तम्बाकू की उन्नत खेती की जानकारी | Tobacco farming in hindi

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तम्बाकू (Tobacco) की खेती किसानों के लिए कम समय व कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली नगदी फसल होती है। यह सोलेनेसी (Solanaceae) परिवार से सम्बन्ध रखता है। इसका वैज्ञानिक नाम निकोटियाना टैबैकम (Nicotiana tabacum) और साधारण नाम खैनी, सुरती, मीठा जहर है। तम्बाकू की खेती किसानों के लिए कम समय व कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल होती है। वैज्ञानिकों ने तंबाकू की एक ऐसी किस्म विकसित की है जिससे उत्पादन तो ज्यादा मिलेगा ही साथ ही इसमें निकोटिन की मात्रा ज्यादा होने से इसका इस्तेमाल एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल दवाएं बनाने में किया जाएगा।

कहाँ होती है तम्बाकू की खेती –

इसकी खेती चीन, भारत, ब्राजील, संयुक्त राज्य अमेरिका, जिम्बाब्वे, तुर्की और मलावी आदि देशों में व्यावसायिक रूप से की जाती है। भारत में तम्बाकू की खेती मुख्य रूप से आंध्रा प्रदेश, गुजरात, मद्रास, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, मैसूर, हैदराबाद, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा पंजाब आदि राज्यों में की जाती है। देश का लगभग 85 प्रतिशत तम्बाकू का उत्पादन क्षेत्र मात्र चार राज्यों आन्ध्र प्रदेश (36 प्रतिशत), कर्नाटक (24 प्रतिशत), गुजरात (21 प्रतिशत) और बिहार (4 प्रतिशत) में है। आज विश्वभर में अमेरीका तथा चीन के बाद बड़े पैमाने पर तम्बाकू पैदा करने वाला तीसरा देश भारत है। हर साल करीब 45 करोड़ रुपए तम्बाकू की खेती से उत्पादकों को मिलते हैं।

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उपयोगिता

तम्बाकू (Tobacco) की उपयोगिता इस प्रकार है-

खाद्य पदार्थ में –

इसका इस्तेमाल धुआँ और धुआँ रहित नशे की चीजों में किया जाता है। जैसे- सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, गुल, पान मसाला, जर्दा, खैनी, गुटखा आदि।

कृषि में –
तम्बाकू का इस्तेमाल जैविक कीटनाशक बनाने में किया जाता है। इसके साथ ही इसकी खली का पशुओं को खिलाने या खेतों के लिए खाद के रूप में भी उपयोग हो सकता है।
औषधियों में –

तंबाकू का इस्तेमाल कई तरह की दवाइयां बनाने में भी किया जाता है। इसमें निकोटिन की मात्रा होने से इसका इस्तेमाल एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल दवाएं बनाने में किया जा सकता है।
उद्योग में: तम्बाकू के बीज से निकलने वाले तेल का उपयोग वार्निश और रंग के उद्योग में भी किया जाता है। कृषि आनंद एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने ‘ऑटोमेटिक तेल मिल’ को भारत की पहली मशीन बताया है जो तम्बाकू से तेल निकाल सकती है।

जलवायु –

तम्बाकू (Tobacco) की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त होता हैं। लेकिन भारत में इसकी खेती लगभग सभी क्षेत्रों की जलवायु में सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

तापमान –

तम्बाकू (Tobacco) के पौधे की बेहतर विकास के लिए 18 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान और 50 से 100 सेंटीमीटर तक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए उपयुक्त होता है। इसकी खेती समुद्र तल से लगभग 1800 मीटर ऊंचाई तक की जा सकती है।

भूमि का चयन –

तम्बाकू (Tobacco) की खेती से अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए अच्छी जल निकास वाली लाल दोमट व कछारी मिट्टी जिसका PH मान 6 से 8 हो उपयुक्त होती है।

