मोथा के रासायनिक नियंत्रण की तकनीकी जानकारी हिंदी में

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खरपतवार मोथा  के रासायनिक नियंत्रण की तकनीकी जानकारी हिंदी में (Technology of Metha Chemical Control in hindi )

मोथा के रासायनिक नियंत्रण – motha chemical control in hindi 

मोथा (साइप्रस रोटनडस) एक दुष्ट प्रकृति का खरपतवार है। इसके भूमिगत ट्यूबर जमीन के अन्दर लगभग 30-45 सेमी० तक फैले होते है। इन्ही ट्यूबर से इसका प्रसारण तेजी से होता है।खुरपी आदि से निराई के बाद यह पुनः निकल आते है।मोथा का प्रकोप ऊपरहार वाली भूमि में की गई फसलों में ज्यादा भयंकर होता है।
चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानुपर के शस्य विज्ञान विभाग में चल रहे आखिल भारतीय समन्वित खरपतवार योजना के अन्तर्गत किये गये शोध कार्यों के उपरान्त ग्लाइफोसेट नामक रसायन का प्रभाव काफी लाभप्रद सिद्ध हुआ है। इसकी प्रयोग करने की तकनीकी निम्नलिखित है:-
  • जिस खेत में मोथा की गहनता हो उस खेत को वर्षा प्रारम्भ होने के पश्चात खाली छोड़ दिया जाये।
  • ग्लाइफोसेट 41 प्रतिशत की ली०/हे० मात्रा 400-500 लीटर पानी में घोल बनाकर मध्य अगस्त से मध्य सितम्बर तक मोथा की तीव्र वृद्धि की अवस्था पर छिड़काव किया जाये।
  • छिड़काव के बाद सभी खरपतवार 10-15 दिन में सूख जाते हैं। अगर मोथा का जमाव दिखाई दे । तो पुनः एक छिड़काव स्पाट ट्रीटमेन्ट कर देना चाहिए।
  • छिड़काव के बाद एक माह तक खाली छोड़ दिया जायएक माह के अन्दर सभी खरपतवार नष्ट हो जाते है तथा रसायन का भूमि में प्रभाव भी लगभग समाप्त हो जाता है। तत्पश्चात् इच्छा अनुसार अगली फसल तोरिया, आलूगेहूँइत्यादि फसलें बोई जाय।
  • उपरोक्त क्रिया से अगली फसल में मोथा का जमाव लगभग 85 से 97 प्रतिशत तक कम से जाता ह।
  • आवश्यकता महसूस होने पर पुनः छिड़काव (स्पाट ट्रीटमेन्ट) कर दिया जाय। शोध कार्यो से यह भी साबित हुआ है कि लगातार 3-4 साल तक मोथा की गहनता वाले खेतों में ढैंचा तथा तिल की खेती की जाय तो इनकी गहनता में लगभग 50-60 प्रतिशत तक कमी आ जाती है। मक्काअरहर तथा गन्ने के बीच में लोबिया की सहफसली खेती करने से भी मोथा की गहनता में काफी कमी आ जाती है।

रसायन के प्रयोग में सावधानियाँ

  • छिड़काव का उपयुक्त समय मध्य अगस्त से मध्य सितम्बर है। इस समय मोथा तीव्र वृद्धि की अवस्था में होता है तथा उपयुक्त तापक्रम एवं वायुमण्डल आर्द्रता भी प्राप्त होती है।
  • छिड़काव खुली धूप में किया जाय तथा छिड़काव के बाद 6-8 घण्टे धूप का मिलना आवश्यक है।
  • दवा के छिड़काव के समय हवा तेज न हो।

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