेक्टेयर की दर भुरकाव करना चाहिये ।

रोग व नियंत्रण –

disease control

कटाई एवं गहाई

harvesting
सरसों की फसल कटाई उचित समय से करना बहुत ज़रूरी है । क्योंकि फसल के अधिक पकने पर फलियों के चटकने की आशंका बढ़ जाती है । जिससे सरसों के दाने खेत में झड़ जाएँगे । सरसों के पौधों के पीले पड़ने एवं फलियां भूरी होने कटाई कर लेनी चाहिए । सरसों के बोझ या बंडल को सूखने के उपरांत थ्रेसर से मडाई कर लें । सरसों की लाट डंडो से पीट पीटकर भी दाने निकाले जाते हैं ।
सरसों की खेतों (sarso ki kheti) पर केंद्रित यह आलेख आशा है आप सभी के लिए ज्ञानवर्धक साबित होगा । खेत खलिहान व खेती किसानी से जुड़े लेटेस्ट आलेख हेतु साइट पर नियमित विज़िट करते रहें । खेती किसानी से जुड़ी कोई जिज्ञासा व समस्या है तो हमें contact@khetikisani.org पर लिखें ।

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