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Wednesday, April 14, 2021
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कृषि के प्रकार (types of agriculture) kheti के बारे में जाने

कृषि के प्रकार (types of agriculture) kheti के भेद जाने

● मिश्रित खेती (Mixed farming)
● बहुसस्यन अथवा बहुफसली खेती (multicultural farming)
● समोच्च खेती (Contour farming)
● गली खेती (street farming)
● अनुपद खेती (Crop farming)
● सतत अथवा क्रमवार खेती (Continuous or alternate farming)
● शुष्क खेती (Dry farming)

● मिश्रित खेती (Mixed Farming) :-

types of agriculture
types of agriculture

types of agriculture कृषि में अधिकतम लाभ और कम जोखिम के उद्देश्य की पूर्ति हेतु फसल उत्पादन के साथ पशुपालन भी किया जाना मिश्रित खेती अथवा Mixed Farming कहलाता है ।

“फसलों के उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन करने को मिश्रित कृषि या मिश्रित खेती (Mixed farming) कहते हैं।”

“When crops are produced along with animal husbandry, it is called mixed farming. “

फसलों के उत्पादन से प्राप्त आय से अलावा जब पशुपालन भी आय का एक स्रोत हो तो ऐसी खेती को मिश्रित खेती कहते हैं।

 अच्छा दूध देने वाली दुधारू गाय एवं भैंस पालन व फसल के उत्पादन तक मिश्रित खेती को माना गया है ।

types of agriculture में फसल उगाने गाय-भैंस पालन के अतिरिक्त भेड़, बकरी तथा कुक्कुट पालन अथवा मुर्गीपालन किया जाना व भी किया जाता है तब ऐसी कृषि को Diversification farming अथवा विविधकरण खेती कहा जाता है ।

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मिश्रित् खेती क्यों करता है किसान ? प्रचलन,शौक अथवा मजबूरी ?

हमारे किसान भाइयों द्वारा मिश्रित खेती का किया जाना पर कहीं पर लाभ की पूर्ति के तो कहीं पर सिर्फ मजबूरी के लिए करता है । types of agriculture में अगर किसी क्षेत्र विशेष में पशुओं की महामारी का प्रकोप होता है । तब किसान भाई केवल फसल उत्पादन ही कर पाता और उसी से अपनी जीविका चलाता है । और यदि बोई गई फसलों में किसी प्रकार की बीमारी अथवा संक्रमण होने  की सम्भावना हो, तो भारतीय किसान अपने जीवन यापन व अजीविका के लिये फिर पशुपालन की अनायास ही मुड़ जाता है ।

बहुसस्यन अथवा बहुफसली खेती या रिले क्रॉपिंग (multicultural farming) :-

types of agriculture में बहुसस्यन अथवा बहुफसली खेती का सीधा सा मतलब है उस कृषि विधि से है जिसमें एक वर्ष में दो से अधिक फसलों का उत्पादन किया जाता है ।

1. मिलवा फसल (मिक्स्ड क्रॉपिंग) –

एक ही मौसम में एक ही खेत में एक से अधिक फसलो को उगाना या बोना मिलवां फसल कहलाता हैं । मिलवा फसले छिटकवाँ लाइन में बोई जाती हैं ।


2. बहुफसली खेती (मल्टीप्ल क्रॉपिंग और रिले क्रॉपिंग/multiple cropping or relay cropping ) –

बहुफसली खेती से तातपर्य उस कृषि पद्दति से है जिसमे एक ही खेत में एक बर्ष की अवधि में दो या दो से अधिक फसले उगाई जाती हैं ।

3.शुष्क खेती (ड्राई फार्मिंग/dry framing) –

शुष्क खेती का अर्थ उन क्षेत्रों की फसल उत्पादन विधि से है जहाँ वार्षिक वर्षा 40- 48 सेंटीमीटर तक या इससे कम होती  हैं तथा सिचाई का अभाव है । 

4. दियारा खेती-

नदियों के दोनों से लगी भूमि जो की बर्षा ऋतु में बाढ़ के पानी में डूब जाती है और वर्षा समाप्त होने पर पानी उतरते ही दिखाई देने लगती है दियारा भूमि कहलाती है इस प्रकार की भूमि में खेती  करने को दियारा खेती कहतें है ।

5.मिश्र या मिश्चित खेती(mixed farming)-

मिश्रित खेती का अर्थ खेती की उस व्यवस्था से है जिसमे फसल उगाने के साथ साथ कृषि से सम्बंधित सहायक धंधे भी अपनाये जाते है, जो कि खेती के पूरक होते हैं, जैसे – खेती के साथ – साथ पशु – पालन , मुर्गी पालन, भेड़, बकरी ,सुगर पालन ,मौन(मधुमक्खी ) पालन आदि ।

6. विशिष्ट खेती (specialized farming/स्पेशलाइज्ड फार्मिंग) –

विशिष्ट खेती उस खेती जो कहते हैं जिसकी कुल आय का 50% या इससे अधिक आय एक ही फसल या एक ही कृषि जिन्स से प्राप्त होती है । उदाहरण –  यदि किसी फार्म या किसी किसान के खेत पर आधे से अधिक भाग पर गन्ना की खेती होती हैं तो ऐसी कृषि को गन्ने की विशिष्ट खेती कहते हैं अथवा धान आलू , गेहूं, कपास अथवा जिस फसल का क्षेत्रफल 50% से अधिक होगा उसे उसी फसल की विशिष्ट खेती कहेगे ,जैसे- बंगाल , तमिलनाडु , उड़ीसा में धान महाराष्ट्र और गुजरात में कपास , असोम में चाय महाराष्ट्र तथा वेस्ट उत्तर प्रदेश में गन्ना , हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती आदि । इस खेती से यह लाभ है कि जलवायु और भूमि जे के गुणो के अनुसार विशिष्ट खेती करने से आदर्श उपयोग होता है! पैदावार अधिक होती हैं! परन्तु विशिष्ट खेती के कुछ दोष हैं, जैसे – प्रतिकूल मौसम तथा बाजार की स्थति का अधिक प्रभाव पड़ता है !एक ही फसल उगाने से मृदा उर्वरता में कमी आ जाती हैं! किसान को बर्ष भर में एक बार या दो बार ही आय होती हैं  ।

7. यांत्रिक खेती ( mechanized farming)-

यांत्रिक खेती का अर्थ उस खेती से है जो पूर्यता  या अधिकाशतः यंत्रो द्वारा की जाती हैं! ऐसी खेती में मनुष्य बल का प्रयोग अथवा पशु का प्रयोग के स्थान पर यंत्रो का अधिक प्रयोग में लाये जाते है ! यांत्रिक खेती में श्रम के स्थान पर पूँजी तथा मशीनों का महत्व अधिक है ।

kheti kisani टीम को उम्मीद है types of agriculture से जुड़ी यह पोस्ट आपको पसंद आएगी ।

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