टिंडा की खेती कैसे करें (tinde ki kheti in hindi )

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टिंडा की खेती कैसे करें (tinde ki kheti in hindi )

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साथियों आज हम जिस सब्ज़ी के बारे में बात करने जा रहे हैं वह सिर्फ़ अपने स्वाद के लिए नही बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी जानी है। यह उत्तर भारत में ख़रीफ़ व गरमी के मौसम में उगायी जाती है । जी हाँ आज हम बात कर रहे हैं स्वाद और गुणों से भरपूर tinde के बारे में । सिट्रुलस वुलगेरियस (citrullas vulgaris var. fistulosus वनस्पतिक नाम से टिंडा वांस्पतिक दुनिया में जाना जाता है । इसके गुणसूत्रों की संख्या 22 जोड़ा पायी जाती है। कुकरबिटेसी (cucurbitaceae) कुल परिवार की यह सब्ज़ी बड़ी गुणकारी होती है।

उत्तर प्रदेश सहित हरियाणा,पंजाब,राजस्थान महाराष्ट्र में उगाया जाता है । अभी हाल ही में अपनी बढ़ती लोकप्रियता के चलते यह दक्षिण भारत में भी उगाया जाने लगा है।

अगर हम tinde के पोषक मूल्यों की बात करें इसमें रेशा,प्रोटीन,कार्बोहाइड्रेट, लोहा, आदि के साथ-साथ सूक्ष्म खनिज पदार्थ जैसे मैग्नीशियम,फ़ोस्फोरस, पोटेशियम, आदि पाए जाते हैं । विटामिन a, विटामिन c से भरपूर टिंडा सूखी खाँसी व रक्त संचार के रोगों से पीड़ित रोगियों के लिए रामबाण औषधि है।

टिंडा की खेती कैसे करें (tinde ki kheti in hindi )
टिंडा की खेती कैसे करें (tinde ki kheti in hindi )

kheti kisani में आज हम आपको tinde ki kheti कैसे करें इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे।

आइए जानते हैं टिंडा की उन्नत प्रजातियों के बारें में –

किसान भाइयों किसी भी फ़सल की अधिकतम पैदावार के लिए भूमि,उचित ताप,बुवाई का समय,पानी व उचित देखभाल के साथ-साथ उन्नत प्रजातियों का बहुत महत्व होता है।

अर्का टिंडा,टिंडा एस0 48, बीकनेरी ग्रीन, हिसार सेलेक्शन -1, सेलेक्शन – 22,

जलवायु –

tinde ki kheti के लिए गर्म व शुष्क जलवायु अच्छी मानी जाती है किंतु गर्म व मृदु जलवायु में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है। इससे निम्न जलवायु पर इसके बीजों का अंकुरण नही होता है। अंकुरण के लिए 27 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान उपयुक्त होता है।

bhumi jankari व तैयारी –

वैसे तो tinde ki kheti विभिन्न तरह की मृदाओं में उगाया जा सकता है। tinde ki kheti से अधिक पैदावार व लाभ लेने के लिए इसके लिए जीवाश्म युक्त, रेतीली, व दोमट मृदा सर्वाधिक उपयुक्त होती है। नदी तटों की मिट्टी में भी टिंडे की खेती से लाभ लिया जा सकता है। भूमि का पी0एच0 6-7 बढ़िया माना जाता है।

खाद व उर्वरक –

tinde ki kheti से अधिक पैदावार लेने के लिए रासायनिक उर्वरकों के साथ – साथ कार्बनिक व जैविक रसायनों के उपयोग की आवश्यकता होती है। कार्बनिक उर्वरक के रूप में गोबर की खाद 20-25 टन प्रति हेक्टेयर व 100 किलो ग्राम नाइट्रोजन, 100 किलो ग्राम फ़ोस्फोरस व 50 किलो ग्राम पोटाश की मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।

 

खाद व उर्वकों के प्रयोग की विधि –

सबसे पहले गोबर की खाद की पूरी मात्रा को भूमि की तैयारी से पूर्व खेत में मिला दें। इसके बाद नाइट्रोजन की आधी व फ़ोस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा भूमि में डालकर जुताई कर दें। बची हुई नाइट्रोजन की आधी मात्रा को खड़ी फ़सल में टॉप ड्रेसिंग करें।