भूमि की तैयारी

तम्बाकू (Tobacco) से अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए भूमि तैयारी के समय खेत की 3 से 4 बार अच्छी तरह जुताई कर खेत को समतल करें।

उन्नत किस्में –

तंबाकू को तीन भागों में बांटा जाता है, एक हुक्का तंबाकू, सिगार तंबाकू और चबाने वाला तंबाकू –

निकोटिना टुवैकम –

पुरे भारत में सबसे ज्यादा इस प्रजाति के किस्मों की खेती की जाती है। इसके पौधे लम्बे, पत्तियां बड़ी व फूल का रंग गुलाबी होती हैं। इस किस्म के प्रजाति का उपयोग सिगरेट, सिगार, हुक्का और बीडी बनाने में ज्यादा उपयोग किया जाता है। इस प्रजाति के उन्नत किस्म इस प्रकार है – टाइप-23, टाइप-49, टाइप-238, एमपी-220, फर्रुखाबाद लोकल, पटुवा, मोतिहारी, कलकतिया, पीएन-28, एनपीएस-219, पटियाली, सी-302 आदि।

निकोटिना रस्टिका –

इस किस्म की खेती के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है। इसके पौधे छोटा और पत्तियां रूखी एवं भरी, रंग काला व महक तेज होती है। इस किस्म के प्रजाति का उपयोग खाने, सूंघनी व हुक्का में किया जाता है। इस प्रजाति के उन्नत किस्म इस प्रकार है- पीटी-76, पीएन-70, एनपी-35, हरी बंडी, कोइनी, सुमित्रा, गंडक बहार, प्रभात, रंगपुर आदि।

एआरआर-27 ‘रवि –

ये किस्म हुक्का तंबाकू किस्म का है। कानपुर नगर के अरौल में इस नई किस्म एआरआर-27 ‘रवि’ की कई किसानों ने खेती भी शुरु की है, किसानों के बीच अच्छा परिणाम भी आया है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और केंद्रीय तंबाकू शोध संस्थान के संयुक्त रूप से विकसित की गई नई प्रजाति के अच्छे रिजल्ट आए हैं। इसकी पत्तियों का साइज भी बड़ा होता है और दूसरी किस्मों के मुकाबले उत्पादन भी अधिक है, इसमें 34 कुंतल प्रति हेक्टेयर पैदावार होती है।”

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बीज की मात्रा –

तम्बाकू (Tobacco) का बीज का आकार और वजन काफी भिन्न होता है। निकोटिना टैबैकम में बीज का औसत वजन 0.08 से 0.09 mg होता है। लेकिन निकोटिना रस्टिका के, बीज बड़ा और इसके बीज से लगभग तीन गुना भारी होता है। इस प्रकार इसके बीज की मात्रा प्रति एकड़ इस प्रकार है-

– निकोटिना टैबैकम: लगभग 1.2 किलोग्राम बीज प्रति एकड़
– निकोटिना रस्टिका: लगभग 2 किलोग्राम बीज प्रति एकड़

तम्बाकू का बीज कहां मिलेगा –

तम्बाकू (Tobacco) का बीज आप ऑनलाइन खरीद सकते है। इसके अलावा सरकारी उद्यानिकी विभाग या अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि कॉलेज में संपर्क कर इसकी खेती के बारे में जानकारी ले सकते है।

बीज उपचार –

तम्बाकू (Tobacco) के बीज को 2.5 ग्राम थीरम की दर से प्रति किलो बीज उपचारित करें।

रोपाई का समय –

तम्बाकू (Tobacco) के पौधे की रोपाई अक्टूबर का समय उपयुक्त हैं। लेकिन कुछ किस्मों की रोपाई दिसम्बर तक की जा सकती है।