बुवाई का समय –

tinde ki kheti से अधितम लाभ लेने के लिए समय से बुवाई करना बहुत आवश्यक है। देश के उत्तरी मैदानी भागों में टिंडे की खेती साल में दो बार की जाती है। टिंडे की पहली बुवाई फ़रवरी से अप्रैल माह में करें तथा दूसरी खेती के लिए जून – जुलाई में बुवाई करें।

बीज की मात्रा –

tinde ki kheti के लिए उच्च गुणवत्ता वाला, सुडौल, स्वस्थ अच्छी प्रजाति के 4-5 किलो ग्राम बीज की मात्रा पर्याप्त होती है।

बुवाई की विधि –

टिंडे की बुवाई थालों में की जानी चाहिए। लाइन से लाइन की दूरी 2 से 2.5 मीटर व थालों से थालों की आपस की दूरी 1 से 1.5 मीटर रखते हैं। हर थाले में 4-5 बीज की बुवाई करनी चाहिए। बीजों के अंकुरण के बाद,  केवल दो स्वस्थ पौधों को छोड़कर बाक़ी के पौधे उखाड़ देने चाहिए। पर्याप्त सघनता होने पर पौधों की बढ़वार अच्छी होती है।

सिंचाई व खरपतवार नियंत्रण –

सिंचाई की संख्या भूमि की क़िस्म व स्थानीय जलवायु पर निर्भर करती है। किसान साथियों टिंडा एक उथली जड़ वाली फ़सल है। इसमें सिंचाई की आवश्यकता अधिक होती है। टिंडे की फ़सल पर पहली सिंचाई अंकुरण के 5 से 8 दिन के अंदर करनी चाहिए। टिंडे में बौछारी विधि से सिंचाई करने पर 28 से 30 प्रतिशत उपज बढ़ायी जा सकती है। साथ ही tinde ki kheti में विधि से सिंचाई करने पर हम पानी के दुरुपयोग को भी रोक सकते हैं। जल हाई जीवन है। इस बात को हमें हमेशा ध्यान रखना चाहिए। save water save life .

टिंड़े की फ़सल पर पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के दो सप्ताह बाद करनी चाहिए। निराई के दौरान अवांछित खर पतवारों को उखाड़ दें । साथ ही पौधों की जड़ों में मिट्टी चढ़ा दें। अधिक खरपतवार की दशा में एनाक्लोर रसायन की 1.25 लीटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर मात्रा का छिड़काव करना चाहिए।

tinde ki kheti से अधिक पैदावार कैसे लें –

टिंडे के खेत में मैलिक हाइड्राजाइड (malic hydrazide) के 50 ppm का 2 से 4 प्रतिशत मात्रा का पत्तियों पर छिड़काव करने पर 50-60 प्रतिशत पैदावार में बढ़ोत्तरी पायी जा सकती है।

पौध सुरक्षा (plant  protection ) –

टिंडे की फ़सल पर लगने वाले कीटों की रोकथाम –

टिंडे की फ़सल पर लगने वाले रोगों का नियंत्रण –

तोड़ाई का समय –

टिंड़े के फल बनने के  एक सप्ताह के अंदर तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते है। पौधे छोटे व कोमल हों तुड़ाई कर लेनी चाहिए। अन्यथा कड़े फल हो जाने पर फल सब्ज़ी बनाने लायक नही रहते हैं। बाज़ार में उसका उचित मूल्य नही मिलता। इसलिए पहली तुड़ाई के 4 -5 दिन के अंतराल पर तुड़ाई करते रहना चाहिए।

उपज व पैदावार –

tinde ki kheti से प्राप्त पर कई बातें निर्भर करती हैं । जैसे बीजों की गुणवत्ता, बुवाई का समय, भूमि की क़िस्म, जलवायु व ताप आदि । आमतौर पर उन्नतशील टिंडे की खेती से 80-120 कुन्तल प्रति हेक्टेयर की पैदावार मिल जाती है।

आशा है आपको kheti kisani की पोस्ट tinde ki kheti ज़रूर पसंद आयी होगी ।

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