तम्बाकू की नर्सरी तैयार करने की विधि –

तम्बाकू के लिए नर्सरी तैयार करते समय सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि हर वर्ष एक ही भूमि पर नर्सरी तैयार न करें। इसकी नर्सरी के लिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों का चयन करें। नर्सरी के लिए बलुई मिट्टी और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है। इसके साथ ही क्षारीय मिट्टी का चयन करने से बचें। मुख्य खेत में पौधों की रोपाई से करीब 1 से 1.5 महीने पहले नर्सरी तैयार की जाती है। सबसे पहले मिट्टी पलटने वाली हल से 2 बार गहरी जुताई करें। इसके बाद मिट्टी को हल्की जुताई करके समतल एवं भुरभुरी बना लें। नर्सरी में जल जमाव की समस्या से निजात पाने के लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। तम्बाकू के बीज की कई तरह से बुवाई की जाती है। आप छिड़काव विधि से भी बुवाई कर सकते हैं, लेकिन इसमें बीज की मात्रा अधिक लगती है।
इसके अलावा आप नर्सरी में क्यारियां बनाकर बीज की बुवाई कर सकते हैं। क्यारियों पर बुवाई करने से पौधों को निकालने में आसानी होती है और खरपतवार पर नियंत्रण एवं सिंचाई में भी सुविधा होती है। यदि भारी मिट्टी में नर्सरी तैयार करनी हो तो प्रति एकड़ भूमि में 40 टन बालू मिलाएं। जुताई करते समय प्रति एकड़ खेत में 140 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट मिलाएं। नर्सरी में पौधों को गलन रोग से बचाने के लिए रिडोमिल एम जेड का 0.2% घोल का छिड़काव करें। सिंचाई की आवश्यकता होने पर हजारे से सिंचाई करें। बुवाई के बाद क्यारियों को पुआल से ढक दें। बीज बुआई के लगभग 30 से 40 दिन बाद पौध (लगभग 4 से 6 इंच के पौधे) रोपाई हेतु तैयार हो जाती है।

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तम्बाकू की नर्सरी तैयार करने की रैबिंग विधि –

तंबाकू की रोपाई का आदर्श समय 20 सितंबर से 10 अक्टूबर माना गया है। 6-8 सप्ताह के स्वस्थ बीचडे़ की रोपाई करनी चाहिए। इसके लिए किसानों को तंबाकू की पौधशाला में स्वस्थ बीचडे़ उत्पादन के लिए रैबिंग विधि अपनाना चाहिए। इसमें सूखे खर-पतवार, पत्तिया या पुआल की 15-20 सेमी मोटी परत मिट्टी के उपर बिछाकर उसे जलाया जाता है। फलस्वरूप खर पतवार के बीज एवं मिट्टी में उपस्थित रोग एवं कीडे़ नष्ट हो जाते हैं। बीज गिराने से पूर्व क्यारी में तोड़ी की खल्ली, सिंगल सुपर फास्फेट तथा 10 ग्राम फ्यूराडान दबा अच्छी तरह मिला दे। अच्छे अंकुरण के लिए बुआई के समय क्यारी में नमी का होना भी आवश्यक है। तेज धूप और तेज वर्षा से बीचडे़ को बचाने के लिए टाटी से ढंक दें। अंकुरण बाद उसे हटा लें। क्यारी से घने पौधे हटाए एवं नमी बनाये रखे। छह से आठ सप्ताह के बीज की रोपाई करें। अगस्त के अंतिम सप्ताह में बीचडे़ अवश्य गिरा लें।

पौधे की संख्या –

तम्बाकू (Tobacco) की उन्नत खेती के लिए पंक्ति से पंक्ति की बीच की दूरी और पंक्ति में पौधे से पौधे के बीच का दूरी इस प्रकार रखते है तो प्रति एकड़ पौध की आवश्यकता होती है- 90 × 75 सेंटीमीटर = लगभग 6,000 पौधे

रोपाई की विधि – Tobacco planting methods

तम्बाकू (Tobacco) के पौधे का रोपण 90 × 75 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना सबसे उत्तम होता है।

ये प्रभेद हैं फायदेमंद –

आरएयू के तकनीकी सहायक उदय कुमार के अनुसार तम्बाकू की उपज एवं गुणवत्ता के ख्याल से पीटी 76 प्रभेद के लिए 1 मीटर गुणा 90 सेमी तथा वैशाली स्पेशल, सोना, विच्छवी एवं अन्य प्रभेद के लिए 90 सेमी गुणा 75 सेमी की दूरी एवं विनियास उत्तम होता है। अच्छी आमदनी हेतु पीटी 76, वैशाली स्पेशल और लिच्छवि प्रभेदों में अन्य प्रभेदों के अपेक्षा ज्यादा निकोटिन पाया जाता है। जिससे बाजार में अच्छा मूल्य किसानों को मिलता है।

सिंचाई – Tobacco crops irrigation

तम्बाकू (Tobacco) के पौधे की रोपाई के तुरंत बाद इसमें सिंचाई कर देनी चाहिए। उसके बाद मौसम एवं मिट्टी में नमी के आवश्यकता अनुसार 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए।

खरपतवार नियंत्रण – Tobacco crops weed control

तम्बाकू (Tobacco) के स्वस्थ पौधे और अच्छी विकास एवं पैदावार के लिए रोपाई के 20 से 25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करें। उसके बाद समय-समय पर आवश्यकता अनुसार निराई-गुराई करें।

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पौधे की देखभाल – Tobacco plants care

तम्बाकू (Tobacco) के पौधे की देखभाल करना बहुत ही जरूरी है। इसके पौधे से निकलने वाले फूल की कालिया या साइड शाखाओं को तोड़ देना चाहिए। लेकिन बीज उत्पादन के लिए इसके फूल नहीं तोड़ना चाहिए।

तम्बाकू की उन्नत खेती की जानकारी | Tobacco farming in hindi
तम्बाकू की उन्नत खेती की जानकारी | Tobacco farming in hindi

फसल कटाई – Tobacco crops harvesting

तम्बाकू (Tobacco) के पौधे लगभग 120 से 135 दिन में पककर तैयार हो जाती है। जब पौधे के निचे की पत्ती कठोर होकर सूखने लगे उसके बाद पौधे को जड़ के पास से इसकी कटाई कर लेनी चाहिए।

तम्बाकू तैयार करना –

तम्बाकू (Tobacco) के पौधे कटाने के बाद उसे दो से तीन दिन तक खेत में सुखाया जाता है। उसके बाद उन्हें एक जगह एकत्रित कर कुछ दिन के लिए ढक दिया जाता है या मिट्टी में दबा देते है। सुखाने के दौरान इसके पौधों की पलटते रहना चाहिए। सुखाने के वक्त इसके पौधों में नमी और सफेदी जितनी ज्यादा आती है तम्बाकू उतनी ही अच्छा गुण, रंग, स्वाद व गंध मिलती है।

तम्बाकू से उपज – Tobacco yield

तम्बाकू (Tobacco) के फसल से लगभग प्रति एकड़ 2 से 2.5 क्विंटल उपज प्राप्त होता है। लेकिन दक्षिणी काली मिट्टी में इसकी औसत उपज लगभग 6 से 7 क्विंटल प्रति एकड़ है।

तम्बाकू का उपज कहाँ बेचें – Tobacco Marketing

तम्बाकू (Tobacco) की पैदावार आप व्यापारी या मार्किट में अपना माल बेच सकते हैं।
तम्बाकू की खेती के लिए दिशा-निर्देश-
– तम्बाकू (Tobacco) की खेती से कम समय में अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए नर्सरी में तैयार स्वास्थ्य पौधे का चयन करें।
– तम्बाकू की नर्सरी पर विशेष रूप से ध्यान दें।
– तम्बाकू की फसल से अच्छे पैदावार और निकोटिन की अधिक मात्रा के लिए समय पर पौध की रोपाई करें।
– तम्बाकू में नइट्रोजन की अधिक आवश्यकता होती है।
– तम्बाकू की खेती के लिए कोई लाइसेंस की जरुरत नहीं होती है।

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